नोएडा (जेवर), 31 अक्टूबर 2025। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) ने संचालन की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। शुक्रवार को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की कैलिब्रेशन फ्लाइट ने एयरपोर्ट पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की। यह परीक्षण उड़ान नए एयरपोर्ट के लिए अनिवार्य है, जो इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS), रडार और एयर नेविगेशन उपकरणों की अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप क्षमता की जांच करती है। कैलिब्रेशन सफल होने से एयरपोर्ट को ऑपरेशनल क्लियरेंस की राह आसान हो गई है।
कैलिब्रेशन फ्लाइट क्या है?
यह विशेष परीक्षण उड़ान एयरपोर्ट के नेविगेशन और कम्युनिकेशन सिस्टम की सटीकता सुनिश्चित करती है। किसी भी नए हवाई अड्डे के संचालन से पहले यह अनिवार्य कदम है, जो विमानन सुरक्षा की गारंटी देता है।
परीक्षण प्रक्रिया: हाई-टेक जांच
- विमान और टीम: AAI का सुसज्जित कैलिब्रेशन विमान अलग-अलग ऊंचाई और कोणों पर उड़ान भरता है।
- सिग्नल जांच: ग्राउंड सिस्टम से सिग्नल की ताकत, स्थिरता और सटीकता मापी जाती है।
- विशेषज्ञ दल: फ्लाइट इंस्पेक्टर, टेक्निकल इंजीनियर और एटीसी विशेषज्ञ शामिल।
- डेटा एनालिसिस: उड़ान डेटा का विश्लेषण कर किसी भी विचलन को तुरंत सुधार।
सुरक्षा और विश्वसनीयता की मजबूती
कैलिब्रेशन पूरा होने से जेवर एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय विमानन मानकों के और करीब पहुंच गया। इससे DGCA से ऑपरेशनल क्लियरेंस की प्रक्रिया तेज होगी। एयरपोर्ट उत्तर भारत का प्रमुख हब बनेगा, जो दिल्ली-एनसीआर, आगरा, मथुरा, मेरठ को जोड़ेगा।
अगला कदम: कमर्शियल ऑपरेशंस
कैलिब्रेशन सफलता के बाद रनवे, टर्मिनल और ग्राउंड हैंडलिंग की अंतिम जांच होगी। एयरपोर्ट 2025 के अंत तक चालू होने की उम्मीद है। क्या जेवर दिल्ली एयरपोर्ट को टक्कर देगा? कमेंट में बताएं l
