गुड़गांव। हरियाणा के गुड़गांव स्थित राइजिंग होम्स (पूर्व सारे होम्स) सोसाइटी में ब्रह्माकुमारीज़ सेवाकेंद्र पर 90वीं त्रिमूर्ति महाशिवरात्रि महोत्सव अत्यंत भव्यता और आध्यात्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर शिव ध्वजारोहण, भाई-बहनों को शपथ और 3000 घरों की सोसाइटी में शोभायात्रा निकाली गई।
शिवरात्रि — सभी पर्वों में महान और श्रेष्ठ
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज़ बहनों ने बताया कि महाशिवरात्रि का महापर्व अनेक आध्यात्मिक रहस्यों को अपने में समेटे हुए है। यह पर्व सभी पर्वों में इसलिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि यह परमात्मा के दिव्य अवतरण का यादगार पर्व है — एक ऐसा अवसर जब ईश्वर स्वयं इस धरा पर आते हैं और अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं।

शिव और शंकर में है महान अंतर — प्रोमिला बहन ने समझाया रहस्य
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रोमिला बहन ने श्रोताओं को शिव और शंकर के बीच के महान अंतर को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार एक पिता और पुत्र में अंतर होता है, ठीक उसी प्रकार परमपिता परमात्मा शिव और शंकर में भी अंतर है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रह्मा, विष्णु और शंकर — तीनों के रचनाकार सर्वशक्तिमान परमेश्वर शिव ही हैं। परमात्मा शिव ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की स्थापना, शंकर द्वारा विनाश और विष्णु द्वारा पालना कराते हैं। शंकर जी को इस सृष्टि के विनाश का निमित्त बनाया गया है।
“शंकर हमेशा शिवलिंग के सामने तपस्या में दिखाए जाते हैं — यही प्रमाण है कि शंकर, परमात्मा शिव के भक्त और रचना हैं।” — प्रोमिला बहन
शिवलिंग का अर्थ — क्यों है काला रंग?
प्रोमिला बहन ने शिवलिंग के प्रतीकात्मक अर्थ को भी सुंदर ढंग से समझाया।
- शिव का अर्थ है — कल्याणकारी
- लिंग का अर्थ है — चिह्न अर्थात् प्रतीक
इसलिए “शिवलिंग” का अर्थ है — कल्याणकारी परमात्मा का प्रतीक। परमात्मा निराकार ज्योति स्वरूप हैं और उन्हें साकार रूप में पूजने के लिए शिवलिंग का निर्माण किया गया।
शिवलिंग को काले रंग में दिखाए जाने का कारण भी बताया गया — अज्ञानता रूपी रात्रि में परमात्मा अवतरित होकर अज्ञान और अंधकार को मिटाते हैं। काला रंग उस अज्ञान-रात्रि का प्रतीक है।
परमपिता शिव — महादेव, त्रिमूर्ति, त्रिलोकीनाथ और त्रिकालदर्शी
कार्यक्रम में परमात्मा शिव की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया। बताया गया कि —
- परमात्मा शिव 33 करोड़ देवी-देवताओं के भी महादेव हैं
- वे ब्रह्मा, विष्णु, शंकर के रचयिता — त्रिमूर्ति हैं
- तीनों लोकों के स्वामी — त्रिलोकीनाथ हैं
- तीनों कालों को जानने वाले — त्रिकालदर्शी हैं
- वे समस्त मनुष्यात्माओं के परमपिता हैं
परमात्मा शिव अजन्मा हैं, अभोक्ता हैं। उनका जन्म नहीं होता, बल्कि परकाया प्रवेश होता है। वे ज्ञान के सागर, आनंद के सागर, प्रेम के सागर और सुख के सागर हैं। उनका स्वरूप ज्योतिर्बिंदु है और वे परमधाम के निवासी हैं।
शिव ध्वजारोहण और शपथ — बुराइयों को छोड़ने का संकल्प
महोत्सव में शिव ध्वजारोहण किया गया, जो इस आयोजन का सबसे भावपूर्ण क्षण रहा। सारे होम्स सेवाकेंद्र की बहनों ने उपस्थित भाई-बहनों को बुराइयों को छोड़ने और सद्गुण अपनाने की शपथ दिलाई। इस प्रतिज्ञा ने उपस्थित जनसमूह में एक नई चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया।
3000 घरों में निकली भव्य शोभायात्रा
शिव जयंती महोत्सव पर 3000 घरों की राइजिंग होम्स सोसाइटी में एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस शोभायात्रा में सोसाइटी के निवासियों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया और पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा।
गणमान्य लोगों ने की शिरकत, दिखाई एकता और आस्था
इस महोत्सव में सोसाइटी और आसपास के क्षेत्र से अनेक गणमान्य व्यक्ति सम्मिलित हुए —
- पार्षद शेर सिंह जी
- RWA प्रेसिडेंट प्रवीण कुमार जी
- जीडी इंटरनेशनल के डायरेक्टर सुनील यादव जी
सभी ने परमात्मा शिव के प्रति अपनी असीम श्रद्धा व्यक्त की और आपसी शांति, एकता तथा विश्वास का संदेश दिया। इस आयोजन को सफल बनाने में सारे होम्स व आसपास की सोसाइटियों के अनेक निवासियों का सहयोग रहा।
निष्कर्ष — परमात्म ज्ञान से नया भाग्य बनाने का अवसर
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि शंकर और शिव को एक मानने की भूल के कारण मनुष्य परमात्म प्राप्तियों से वंचित रहा है। अब यह अनमोल अवसर है कि सही ज्ञान के आधार पर अपना भाग्य पुनः निर्मित किया जाए।
महाशिवरात्रि का यह उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक आत्मजागरण का क्षण था — जहाँ हर आत्मा को परमात्मा से जुड़ने और अपने भीतर के अंधकार को मिटाने का निमंत्रण मिला।
रिपोर्ट: देश की पत्रिका संवाददाता, गुड़गांव
