लखनऊ की सड़कों पर सुबह आठ बजे का नजारा किसी से छुपा नहीं है। घंटों का जाम, धुएं से भरी हवा, और ऑफिस पहुंचते-पहुंचते थका हुआ इंसान। अब शायद इस तस्वीर में कुछ बदलाव आने वाला है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के प्रमुख शहरों — नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ — में बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक की समस्या से निपटने के लिए एक अहम advisory जारी की है। इसमें Work from Home (WFH) और ‘No Vehicle Day’ जैसे उपायों को अपनाने पर जोर दिया गया है।
सरकारी दफ्तरों में WFH? यह सच है
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योगी सरकार की इस advisory में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के कार्यालयों को सुझाव दिया गया है कि जहां भी संभव हो, कर्मचारियों को घर से काम करने का विकल्प दिया जाए। खासतौर पर उन दिनों जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI खतरनाक स्तर पर पहुंच जाए।
यह advisory विशेष रूप से NCR से सटे नोएडा और गाजियाबाद के लिए ज़्यादा प्रासंगिक है, जहां सर्दियों में प्रदूषण की स्थिति अक्सर दिल्ली जितनी ही भयावह हो जाती है। पिछले कुछ सालों में इन शहरों में AQI 400 के पार जाना आम बात हो चुकी है।
‘No Vehicle Day’ — हफ्ते में एक दिन गाड़ी बंद
Advisory में एक और प्रस्ताव है — ‘No Vehicle Day’। यानी हफ्ते में कम से कम एक दिन सरकारी कर्मचारी अपने निजी वाहन न लाएं। इसके बजाय सरकारी परिवहन, कारपूलिंग या सार्वजनिक बस सेवाओं का उपयोग करें।
लखनऊ में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “अभी यह advisory है, अनिवार्य आदेश नहीं। लेकिन ऊपर से संकेत साफ हैं कि इसे गंभीरता से लिया जाए।”
यह सोचना जरूरी है कि UP जैसे राज्य में, जहां सरकारी तंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं और लाखों कर्मचारी रोज दफ्तर आते हैं — वहां इस तरह का कदम कितना बड़ा बदलाव ला सकता है।
प्रदूषण की मार और सरकार की मजबूरी
दरअसल, यह advisory अचानक नहीं आई। National Green Tribunal (NGT) और Supreme Court दोनों ने बार-बार UP सरकार को प्रदूषण नियंत्रण को लेकर कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। GRAP यानी Graded Response Action Plan के तहत भी कई restrictions पहले से लागू हैं।
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इसके अलावा, Lucknow और Noida जैसे शहरों में रियल एस्टेट और IT सेक्टर की growth के चलते आबादी और गाड़ियों की संख्या दोनों तेजी से बढ़ी है। सड़कें उतनी ही हैं, भार कई गुना बढ़ गया है।
IT कंपनियों और private sector की क्या भूमिका?
नोएडा और गाजियाबाद में सैकड़ों IT कंपनियां और BPO हैं। COVID के बाद इनमें से कई ने hybrid work model अपना लिया था, लेकिन धीरे-धीरे फिर full office attendance की ओर लौट रही हैं।
अब सरकार की advisory के बाद ये कंपनियां एक बार फिर WFH policy पर विचार कर सकती हैं — या कम से कम pollution के peak दिनों में employees को घर से काम करने की छूट दे सकती हैं।
हालांकि, एक Noida-based IT professional सोनाली वर्मा का कहना है, “सरकार कह तो देती है, लेकिन हमारे manager approval देंगे या नहीं — यह असली सवाल है। काम तो हो सकता है घर से, बस culture बदलनी होगी।”
सिर्फ advisory काफी है?
यह सवाल जायज है। Advisory और आदेश में फर्क होता है। दिल्ली में Odd-Even जैसे बड़े प्रयोग हुए, जिनके mixed results रहे। UP में इस advisory का असर तब दिखेगा जब इसे ठीक से implement किया जाए और monitoring हो।
लखनऊ, नोएडा और गाजियाबाद — तीनों शहरों के नगर निगमों और जिला प्रशासन को इस advisory को जमीन पर उतारना होगा। तभी यह सिर्फ कागज पर लिखे शब्द नहीं रहेंगे।
फिलहाल, शहर के लाखों दफ्तरजाने वाले लोग इस खबर को उम्मीद की नजर से देख रहे हैं — शायद कल की सुबह थोड़ी अलग हो।
