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साइबर अपराधियों से एक कदम आगे रहने की तैयारी: पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बढ़ाई गौतमबुद्धनगर पुलिस की तकनीकी क्षमता

Desh Ki Patrika Desk
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संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • मंगलवार, 1 सितंबर 2026 | 09:02 AM

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साइबर अपराधियों से एक कदम आगे रहने की तैयारी: पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बढ़ाई गौतमबुद्धनगर पुलिस की तकनीकी क्षमता
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नोएडा। आधुनिक युग में जहां सूचना प्रौद्योगिकी ने मानव जीवन को सुगम बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने भी अपराध के नए और जटिल रास्ते तलाश लिए हैं। डिजिटल स्पेस में तेजी से बदलते अपराध के स्वरूप और अत्याधुनिक तकनीकों के दुरुपयोग से निपटने के लिए गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने अपनी तैयारियों को नई धार दी है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व में साइबर अपराधियों से एक कदम आगे रहने की रणनीति पर काम शुरू हो चुका है। इसी कड़ी में लक्ष्मी सिंह ने पुलिस की तकनीकी क्षमता को अभूतपूर्व स्तर पर सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन कराया।

सोमवार, 31 अगस्त को आयोजित इस एक दिवसीय साइबर जागरूकता एवं क्षमता संवर्धन कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों और विवेचकों को डिजिटल अपराधों की तह तक पहुंचने के अत्याधुनिक तौर-तरीकों से लैस किया गया। गौतमबुद्धनगर जैसे अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक और तकनीकी हब में बढ़ती साइबर चुनौतियों को देखते हुए यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तकनीकी रूप से सक्षम पुलिसिंग: समय की सबसे बड़ी आवश्यकता

नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे क्षेत्रों में जहां सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों, बहुराष्ट्रीय निगमों और स्टार्ट-अप्स का विशाल नेटवर्क है, वहां डिजिटल फ्रॉड और फाइनेंशियल साइबर क्राइम का दायरा लगातार बढ़ रहा है। कोरोना काल के बाद से जब डिजिटल लेनदेन और वर्क-फ्रॉम-होम संस्कृति बढ़ी, तब से साइबर अपराधियों ने भी आम नागरिकों को निशाना बनाने के नए तरीके खोजे हैं। हाल के वर्षों में जैसे-जैसे डिजिटल जीवनशैली बढ़ी है, ठीक उसी प्रकार नोएडा और गाजियाबाद में डिजिटल गतिविधियों में वृद्धि के साथ-साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में भी जटिलता आई है।

इसी परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पारंपरिक पुलिसिंग के साथ-साथ विवेचकों को डिजिटल फॉरेंसिक और डेटा एनालिसिस में निपुण होना अनिवार्य है। इस प्रशिक्षण कार्यशाला का मूल उद्देश्य पुलिस कर्मियों को केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित न रखकर, डिजिटल साक्ष्यों के वैज्ञानिक एकत्रीकरण और विश्लेषण में पारंगत बनाना है ताकि अपराधियों को न्यायालय में कठोरतम सजा दिलाई जा सके।

कार्यशाला का स्वरूप और प्रमुख प्रतिभागी

इस महत्वपूर्ण क्षमता संवर्धन कार्यशाला का सफल संचालन सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर) विवेक रंजन राय के कुशल नेतृत्व में किया गया। कार्यशाला में पुलिस महकमे की विभिन्न महत्वपूर्ण इकाइयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इसमें मुख्य रूप से शामिल थे:

  • साइबर क्राइम थाना के वरिष्ठ विवेचक एवं तकनीकी विशेषज्ञ।
  • तीनों जोनल (नोएडा, सेंट्रल नोएडा, ग्रेटर नोएडा) साइबर सेल के अधिकारी।
  • कमिश्नरेट की सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेल के तकनीकी कर्मी।
  • वर्ष 2023 बैच के नए उपनिरीक्षक (Sub-Inspectors), जिन्हें आधुनिक पुलिसिंग के सिद्धांतों से लैस किया जा रहा है।
  • कमिश्नरेट के समस्त थानों में स्थापित साइबर हेल्पडेस्क पर तैनात समर्पित पुलिसकर्मी।

इस व्यापक भागीदारी का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि थानों के प्राथमिक प्रतिक्रिया स्तर (First Responders) से लेकर मुख्यालय की विशेष जांच एजेंसियों तक, ज्ञान और कौशल का एक समान स्तर स्थापित हो सके।

डिजिटल साक्ष्य: आधुनिक विवेचना की सबसे मजबूत रीढ़

कार्यशाला के मुख्य सत्र में देश के प्रख्यात साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन ने पुलिसकर्मियों को संबोधित किया। उन्होंने अपराधियों की उभरती कार्यप्रणाली (Modus Operandi) पर विस्तृत प्रकाश डाला और बताया कि किस तरह साइबर अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए डार्क वेब, प्रॉक्सी सर्वर, वीपीएन (VPN) और फर्जी दस्तावेजों पर आधारित सिम कार्ड का उपयोग करते हैं।

“साइबर अपराधों के मामलों में भौतिक साक्ष्यों के बजाय डिजिटल साक्ष्य ही निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यदि घटना के तुरंत बाद डिजिटल साक्ष्यों का सही वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण और संकलन नहीं किया जाए, तो अपराधी को कानून के शिकंजे में कसना कठिन हो जाता है।” — डॉ. रक्षित टंडन, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ

प्रशिक्षण सत्र के दौरान विवेचकों को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को अदालत में भारतीय साक्ष्य अधिनियम (अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023) के तहत कानूनी रूप से मान्य और अभेद्य बनाने की प्रक्रियाओं की गहन जानकारी दी गई।

क्रिप्टोकरेंसी, ब्लॉकचेन, CDR और IPDR जांच पर विशेष ध्यान

साइबर अपराधी अब पारंपरिक बैंक खातों के बजाय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले डिजिटल नेटवर्क और आभासी संपत्तियों का सहारा ले रहे हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए कार्यशाला में निम्नलिखित जटिल विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया:

1. क्रिप्टोकरेंसी एवं ब्लॉकचेन फॉरेंसिक

बिटकॉइन, एथेरियम और यूएसडीटी (USDT) जैसी क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग करके की जाने वाली ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। पुलिसकर्मियों को सिखाया गया कि ब्लॉकचेन लेजर का विश्लेषण किस प्रकार किया जाता है, क्रिप्टो वॉलेट एड्रेस को कैसे ट्रैक किया जाता है और अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो एक्सचेंजों से समन्वय स्थापित करके संपत्तियों को कैसे फ्रीज कराया जाता है।

2. CDR (Call Detail Record) विश्लेषण

कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच किसी भी आपराधिक नेटवर्क को क्रैक करने का प्राथमिक आधार होती है। प्रशिक्षण में सेल टावर लोकेशन, टावर डंप एनालिसिस, कॉमन नंबर सर्च और अपराधियों की बार-बार बदलती लोकेशन को मैप करने के उन्नत सॉफ्टवेयर टूल्स के प्रयोग की प्रक्रिया समझाई गई।

3. IPDR (Internet Protocol Detail Record) की वैज्ञानिक पड़ताल

आजकल अधिकांश साइबर अपराध व्हाट्सएप कॉल, टेलीग्राम, सिग्नल अथवा अन्य वीओआईपी (VoIP) माध्यमों से किए जा रहे हैं। IPDR जांच के माध्यम से पुलिस यह पता लगा सकती है कि किसी विशिष्ट समय पर किस आईपी एड्रेस से किस सर्वर को डेटा भेजा गया था। पुलिसकर्मियों को IPDR डेटा के विश्लेषण और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) से सटीक जानकारी प्राप्त करने के तरीकों पर प्रशिक्षित किया गया।

त्वरित शिकायत निस्तारण और पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण

प्रशिक्षण का एक मुख्य स्तंभ केवल अपराधियों को पकड़ना ही नहीं, बल्कि पीड़ितों को त्वरित राहत पहुंचाना भी रहा। वित्तीय साइबर अपराधों के मामलों में 'गोल्डन अवर' (प्राथमिक कुछ घंटे) अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि पीड़ित समय रहते 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर या पुलिस को सूचना दे दे, तो ठगी की गई राशि को अपराधियों के खातों में पहुंचने से पहले फ्रीज किया जा सकता है।

कार्यशाला में बल दिया गया कि थानों की साइबर हेल्पडेस्क पर आने वाली शिकायतों का बिना किसी विलंब के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए। इसके साथ ही, समाज के संवेदनशील वर्गों, विशेषकर महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। जिस प्रकार समाज में महिलाओं को अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है, उसी प्रकार डिजिटल स्पेस में भी महिलाओं को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस बल को साइबर स्टॉकिंग, बुलिंग और मॉर्फिंग जैसे अपराधों पर तत्काल संज्ञान लेने का प्रशिक्षण दिया गया।

बदलते अपराध और प्रशासनिक प्राथमिकताओं का समावेश

साइबर अपराध का दायरा केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, यह एक वैश्विक और अंतर-राज्यीय चुनौती बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल, जैसे कि हाल ही में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक हलचलों से उत्पन्न आर्थिक परिस्थितियों के बीच साइबर ठग अक्सर निवेश के नाम पर फर्जी शेयर बाजार ऐप और क्रिप्टो पोंजी स्कीमों के जरिए लोगों को निशाना बनाते हैं।

उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक संरचना में भी साइबर सुरक्षा एक प्रमुख एजेंडा बनकर उभरा है। प्रदेश में बेहतर कानून-व्यवस्था और आधुनिक पुलिसिंग की दिशा में उठ रहे कदमों के बीच योगी सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं में पुलिस बल का आधुनिकीकरण सबसे ऊपर है। शासन स्तर पर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रदेश का प्रत्येक जिला साइबर अपराधों से निपटने में आत्मनिर्भर बन सके।

इसके अतिरिक्त, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाया जा रहा है। हाल ही में प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 की विकास नीतियों में भी डिजिटल अर्थव्यवस्था और साइबर सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया है। ऐसे में गौतमबुद्धनगर पुलिस की यह पहल राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के पूर्णतः अनुकूल है।

निष्कर्ष: स्मार्ट और भावी पुलिसिंग की नई मिसाल

गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा आयोजित यह क्षमता संवर्धन कार्यशाला इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि पुलिस बल न केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई कर रहा है, बल्कि भावी चुनौतियों के प्रति पूर्व-सक्रिय (Proactive) दृष्टिकोण भी अपना रहा है।

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह का यह प्रयास साइबर अपराधमुक्त गौतमबुद्धनगर की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। पुलिसकर्मियों की तकनीकी दक्षता में वृद्धि से न केवल साइबर विवेचना की गुणवत्ता और गति में सुधार आएगा, बल्कि आम नागरिकों का पुलिस प्रणाली और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर विश्वास भी और अधिक मजबूत होगा। कमिश्नरेट ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी इस प्रकार के उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे ताकि पुलिस बल सदैव साइबर अपराधियों से दो कदम आगे रहे।

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