लखनऊ की गर्मी में एक सभा का माहौल अचानक गरमा गया जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माइक संभाला। शब्द थे तीखे, लहजा आत्मविश्वास से भरा — और message एकदम सीधा।
‘जिन्होंने सनातन को मिटाने का प्रयास किया, वो आज खुद मिट्टी में मिल चुके हैं।’
बस इतना काफी था। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सीएम योगी ने एक बार फिर साबित किया कि वो अपनी बात कहने में कोई लाग-लपेट नहीं रखते।
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योगी का यह बयान आया कहाँ से?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह बात एक धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान कही। मंच पर संत-महात्माओं की मौजूदगी थी, श्रद्धालुओं की भीड़ थी — और था वो खास माहौल जिसमें योगी अक्सर अपने सबसे मजबूत बयान देते हैं।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म हजारों साल पुराना है। इसे कई बार मिटाने की कोशिश हुई — आक्रांताओं ने भी, विदेशी शासकों ने भी, और कुछ हद तक आधुनिक राजनीति ने भी। लेकिन सनातन बचा रहा। बल्कि, और मजबूत होकर उभरा।
‘यह संस्कृति अजर-अमर है,’ योगी ने कहा। ‘इसे कोई खत्म नहीं कर सकता, क्योंकि यह किसी एक व्यक्ति या किसी एक किताब पर निर्भर नहीं है — यह जन-जन के जीवन में रची-बसी है।’
राजनीतिक संदेश भी था इसमें
योगी का यह बयान सिर्फ धार्मिक नहीं था — इसमें राजनीतिक धार भी साफ दिखी। जानकारों का मानना है कि यह बयान उन राजनीतिक दलों और नेताओं पर indirect निशाना था जो हिंदू धर्म और सनातन परंपराओं को लेकर विवादास्पद बयान दे चुके हैं।
पिछले कुछ सालों में ‘सनातन धर्म’ को लेकर देश में तीखी बहस छिड़ी है। DMK नेता उदयनिधि स्टालिन का वो बयान अभी लोगों के जेहन में ताजा है जिसमें उन्होंने सनातन की तुलना बीमारी से की थी। उस विवाद की आग अभी पूरी तरह ठंडी नहीं हुई।
योगी ने उस पूरे प्रकरण को बिना नाम लिए निशाने पर लिया।
गोरखपुर से अयोध्या तक — यही है योगी का core agenda
मुख्यमंत्री बनने के बाद से योगी आदित्यनाथ ने UP की पहचान को एक नई दिशा देने की कोशिश की है। राम मंदिर निर्माण हो, काशी विश्वनाथ धाम का जीर्णोद्धार हो, या मथुरा-वृंदावन का विकास — इन सब में एक सूत्र जुड़ा है: सनातन की पुनर्प्रतिष्ठा।
योगी खुद गोरखनाथ पीठ के महंत हैं। उनके लिए यह सिर्फ राजनीति नहीं, आस्था का मामला है। इसीलिए जब वो बोलते हैं तो उनकी बात में एक अलग conviction होती है — जो सुनने वाले को सीधे असर करती है।
कार्यक्रम में मौजूद एक श्रद्धालु ने कहा, ‘योगी जी जो कहते हैं, वो करते भी हैं। अयोध्या देख लो — पहले क्या था, आज क्या है।’
विपक्ष की चुप्पी या रणनीतिक मौन?
दिलचस्प बात यह रही कि इस बयान पर विपक्ष की तरफ से कोई तत्काल और तीखा जवाब नहीं आया। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस, दोनों ने फिलहाल चुप्पी साधे रखी।
शायद इसलिए कि सनातन के मुद्दे पर पलटवार करना विपक्ष के लिए भी politically tricky है। UP जैसे राज्य में जहाँ हिंदू मतदाता निर्णायक भूमिका में हों, वहाँ इस मुद्दे पर सीधी टक्कर लेना आसान नहीं।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि योगी का यह बयान 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा भी हो सकता है। Hindu consolidation की जो कोशिश BJP कर रही है, उसमें इस तरह के बयान बड़ी भूमिका निभाते हैं।
सनातन की राजनीति — नई नहीं, लेकिन अब ज्यादा मुखर
भारत में धर्म और राजनीति का रिश्ता कोई नया नहीं है। लेकिन पिछले एक दशक में यह रिश्ता और खुलकर सामने आया है। राम मंदिर का निर्माण, धारा 370 का हटना, UCC की चर्चा — ये सब उसी बड़े narrative का हिस्सा हैं जिसे BJP ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ कह रही है।
योगी इस narrative के सबसे aggressive और vocal चेहरे हैं।
उन्होंने कार्यक्रम में यह भी कहा कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ना जरूरी है। ‘जो अपनी संस्कृति भूल जाता है, वो अपना भविष्य भी खो देता है।’
मंच पर बैठे संतों ने सिर हिलाया। भीड़ ने जयकारे लगाए।
और योगी आदित्यनाथ मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गए — अगले कार्यक्रम की तरफ।
