बारिश की एक-एक बूंद जब मौत बनकर गिरे, तो आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं रहते — वो किसी के घर का चिराग बुझने की कहानी बन जाते हैं।
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी बारिश ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है। नदियां उफान पर हैं, घर धंस रहे हैं, और खेत जलमग्न हो चुके हैं। राज्य के कई जिलों में अति वर्षा से हुई जनहानि की खबरें लगातार आ रही हैं। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासन को 24 घंटे के भीतर मुआवजा वितरण सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
तबाही का मंजर — कहां-कहां हुई जनहानि
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प्रदेश के पूर्वांचल, बुंदेलखंड और तराई इलाकों में हालात सबसे बुरे हैं। बलिया, देवरिया, गोरखपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी और सिद्धार्थनगर समेत दर्जनों जिलों में भारी बारिश की वजह से मकान गिरने, बिजली गिरने और डूबने की घटनाएं सामने आई हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य में अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है। ज़्यादातर मौतें कच्चे मकान गिरने और नदी-नालों में बहने से हुई हैं। फसलें बर्बाद हो गई हैं और हजारों एकड़ जमीन पानी में डूबी है।
एक गांव के बुजुर्ग किसान की बात करें तो उन्होंने कहा — “चालीस साल में ऐसी बारिश नहीं देखी। रात को आवाज आई और पड़ोस का घर धंस गया।” यह सिर्फ एक गवाही नहीं, सैकड़ों परिवारों का दर्द है।
CM योगी का सख्त निर्देश — 24 घंटे की डेडलाइन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हाई-लेवल बैठक बुलाई। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और राहत-बचाव दलों को निर्देश दिया कि मृतकों के परिजनों को 24 घंटे के भीतर मुआवजा दिया जाए।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मकान गिरने से मृत्यु पर 4 लाख रुपये, पशुहानि, फसल नुकसान और घर क्षति पर अलग-अलग मुआवजे का प्रावधान है। योगी ने यह भी कहा कि किसी भी पीड़ित को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे — राहत टीमें खुद उनके दरवाजे तक जाएंगी।
CM ने अपने बयान में कहा — “आपदा में एक भी परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। प्रशासन जमीन पर उतरे और सुनिश्चित करे कि मदद समय पर पहुंचे।”
NDRF और SDRF की तैनाती, हेल्पलाइन भी शुरू
राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों में NDRF (National Disaster Response Force) और SDRF (State Disaster Response Force) की टीमें तैनात कर दी हैं। बाढ़ग्रस्त इलाकों में नाव से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
सरकार ने आपदा राहत हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। बिजली विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है क्योंकि कई जगहों पर ट्रांसफार्मर और पोल क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राहत सामग्री के वितरण के लिए camp लगाए जा रहे हैं, जहां खाना, दवाइयां और जरूरी सामान मिलेगा।
किसानों का दर्द — बारिश ने सपने डुबो दिए
खरीफ की फसल इस बार किसानों की उम्मीद थी। धान की रोपाई से लेकर दलहन तक — सब कुछ तैयार था। लेकिन अचानक आई इस बाढ़ ने महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
लखीमपुर के एक किसान रामप्रसाद ने बताया — “दस बीघे की फसल थी। अब सब पानी में है। कर्ज लेकर बोया था, अब क्या करूंगा?” ऐसे हजारों किसान हैं जिनके लिए यह मुआवजा जीवनरेखा से कम नहीं होगा।
राज्य सरकार ने कहा है कि Revenue Department फसल नुकसान का survey जल्द पूरा करेगा और गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा।
विपक्ष भी आया मैदान में
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि मुआवजा राशि बढ़ाई जाए और पारदर्शिता सुनिश्चित हो। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए कहा — “सिर्फ घोषणाएं नहीं, जमीन पर राहत पहुंचनी चाहिए।”
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सरकार का कहना है कि इस बार system पहले से ज्यादा transparent है और हर पेमेंट DBT (Direct Benefit Transfer) के ज़रिए सीधे खाते में जाएगी।
आसमान अभी भी बादलों से घिरा है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे भारी बारिश की चेतावनी दी है। राहत और बचाव का काम युद्धस्तर पर जारी है — और उन परिवारों की नज़रें हैं जो अपना सब कुछ खो चुके हैं, बस सरकारी मदद का इंतज़ार कर रहे हैं।
