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UGC ने जारी की देश की 32 फर्जी यूनिवर्सिटी की लिस्ट, एडमिशन से पहले चेक करें मान्यता

UGC ने देशभर की 32 फर्जी यूनिवर्सिटी की सूची जारी की है, इनमें सबसे ज्यादा दिल्ली में हैं। छात्रों को एडमिशन से पहले मान्यता जांचने की सलाह दी गई है।

देश की पत्रिका टीम
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केंद्रीय संपादकीय डेस्क • शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 | 05:11 AM

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UGC ने जारी की देश की 32 फर्जी यूनिवर्सिटी की लिस्ट, एडमिशन से पहले चेक करें मान्यता
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देशभर में संचालित हो रही 32 फर्जी यूनिवर्सिटी को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने छात्रों और अभिभावकों के लिए अहम चेतावनी जारी की है। शिक्षा मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया कि ये संस्थान यूजीसी अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त नहीं हैं, इसलिए इन्हें किसी भी प्रकार की डिग्री प्रदान करने का कानूनी अधिकार नहीं है.

शिक्षा मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने जानकारी दी कि फरवरी 2026 में जारी की गई सूची में ऐसे संस्थानों की पहचान की गई है। मंत्रालय ने छात्रों से अपील की है कि किसी भी विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से पहले उसकी मान्यता की जांच अवश्य करें, ताकि भविष्य में डिग्री से जुड़ी किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।

यूजीसी अधिनियम के अनुसार केवल मान्यता प्राप्त संस्थानों को ही डिग्री जारी करने का अधिकार है। इसके अलावा किसी भी संस्थान द्वारा दी गई डिग्री वैध नहीं मानी जाएगी।

दिल्ली में सबसे अधिक 12 फर्जी यूनिवर्सिटी चिन्हित

यूजीसी की सूची के मुताबिक सबसे ज्यादा फर्जी विश्वविद्यालय दिल्ली में पाए गए हैं, जहां ऐसे 12 संस्थानों की पहचान की गई है। इसके बाद उत्तर प्रदेश में चार विश्वविद्यालय इस सूची में शामिल हैं।

आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में दो-दो फर्जी विश्वविद्यालय पाए गए हैं। वहीं अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा और झारखंड में एक-एक संस्थान को इस सूची में रखा गया है। आयोग ने संबंधित राज्य सरकारों से इनके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने को कहा है।

एडमिशन से पहले ऐसे करें विश्वविद्यालय की मान्यता की जांच

यूजीसी ने सलाह दी है कि किसी भी कोर्स में दाखिला लेने से पहले संबंधित विश्वविद्यालय और कार्यक्रम की मान्यता की पुष्टि अवश्य कर लें। इसके लिए आयोग की डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो की वेबसाइट पर जाकर संबंधित कोर्स की मान्यता और पात्रता की जानकारी देखी जा सकती है।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आकर्षक विज्ञापनों, सोशल मीडिया प्रचार या कम फीस के आधार पर किसी संस्थान में प्रवेश लेना जोखिम भरा हो सकता है। यदि संस्थान मान्यता प्राप्त नहीं है तो वहां से प्राप्त डिग्री भविष्य में अमान्य घोषित हो सकती है, जिससे छात्रों के करियर पर असर पड़ सकता है।

एडटेक कंपनियों और फ्रेंचाइजी मॉडल पर भी सख्ती

राज्यसभा में सरकार ने बताया कि यूजीसी ने कुछ एडटेक कंपनियों द्वारा विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर ऑनलाइन तथा ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) मोड में डिग्री और डिप्लोमा कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार पर आपत्ति जताई है। आयोग का कहना है कि इस प्रकार का फ्रेंचाइजी मॉडल नियमों के अनुरूप नहीं है।

यूजीसी ने साफ किया है कि ऐसे माध्यम से संचालित कार्यक्रमों को मान्यता नहीं दी जाएगी। यदि कोई संस्थान नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आयोग समय-समय पर कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ आवश्यक चेतावनी भी देता है।

फर्जी विश्वविद्यालयों के खिलाफ कैसे होती है कार्रवाई

यूजीसी के पास फर्जी विश्वविद्यालयों और बिना मान्यता वाले संस्थानों की निगरानी के लिए एक विशेष सेल कार्यरत है। यह सेल यूजीसी अधिनियम, 1956 का उल्लंघन कर डिग्री देने या अवैध शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित करने संबंधी शिकायतों की जांच करता है। शिकायत मिलने पर संबंधित संस्थान को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाता है।

यदि जांच में संस्थान का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो उसे फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल किया जाता है। इसके बाद आयोग संबंधित राज्य सरकारों से एफआईआर दर्ज कराने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध करता है।

लेखक परिचय

लेखक: विशेष संवाददाता, देश की पत्रिका

विशेषज्ञता: उत्तर प्रदेश की राजनीति, शिक्षा और चुनावी मामलों की रिपोर्टिंग

संपादकीय नोट: यह लेख शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी द्वारा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से पहले उसकी आधिकारिक मान्यता की पुष्टि अवश्य करें।


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