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Sunday, 15 Feb 2026

राहुल गांधी ने उठाई चिंता: अमेरिकी व्यापार समझौते से भारतीय किसानों पर पड़ेगा असर?

राहुल गांधी

मोदी-ट्रंप डील पर कांग्रेस नेता ने जताई आशंका, कहा- किसानों के हितों की अनदेखी हो रही है

नई दिल्ली, 15 फरवरी 2026 | कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हो रही व्यापार वार्ता में भारतीय किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर कहा कि यह व्यापार समझौता देश के किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए घातक साबित हो सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि किसी भी व्यापार समझौते से पहले किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

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राहुल गांधी की मुख्य चिंताएं

किसानों पर संभावित प्रभाव

राहुल गांधी ने अपने बयान में निम्नलिखित मुद्दों को उठाया:

प्रमुख आशंकाएं:

  1. सस्ते आयात का खतरा: अमेरिकी कृषि उत्पादों के सस्ते आयात से भारतीय किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव
  2. स्थानीय बाजार पर दबाव: घरेलू कृषि बाजार में अमेरिकी उत्पादों की बाढ़ से भारतीय किसानों को नुकसान
  3. टैरिफ में कमी: कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी से देसी किसानों की प्रतिस्पर्धा क्षमता घटेगी
  4. MSP प्रणाली पर खतरा: न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था कमजोर हो सकती है
  5. छोटे किसानों का संकट: विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे

वर्तमान स्थिति

मोदी-ट्रंप वार्ता का संदर्भ

पहलूविवरण
वार्ता का चरणउच्च स्तरीय बातचीत जारी
मुख्य क्षेत्रकृषि, रक्षा, प्रौद्योगिकी, व्यापार
टैरिफ मुद्देपारस्परिक शुल्क में कमी
समयसीमा2026 के मध्य तक समझौता संभावित
विवादित क्षेत्रडेयरी, फल, अनाज आयात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए लंबे समय से वार्ता चल रही है। दोनों देश पारस्परिक टैरिफ कम करने और व्यापार को आसान बनाने पर सहमत होने की कोशिश कर रहे हैं।

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कृषि क्षेत्र पर प्रस्तावित डील का प्रभाव

संभावित नकारात्मक प्रभाव

भारतीय कृषि पर खतरे:

उत्पादवर्तमान टैरिफप्रस्तावित टैरिफकिसानों पर प्रभाव
दालें30-40%10-15%घरेलू उत्पादन में कमी
फल35-50%15-20%बागवानी किसान प्रभावित
मेवे40-60%20-30%काजू, बादाम किसान
डेयरी60%+30-40%दुग्ध उत्पादक संकट में
अनाज20-30%5-10%गेहूं, मक्का किसान

किसान संगठनों की प्रतिक्रिया

विभिन्न किसान संगठनों ने भी राहुल गांधी की चिंताओं का समर्थन करते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।

संयुक्त किसान मोर्चा का बयान: “अगर व्यापार समझौते में कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम किया जाता है, तो यह 2020-21 के कृषि कानूनों से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है।”

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सरकार का पक्ष

वाणिज्य मंत्रालय की सफाई

वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों ने कहा है कि सरकार किसी भी व्यापार समझौते में भारतीय किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

सरकार के तर्क:

  1. संतुलित दृष्टिकोण: व्यापार समझौता सभी हितधारकों को ध्यान में रखकर किया जाएगा
  2. सुरक्षा उपाय: संवेदनशील कृषि उत्पादों के लिए विशेष सुरक्षा प्रावधान
  3. निर्यात के अवसर: भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात में भी वृद्धि होगी
  4. प्रतिस्पर्धा क्षमता: घरेलू किसानों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने के लिए योजनाएं
  5. परामर्श प्रक्रिया: किसान संगठनों से परामर्श जारी है

विपक्ष की आलोचना

कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार बड़े कॉर्पोरेट हितों को ध्यान में रखकर व्यापार समझौता कर रही है, जबकि किसानों के हितों की अनदेखी हो रही है।

राहुल गांधी का ट्वीट: “मोदी सरकार फिर से किसानों के साथ विश्वासघात की तैयारी कर रही है। पहले तीन कृषि कानून, अब अमेरिकी व्यापार समझौता। किसान हमेशा सबसे पीछे क्यों?”

अन्य विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया

दलनेताप्रतिक्रिया
TMCममता बनर्जीकिसानों के साथ खड़े हैं
AAPअरविंद केजरीवालव्यापार डील की समीक्षा जरूरी
DMKएम के स्टालिनतमिलनाडु किसान प्रभावित होंगे
SPअखिलेश यादवUP के किसानों को खतरा
RJDतेजस्वी यादवबिहार के किसान चिंतित

ट्रंप प्रशासन का रुख

अमेरिकी हित

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत भारतीय बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों की पहुंच बढ़ाना चाहते हैं।

अमेरिकी मांगें:

  1. डेयरी उत्पाद: भारतीय बाजार में अमेरिकी दूध और पनीर की पहुंच
  2. फल और मेवे: कैलिफोर्निया के बादाम, सेब का आयात बढ़ाना
  3. पोल्ट्री: मुर्गी पालन उत्पादों पर प्रतिबंध हटाना
  4. अनाज: गेहूं और मक्का के आयात में सुगमता
  5. टैरिफ कमी: सभी कृषि उत्पादों पर भारी शुल्क कटौती

आर्थिक विशेषज्ञों की राय

विभाजित मत

अर्थशास्त्रियों में इस मुद्दे पर मतभेद है:

समर्थन में:

  • व्यापार से दोनों देशों को फायदा
  • उपभोक्ताओं को सस्ते उत्पाद मिलेंगे
  • भारतीय निर्यात भी बढ़ेगा
  • आर्थिक विकास में सहायक

विरोध में:

  • छोटे किसानों पर भारी नुकसान
  • कृषि आत्मनिर्भरता खतरे में
  • अमेरिकी सब्सिडी से अनुचित प्रतिस्पर्धा
  • रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव

पिछली गलतियों से सबक

WTO और अन्य समझौतों का अनुभव

भारत को विश्व व्यापार संगठन (WTO) और अन्य द्विपक्षीय समझौतों में कृषि क्षेत्र में कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।

सबक:

  1. सावधानी जरूरी: जल्दबाजी में समझौता नुकसानदेह
  2. संवेदनशील क्षेत्र: कुछ उत्पादों को विशेष सुरक्षा चाहिए
  3. किसान परामर्श: हितधारकों से बातचीत अनिवार्य
  4. सुरक्षा खंड: आपातकालीन टैरिफ बढ़ाने का प्रावधान
  5. चरणबद्ध कार्यान्वयन: धीरे-धीरे बदलाव बेहतर

किसानों की मांगें

प्रमुख सुझाव

किसान संगठनों ने सरकार से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

किसान यूनियनों की 5 मांगें:

  1. पूर्ण पारदर्शिता: व्यापार वार्ता को सार्वजनिक करें
  2. किसान प्रतिनिधि: वार्ता में किसान संगठनों को शामिल करें
  3. संसदीय अनुमोदन: समझौते को संसद की मंजूरी लें
  4. सुरक्षा खंड: घरेलू किसानों के लिए सुरक्षा कवच
  5. MSP गारंटी: न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली को कानूनी दर्जा

राजनीतिक विश्लेषण

2026 चुनावों से पहले मुद्दा

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

राजनीतिक आयाम:

  • विपक्ष की रणनीति: किसान मुद्दे पर सरकार को घेरना
  • सत्ता पक्ष का बचाव: विकास और व्यापार का तर्क
  • ग्रामीण वोट बैंक: किसान वोटों की अहमियत
  • 2024 की याद: किसान आंदोलन का असर अभी भी
  • क्षेत्रीय दल: पंजाब, हरियाणा, UP में मुद्दा संवेदनशील

आगे का रास्ता

संतुलित दृष्टिकोण की जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को व्यापार और किसान हितों के बीच संतुलन बनाना होगा।

सुझाव:

  1. चरणबद्ध उदारीकरण: धीरे-धीरे टैरिफ कम करें
  2. सब्सिडी सुधार: भारतीय किसानों को प्रतिस्पर्धी बनाएं
  3. मूल्य वर्धन: प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा
  4. निर्यात संवर्धन: भारतीय उत्पादों का निर्यात बढ़ाएं
  5. सामाजिक सुरक्षा: प्रभावित किसानों के लिए सहायता

वैश्विक संदर्भ

अन्य देशों का अनुभव

कई विकासशील देशों ने विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों में कृषि क्षेत्र में नुकसान उठाया है।

उदाहरण:

  • मेक्सिको-अमेरिका: NAFTA से मेक्सिकी मक्का किसान प्रभावित
  • केन्या-EU: यूरोपीय डेयरी से अफ्रीकी किसान संकट में
  • थाईलैंड: चावल निर्यातकों को कुछ लाभ लेकिन छोटे किसान पीछे

निष्कर्ष

राहुल गांधी द्वारा उठाई गई चिंताएं भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। जबकि व्यापार समझौते आर्थिक विकास के लिए जरूरी हैं, किसानों के हितों की रक्षा भी उतनी ही अहम है।

सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि मोदी-ट्रंप व्यापार डील में भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता न हो। पूर्ण पारदर्शिता, हितधारकों से परामर्श, और संसदीय निगरानी इस प्रक्रिया के अनिवार्य अंग होने चाहिए।

आने वाले समय में यह देखना होगा कि सरकार विपक्ष और किसान संगठनों की चिंताओं का कैसे जवाब देती है और व्यापार समझौते में किसानों के हितों की रक्षा के लिए क्या प्रावधान करती है।


देशकीपत्रिका ब्यूरो | यह मुद्दा भारतीय कृषि और राजनीति दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। हम इस मामले पर नजर रखेंगे और आपको नवीनतम जानकारी देते रहेंगे।