मई की तपती दोपहर में जब थर्मामीटर 45 डिग्री छू रहा हो और ऊपर से अचानक काली आंधी आ जाए — तो किसान के चेहरे पर जो मायूसी आती है, वो शब्दों में बयान करना मुश्किल है। जौनपुर के डोभी क्षेत्र में यही हुआ। कुछ मिनटों की आंधी ने वो कर दिखाया जो महीनों की मेहनत को पलभर में मिट्टी में मिला देती है।
गर्मी, लू और तूफान — इस साल आम के बागों पर तिहरी मार पड़ी है।
डोभी में आंधी का तांडव, बागों में पसरा सन्नाटा
जौनपुर के डोभी इलाके में हाल ही में आई तेज आंधी और तूफान ने आम के बागों में भारी तबाही मचाई। पेड़ों पर लदे कच्चे फल जमीन पर बिखर गए। कुछ पेड़ों की टहनियां टूट गईं और जहां फलों का बोझ ज्यादा था, वहां पूरे पेड़ ही उखड़ गए। किसान सुबह उठे तो बाग का नजारा देखकर सन्न रह गए।
“सारी उम्मीद इन्हीं बागों पर टिकी थी,” — इलाके के एक बाग मालिक ने कहा। “न आंधी का पता, न कब बारिश आ जाए। कुछ समझ नहीं आता।”
यह सिर्फ डोभी की कहानी नहीं है। पूरे जौनपुर और आसपास के जिलों में आम किसान इस वक्त दोहरी मार झेल रहे हैं — एक तरफ रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, दूसरी तरफ बेमौसम आंधी-तूफान।
मई में आम की फसल सबसे नाजुक क्यों होती है
आम की फसल इस महीने अपनी सबसे कमजोर अवस्था में होती है। फल अभी छोटे हैं, डंठल पतले और कमजोर हैं, और पेड़ों पर फलों का भार भी ज्यादा है। ऐसे में हल्की-सी तेज हवा भी सैकड़ों फल गिरा सकती है।
आंधी के साथ अगर बारिश भी आ जाए, तो नुकसान दोगुना हो जाता है। गीली जमीन में पेड़ों की पकड़ कमजोर पड़ जाती है। टहनियां झटके से टूटती हैं। और आंधी के बाद जो नमी रहती है, उससे फफूंदी और कीड़े-मकोड़ों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है — जो बचे हुए फलों की quality भी बर्बाद कर देता है।
यानी तूफान गया तो भी नुकसान जारी रहता है।
गर्मी और लू का अलग ही कहर
आंधी से अलग, इस बार लू और तेज धूप ने भी फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। खेतों में लगी फसलें झुलस रही हैं। बागों में फल सूखने लगे हैं। किसान खेत में जाते हैं तो खुद भी बेहाल हो जाते हैं।
इंसान, जानवर और पेड़-पौधे — सब इस रिकॉर्ड गर्मी के शिकार हैं। लेकिन जो नुकसान किसान का हो रहा है, वो सबसे चुभने वाला है। क्योंकि उसकी पूरी साल की कमाई इन्हीं बागों से आती है।
जो किसान थोड़े सतर्क रहे — समय पर सिंचाई की, दवाइयां छिड़की — उनका नुकसान कुछ कम रहा। लेकिन जिनके पास संसाधन नहीं थे, उनके लिए यह मौसम बेहद कठिन साबित हो रहा है।
फलों का राजा, लेकिन इस बार मुश्किल में
आम सिर्फ एक फल नहीं है — यह उत्तर प्रदेश के हजारों किसानों की रोजी-रोटी है। और यही फल इस बार सबसे ज्यादा मुसीबत में है।
जो कच्चा आम किसी तरह बच जाता है, उसकी अपनी अलग खासियत है। गर्मियों में कच्चा आम यानी कैरी शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं। आम पन्ना लू से बचाता है, पाचन सुधारता है, शरीर में electrolyte balance बनाए रखता है। विटामिन C और antioxidants से भरपूर कच्चा आम immunity बढ़ाने में भी मदद करता है।
लेकिन जब तक यह फल बाजार तक पहुंचे, उससे पहले किसान का क्या होगा — यह सवाल इस वक्त सबसे जरूरी है।
जौनपुर के बागों में अभी भी कुछ फल बचे हैं। किसान कोशिश कर रहे हैं कि जो है, उसे बचा लें। लेकिन मौसम का कोई भरोसा नहीं। अगली आंधी कब आए, कोई नहीं जानता।
