आस्था और शक्ति का उत्सव
नोएडा, 2 अक्टूबर 2025। विजयदशमी के पावन अवसर पर नोएडा के सेक्टर 62 में सम्राट पृथ्वीराज चौहान भवन में राजपूत संगठन ने भव्य शस्त्र पूजन समारोह आयोजित किया। वीर कुंवर सिंह शोध संस्थान के बैनर तले हुए इस आयोजन में सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। यह समारोह बुराई पर अच्छाई की विजय और सनातन धर्म की रक्षा के प्रति क्षत्रिय समुदाय की प्रतिबद्धता का प्रतीक बना। सीएम योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने वाली ऐसी पहलें नया भारत गढ़ रही हैं।
शस्त्र पूजन में गणमान्य लोगों की उपस्थिति
इस समारोह में प्रेम सिंह (अध्यक्ष), राकेश सिंह चौहान (कोषाध्यक्ष), एम.पी. सिंह (महासचिव), मान सिंह चौहान (संरक्षक), पंकज सिंह (नोएडा विधायक), मनोज चौहान (प्रदेश सचिव, सपा), पूर्व मंत्री मदन चौहान, और अखण्ड राजपुताना सेवा संघ दिल्ली के अध्यक्ष के.पी. सिंह सहित कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। अन्य उपस्थित लोगों में रमेश सिंह (उपाध्यक्ष), राघवेंद्र सिंह (उपाध्यक्ष), आर.एन. सिंह (महामंत्री), के.बी. सिंह (कोषाध्यक्ष), और नागेंद्र प्रताप सिंह (सचिव) ने अपनी उपस्थिति से समारोह को गरिमा प्रदान की।


शस्त्र पूजन की ऐतिहासिक परंपरा
शस्त्र पूजन की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जो क्षत्रिय समुदाय के शक्ति, साहस और आत्मरक्षा के प्रति समर्पण को दर्शाती है। विजयदशमी, जो मां दुर्गा के महिषासुर वध और श्रीराम की रावण पर विजय का प्रतीक है, इस दिन शस्त्रों की पूजा विशेष महत्व रखती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां दुर्गा के शस्त्रों की पूजा देवताओं ने की थी, और श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई से पहले शस्त्र पूजन किया था। इस समारोह में हथियारों की साफ-सफाई, तिलक और पूजा के साथ सत्य और धर्म की रक्षा का संकल्प लिया गया।
सनातन धर्म की रक्षा का संदेश
शस्त्र पूजन न केवल क्षत्रिय राजघरानों, बल्कि आम जनमानस और भारतीय सेना द्वारा भी निभाई जाने वाली परंपरा है। यह सनातन धर्म की रक्षा और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। समारोह में उपस्थित नेताओं ने क्षत्रिय समुदाय से इस परंपरा को जीवित रखने की अपील की। प्रेम सिंह ने कहा, “शस्त्र पूजन हमारी शक्ति और सनातन धर्म के प्रति निष्ठा का प्रतीक है।” यह आयोजन नोएडा में सांस्कृतिक जागरूकता और एकता का संदेश दे गया।
आधुनिक भारत में परंपरा की प्रासंगिकता
विजयदशमी का यह समारोह आधुनिक भारत में सांस्कृतिक गौरव और आत्मरक्षा की भावना को मजबूत करता है। राजपूत संगठन ने न केवल परंपरा को जीवित रखा, बल्कि युवाओं को सनातन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास भी किया। भारतीय सेना द्वारा भी शस्त्र पूजन की परंपरा को अपनाया जाना इसकी राष्ट्रीय प्रासंगिकता को दर्शाता है। यह आयोजन हमें सिखाता है कि सादगी, संयम और साहस के साथ हम बुराई पर विजय पा सकते हैं, जैसा कि गांधीजी और श्रीराम ने दिखाया।
