लखनऊ की एक तस्वीर पिछले कई सालों से विवाद का केंद्र रही है — शुक्रवार की दोपहर, सड़कें बंद, ट्रैफिक रुका हुआ, और खुले आसमान के नीचे नमाज। अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस तस्वीर को बदलने का ऐलान कर दिया है।
“सड़क पर नमाज नहीं होगी” — यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि एक सीधा निर्देश है जो CM योगी ने प्रशासनिक अधिकारियों को दिया है। उनका कहना है कि सार्वजनिक सड़कों और रास्तों पर किसी भी धर्म की प्रार्थना या धार्मिक गतिविधि से आम जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
क्यों उठाया यह कदम?
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UP में पिछले कुछ वर्षों में सड़क पर नमाज को लेकर कई बार विवाद हो चुके हैं। कई जगहों पर शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान सड़कें जाम हो जाती थीं, जिससे आम लोगों को खासी दिक्कत होती थी। Ambulance रुकने की शिकायतें भी सामने आई थीं।
योगी सरकार का तर्क साफ है — “सार्वजनिक जगह किसी एक समुदाय की नहीं है।” प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि जहाँ भी ऐसी गतिविधियाँ हो रही हों, वहाँ लोगों को मस्जिद या अन्य निर्धारित स्थानों पर जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
पहले भी हो चुका है यह विवाद
यह पहली बार नहीं है जब यह मुद्दा उठा हो। 2018 में गुरुग्राम में सड़क पर नमाज के खिलाफ हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए थे। उसके बाद हरियाणा सरकार ने भी इस पर कड़ा रुख अपनाया था।
UP में खुद योगी सरकार के पहले कार्यकाल में भी इस तरह के निर्देश दिए गए थे। लेकिन इस बार के ऐलान को ज्यादा सख्त और औपचारिक बताया जा रहा है।
एक वरिष्ठ IPS अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा — “अब यह सिर्फ advisory नहीं है। जिलाधिकारियों और SSP को directly जवाबदेह बनाया जाएगा।”
विपक्ष का रुख — हमला शुरू
जैसी उम्मीद थी, विपक्ष तुरंत मैदान में आ गया।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता ने कहा — “यह सरकार चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की राजनीति खेल रही है। संविधान हर नागरिक को धर्म पालन का अधिकार देता है।”
कांग्रेस ने भी इसे “बहुसंख्यकवादी एजेंडा” करार दिया। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह सरकार मुसलमानों को निशाना बना रही है और यह संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
दूसरी तरफ, BJP और हिंदूवादी संगठनों ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया। VHP के एक नेता ने कहा — “जब मंदिरों में घंटियाँ बजाने पर रोक नहीं है, तो नमाज के लिए सड़क जाम करना भी उचित नहीं।”
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कानूनी पहलू — क्या यह संभव है?
संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत हर नागरिक को धर्म पालन का अधिकार है। लेकिन यह अधिकार “public order, morality and health” के अधीन है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क पर किसी भी धार्मिक गतिविधि — चाहे जुलूस हो, भजन हो या नमाज — को नियंत्रित करने का अधिकार राज्य सरकार को है, अगर उससे यातायात बाधित होता हो।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक वकील ने बताया — “यह ban नहीं है धर्म पर। यह traffic management का मामला है। सरकार का यह कदम कोर्ट में टिक सकता है, बशर्ते इसे किसी एक समुदाय के खिलाफ साबित न किया जाए।”
ज़मीन पर हकीकत क्या है?
लखनऊ, कानपुर, मेरठ, आगरा — इन शहरों में जहाँ मुस्लिम आबादी घनी है, वहाँ के स्थानीय लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया है।
कानपुर के एक मुस्लिम दुकानदार ने कहा — “हम खुद नहीं चाहते कि सड़क बंद हो। मस्जिद में जगह नहीं होती तो मजबूरी में बाहर आना पड़ता है। सरकार मस्जिदों को expand करने में मदद करे।”
यह बात important है। कई धार्मिक विद्वानों ने भी माना है कि जहाँ मस्जिद में जगह हो, वहाँ सड़क पर नमाज पढ़ना उचित नहीं।
आगे क्या होगा?
योगी सरकार अगले कुछ हफ्तों में एक formal circular जारी कर सकती है। सभी जिलों के DM को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके क्षेत्र में सड़कें धार्मिक गतिविधियों से बाधित न हों।
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यह आदेश सिर्फ नमाज तक सीमित नहीं रहेगा — कावड़ यात्रा, गणेश विसर्जन, और अन्य धार्मिक जुलूसों पर भी नजर रखी जाएगी, ऐसा प्रशासनिक सूत्रों का कहना है। हालाँकि, विपक्ष को यकीन नहीं।
UP 2027 विधानसभा चुनाव की तरफ बढ़ रहा है। और इस तरह के मुद्दे — जो धर्म, कानून और राजनीति तीनों को एक साथ छूते हैं — आने वाले महीनों में और गर्म होंगे।
