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रेस्टोरेंट साफ तो खाना भी सेफ? तुकाराम मुंढे ने बताए वे खतरे जो आँखों से ओझल रहते हैं

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संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 | 03:23 PM

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रेस्टोरेंट साफ तो खाना भी सेफ? तुकाराम मुंढे ने बताए वे खतरे जो आँखों से ओझल रहते हैं
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रेस्टोरेंट की चमचमाती टेबल और साफ-सुथरा किचन देखकर हम अक्सर यह मान लेते हैं कि वहां मिलने वाला खाना भी पूरी तरह सुरक्षित होगा। लेकिन असलियत इसके बिल्कुल विपरीत हो सकती है। तुकाराम मुंढे रेस्टोरेंट हाइजीन के मामलों पर बात करते हुए हाल ही में यह स्पष्ट किया है कि फूड सेफ्टी केवल ऊपरी सफाई तक सीमित नहीं है। वर्ल्ड फूड डे के अवसर पर महाराष्ट्र के कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने इस बात से पर्दा उठाया कि खाने की सुरक्षा कच्चा माल खरीदने से लेकर प्लेट तक पहुंचने की पूरी चेन पर निर्भर करती है। जिस प्रकार प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर करने के लिए सिर्फ एक कॉल पर नाली होगी साफ: योगी सरकार की हेल्पलाइन 1533 शुरू जैसी जमीनी पहल की जरूरत होती है, उसी प्रकार खाद्य सुरक्षा के मामले में भी केवल दिखावे की चमक-धमक से काम नहीं चल सकता, बल्कि हर स्तर पर पारदर्शिता और कड़े नियमों का पालन अनिवार्य होना चाहिए।

कच्चे माल की शुद्धता और स्टोरेज से जुड़े छिपे खतरे

मुंढे के मुताबिक, फूड सेफ्टी की सबसे पहली कड़ी कच्चा माल है। कई बार खाने की सामग्रियां खुले में, बिना किसी पक्के बिल और बिना लाइसेंस वाले सप्लायरों से खरीदी जाती हैं। यदि पनीर, खोया या कुकिंग ऑयल ही शुरुआती स्तर पर मिलावटी है, तो बाद में किचन को कितना भी सैनिटाइज क्यों न कर लिया जाए, उस सामग्री को पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता है। इसके अलावा, डेयरी प्रोडक्ट्स, मांस और सीफूड को एक निश्चित और सही तापमान पर रखना बेहद जरूरी होता है। परिवहन और स्टोरेज के दौरान यदि कोल्ड चेन टूट जाती है, तो संक्रमण और फूड पॉइजनिंग का जोखिम कई गुना तक बढ़ जाता है। राजनीतिक गलियारों में जिस प्रकार अमित शाह का जोरदार दावा: 14 नवंबर को 11 बजे तक लालू एंड कंपनी का सूपड़ा साफ जैसी राजनीतिक चर्चाओं में अंदरूनी और छिपी हुई रणनीतियां मायने रखती हैं, ठीक उसी तरह रेस्टोरेंट के पर्दे के पीछे होने वाले स्टोरेज और खरीद-फरोख्त के तौर-तरीके ही यह तय करते हैं कि आपकी प्लेट में आने वाला भोजन स्वास्थ्यवर्धक है या जानलेवा।

कुकिंग ऑयल का बार-बार इस्तेमाल और अन्य गंभीर जोखिम

भोजन तैयार करने के दौरान एक ही तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल करना एक बहुत बड़ी और गंभीर चिंता का विषय है। लगातार तेज आंच पर गर्म करने से तेल अपनी गुणवत्ता खो देता है और उसमें खतरनाक तथा हानिकारक कंपाउंड्स बनने लगते हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने टोटल पोल कंपाउंड यानी TPC की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत तय की है, जिसके पार जाते ही उस तेल को तुरंत इस्तेमाल से हटा देना चाहिए। FSSAI के दिशा-निर्देशों के अनुसार, ऐसे इस्तेमाल हो चुके कुकिंग ऑयल को दोबारा फूड चेन में लाने के बजाय बायोडीजल के निर्माण में उपयोग किया जाना चाहिए। एक अनुमान के मुताबिक, हमारे देश में लगभग 220 करोड़ लीटर इस्तेमाल किया हुआ कुकिंग ऑयल इस प्रक्रिया के जरिए रिकवर किया जा सकता है। इसके अलावा, कच्चे और पके हुए भोजन के लिए एक ही चाकू या चॉपिंग बोर्ड का उपयोग करना भी क्रॉस-कंटामिनेशन के जरिए गंभीर बीमारियों को न्योता देता है। इसी प्रकार, त्योहारों के सीजन में रक्षाबंधन पर बीकानेरवाला की मिठाइयों, नमकीन और खास तोहफों जैसी प्रतिष्ठित दुकानों से खरीदारी करते समय भी यह सुनिश्चित करना आवश्यक होता है कि खाद्य पदार्थों में किसी भी प्रकार के गैर-अनुमति वाले सिंथेटिक रंगों का प्रयोग न किया गया हो।

ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्लाउड किचन की अदृश्य चुनौतियाँ

आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन खाना मंगाने का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन क्लाउड किचन और ऑनलाइन डिलीवरी के मामलों में भोजन रसोई से निकलकर सीधे ग्राहक तक पहुंचने के बीच कई और चरण जुड़ जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान खाना किस प्रकार रखा गया और किन परिस्थितियों में पहुंचाया गया, यह सब ग्राहक की नजरों से कोसों दूर रहता है। इसलिए ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि वे केवल उन्हीं रेस्टोरेंट और वेंडर्स को अपने साथ जोड़ें जिनके पास वैध लाइसेंस मौजूद हों। पैकेजिंग सामग्री की गुणवत्ता भी उतनी ही अहम है; गर्म भोजन को घटिया या प्रतिबंधित प्लास्टिक की थैलियों में पैक करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हो सकता है। इसके अलावा, अखबारों की स्याही में मौजूद केमिकल्स भोजन के संपर्क में आने से गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं, इसलिए अखबार में खाना लपेटने की पुरानी आदत से भी तौबा करनी होगी। सामाजिक सरोकारों से जुड़े अन्य मुद्दों की तरह, जैसे कि दिल्ली के थानों में महिला पुलिसकर्मियों के लिए सैनिटरी पैड मशीन और साफ शौचालय की मांग को लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर संवेदनशीलता दिखाई जाती है, वैसे ही खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग और हाइजीन को लेकर भी कड़े सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए ताकि आम नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो सके।

निष्कर्ष एवं नागरिक कर्तव्य

अंततः यह समझना बेहद जरूरी है कि केवल साफ-सुथरी डाइनिंग टेबल या चमचमाता हुआ काउंटर इस बात की पक्की गारंटी नहीं देता कि रेस्टोरेंट का खाना पूरी तरह सुरक्षित है। तुकाराम मुंढे द्वारा उठाए गए इन तमाम मुद्दों से यह स्पष्ट होता है कि असली खाद्य सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि खाने का कच्चा माल कहाँ से आया, उसका भंडारण कैसे हुआ, पीने के पानी और बर्फ की गुणवत्ता कैसी थी, तेल का उपयोग कितनी बार हुआ और भोजन को किस प्रकार तैयार एवं पैक किया गया। त्योहारी सीजन के दौरान, जैसे कि दिवाली पर दिल्ली में पटाखों की धूम और सीएम रेखा गुप्ता का बयान सुरक्षा और उत्सव के संतुलन को रेखांकित करता है, ठीक उसी तरह हमें खान-पान के मामले में भी स्वाद के साथ-साथ अपनी सेहत और सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। हाइजीन रेटिंग और ईट राइट जैसी सरकारी पहलों का मुख्य उद्देश्य भी यही है कि जनता को जागरूक किया जाए और खाद्य व्यवसायी कड़े नियमों का पालन करने के लिए बाध्य हों।

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देश की पत्रिका डिजिटल संपादकीय टीम। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता।