गुवाहाटी की उस सुबह राजभवन के बाहर जब मीडिया की भीड़ जमा हुई, तो किसी ने सोचा नहीं था कि अगले कुछ घंटों में असम की राजनीति एक नया मोड़ लेने वाली है। हिमंत बिस्वा सरमा — वही नाम जो पिछले कई सालों से पूर्वोत्तर की राजनीति का पर्याय बन गया है — ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
इस्तीफा हुआ। राज्यपाल को सौंपा गया। और अब नजरें टिकी हैं 11 मई के बाद होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर।
क्यों हुआ अचानक इस्तीफा?
राजनीति में कुछ भी अचानक नहीं होता। सरमा का यह कदम BJP की उस परंपरा का हिस्सा है जिसमें नई सरकार गठन से पहले पुरानी सरकार औपचारिक रूप से इस्तीफा देती है। असम विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद BJP और उसके सहयोगी दलों ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जिसके चलते यह प्रक्रिया शुरू हुई।
सरमा ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा — “असम की जनता ने जो विश्वास दिखाया है, उसे हम हर कीमत पर कायम रखेंगे। यह इस्तीफा एक अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत की तैयारी है।”
सीधी बात। कोई लंबा भाषण नहीं।
BJP की रणनीति और गठबंधन का गणित
असम में BJP अकेले नहीं चली। AGP (Asom Gana Parishad) और UPPL जैसे सहयोगी दलों के साथ मिलकर बनाए गए इस गठबंधन ने जो नतीजे दिए, वो पार्टी के लिए राहत की बात थी। लेकिन गठबंधन में सत्ता-साझेदारी का फॉर्मूला तय करना — यही असली चुनौती है।
सूत्रों के मुताबिक, 11 मई के बाद होने वाले शपथ ग्रहण में मंत्रिमंडल का स्वरूप काफी बदला हुआ नजर आ सकता है। नए चेहरों को मौका मिल सकता है, और कुछ पुराने मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है।
दिल्ली से भी signals आ रहे हैं। BJP हाईकमान इस बात पर नजर रखे हुए है कि पूर्वोत्तर में पार्टी की जड़ें और मजबूत हों।
सरमा का सफर — एक नेता जो कभी Congress में था
हिमंत बिस्वा सरमा की कहानी खुद में दिलचस्प है। एक वक्त था जब वो Congress के सबसे भरोसेमंद चेहरों में से एक थे। तरुण गोगोई सरकार में मंत्री थे। फिर 2015 में उन्होंने BJP का दामन थामा — और देखते ही देखते पूर्वोत्तर में BJP का सबसे बड़ा चेहरा बन गए।
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2021 में जब पहली बार मुख्यमंत्री बने, तो कई लोगों ने कहा था कि यह प्रयोग देखना दिलचस्प होगा। और सरमा ने साबित किया कि वो सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं हैं।
उनके कार्यकाल में असम में कई बड़े फैसले हुए — चाहे वो flood management हो, बाल विवाह के खिलाफ अभियान हो, या फिर illegal immigration का मुद्दा। विवाद भी हुए। आलोचनाएं भी। लेकिन सरमा का कद बढ़ता रहा।
विपक्ष क्या कह रहा है?
Congress और AIUDF के नेताओं ने इस इस्तीफे को “रस्मी कार्रवाई” करार दिया। Congress के एक वरिष्ठ नेता ने कहा — “जनता ने गलती की है, और इसका खामियाजा आने वाले पांच सालों में भुगतना पड़ेगा। यह इस्तीफा कोई बड़ी बात नहीं — असली सवाल यह है कि नई सरकार महंगाई, बाढ़ और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर क्या करेगी?”
वाजिब सवाल है।
AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने भी कहा कि अल्पसंख्यकों के साथ जो व्यवहार हो रहा है, उस पर नई सरकार को जवाब देना होगा।
अब आगे क्या?
11 मई। यही तारीख है जिसका इंतजार है।
शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां शुरू हो गई हैं। गुवाहाटी में BJP दफ्तर से लेकर राजभवन तक — हर जगह हलचल है। यह भी चर्चा है कि केंद्रीय नेतृत्व से कोई बड़ा चेहरा इस समारोह में शामिल होगा।
सरमा दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे — इसकी संभावना सबसे ज्यादा है। लेकिन राजनीति में ‘तय’ कुछ नहीं होता — यह भी उतना ही सच है।
असम देख रहा है। पूर्वोत्तर देख रहा है। और दिल्ली भी।
