नीतीश कुमार के बाद बिहार: क्या 90 के दशक की जाति-हिंदुत्व राजनीति फिर लौटेगी?
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के बाद के दौर को लेकर बड़ी बहस शुरू हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश के जाने के बाद राज्य में 1990 के दशक जैसी जाति और हिंदुत्व की राजनीति फिर हावी हो सकती है। एक तरफ तेजस्वी यादव का अगड़ा-पिछड़ा समीकरण है, दूसरी तरफ भाजपा का हिंदुत्व एजेंडा। नीतीश ने दो दशकों तक इन दोनों धाराओं के बीच संतुलन बनाए रखा, लेकिन उनके बाद यह संतुलन टूट सकता है। 40 लोकसभा सीटों वाले बिहार का यह राजनीतिक बदलाव 2029 के राष्ट्रीय चुनावों पर भी गहरा असर डालेगा।
शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026
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