गर्मी अभी पूरे शबाब पर है और उत्तर प्रदेश के लाखों घरों में पंखे बंद, AC बेकार — बिजली गुल। यही वो तस्वीर है जिसने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस हफ्ते पावर कॉरपोरेशन के अफसरों को सीधे तलब करने पर मजबूर किया।
लखनऊ में हुई विद्युत समीक्षा बैठक कोई routine meeting नहीं थी। यह एक साफ संकेत था — सरकार अब और ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
जब CM ने सीधे पूछा — ‘शिकायतें क्यों आ रही हैं?’
बैठक में योगी आदित्यनाथ ने Discom अधिकारियों से तीखे सवाल किए। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा, “जनता गर्मी में परेशान है और आप लोगों के पास जवाब नहीं है — यह स्वीकार्य नहीं।”
UP Power Corporation के आंकड़े खुद बता रहे थे कि ग्रामीण इलाकों में कई-कई घंटे की कटौती अभी भी जारी है। कुछ जिलों में तो 16 से 18 घंटे तक बिजली गायब रहने की शिकायतें आई हैं। शहरी क्षेत्रों में भी हालात कोई बहुत बेहतर नहीं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बिजली आपूर्ति UP के हर जिले में निर्धारित schedule के हिसाब से होनी चाहिए — चाहे शहर हो या गांव।
Discom की सफाई और जमीनी हकीकत
पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने बैठक में कई technical कारण गिनाए — ट्रांसफार्मर फेल होना, high demand, grid पर अतिरिक्त load। लेकिन असल सवाल यह है कि ये समस्याएं हर साल गर्मियों में क्यों आती हैं और हर साल बैठकें क्यों होती हैं?
लखनऊ के एक रहवासी ने बताया, “हर साल यही होता है। अफसर बुलाए जाते हैं, आश्वासन मिलता है, कुछ दिन ठीक रहता है, फिर वही हाल।” यह frustration सिर्फ एक शहर की नहीं, पूरे प्रदेश की है।
इस बार सरकार ने Discom को performance-based monitoring का निर्देश दिया है। यानी अब हर जिले की supply का data real-time track होगा और जहां लापरवाही मिलेगी, वहां के अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
फसल से लेकर factory तक — असर हर तरफ
बिजली संकट का दायरा सिर्फ घरेलू परेशानी तक नहीं है। UP के किसान जिन्हें Kharif की बुवाई के लिए सिंचाई की जरूरत है, वे बिजली कटौती से सबसे ज्यादा मार झेल रहे हैं। पंप नहीं चले तो खेत प्यासे रहे।
छोटे उद्यमी और Msme sector भी इस संकट की चपेट में हैं। Noida और Kanpur के industrial areas से आई रिपोर्ट बताती हैं कि irregular supply की वजह से production cost बढ़ रही है और कुछ units ने generator पर निर्भरता बढ़ा दी है।
योगी सरकार का यह पहला मौका नहीं
सच कहें तो बिजली को लेकर विद्युत समीक्षा बैठक यह पहली बार नहीं हो रही। योगी सरकार के कार्यकाल में ऐसी कई बैठकें हो चुकी हैं और हर बार सुधार के दावे भी किए गए। 2017 के बाद से UP में बिजली की स्थिति में कुछ सुधार जरूर आया है — खासकर शहरी इलाकों में। लेकिन ग्रामीण UP अभी भी उस मुकाम से कोसों दूर है जो सरकार ने वादा किया था।
प्रदेश सरकार का दावा है कि 24 घंटे बिजली देने का लक्ष्य है — लेकिन जमीन पर यह लक्ष्य अभी दूर की कौड़ी लगता है।
अब आगे क्या?
सरकार ने इस बार कुछ concrete steps की बात की है। नए ट्रांसफार्मर की तेज installation, feeder separation का काम तेज करना और complaint redressal को 24 घंटे के अंदर resolve करने का target — ये सब एजेंडे में हैं।
Power Corporation को यह भी कहा गया है कि जो अधिकारी अपने क्षेत्र में बार-बार शिकायतें आने पर भी सुधार नहीं कर पाते, उनके खिलाफ administrative action होगा।
गर्मी अभी दो-तीन महीने और रहेगी। असली परीक्षा अब है — क्या पावर कॉरपोरेशन इस बार सच में कुछ बदल पाएगा, या फिर अगले साल एक और बैठक होगी?
