यूपी विधानसभा चुनाव 2027: हरैया सीट पर भाजपा में टिकट की जंग, तीन दावेदार — एक नया चेहरा भी रेस में?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से करीब दो साल पहले ही बस्ती जिले की हरैया विधानसभा सीट (307) पर भाजपा में टिकट को लेकर जोरदार सक्रियता शुरू हो गई है। तीन प्रमुख दावेदारों — मौजूदा विधायक अजय सिंह, पूर्व सपा मंत्री राजकिशोर सिंह और हरिद्वार मिश्रा — के बीच तगड़ी होड़ है। अजय सिंह हैट्रिक की कोशिश में हैं, तो राजकिशोर सिंह सपा से भाजपा में आकर अपनी जमीनी पकड़ के बल पर दावेदारी ठोक रहे हैं। पार्टी किसी नए चेहरे पर भी दांव लगा सकती है।
केंद्रीय संपादकीय डेस्क • मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 | 10:51 AM
बस्ती की उस सीट पर नजर, जहां 2027 से पहले ही शुरू हो गई है असली लड़ाई
चुनाव में अभी दो साल बाकी हैं। लेकिन बस्ती जिले की हरैया विधानसभा सीट (307) पर माहौल बिल्कुल वैसा ही है जैसा चुनाव से ऐन पहले होता है। गलियों में नेताजी के होर्डिंग, चौपालों पर चर्चा, और भाजपा दफ्तरों में दावेदारों की आमद — सब कुछ 2027 की तैयारी में जुट गया है।
यह सीट इसलिए भी खास है क्योंकि यहाँ भाजपा के अंदर ही तीन-तीन बड़े नाम टिकट के लिए मैदान में हैं। और इनमें से एक नाम तो ऐसा है जो कभी सपा का मजबूत स्तंभ रहा था।
राजकिशोर सिंह — सपा का पुराना चेहरा, अब भाजपा की राह पर
तीन बार मंत्री रह चुके राजकिशोर सिंह का नाम हरैया की राजनीति में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। समाजवादी पार्टी में लंबे वक्त तक रहे, सत्ता देखी, जनता के बीच पैठ बनाई। लेकिन अब वो भाजपा के रंग में रंगे नजर आ रहे हैं — और टिकट के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे।
जानकारों का कहना है कि राजकिशोर सिंह की सबसे बड़ी ताकत उनकी जमीनी पकड़ है। "वो बूथ स्तर तक जाते हैं, लोग उन्हें पहचानते हैं" — यह बात हरैया के एक स्थानीय कार्यकर्ता ने बताई जो खुद किसी एक खेमे में अभी नहीं गया है।
लेकिन सवाल यह है — क्या भाजपा किसी पुराने सपा नेता को इतनी अहम सीट पर उतारने का जोखिम उठाएगी?
अजय सिंह — हैट्रिक की तलाश में मौजूदा विधायक
वर्तमान विधायक अजय सिंह पहले से ही मैदान में हैं — और इस बार उनके सामने एक बड़ा लक्ष्य है। हैट्रिक।
दो बार इस सीट से जीत चुके अजय सिंह का संगठन पर मजबूत हाथ है। भाजपा के कार्यकर्ता उनके साथ खड़े दिखते हैं। विकास कार्यों का हवाला देकर वो अपनी दावेदारी को सबसे मजबूत बताते हैं।
पर राजनीति में जो दिखता है, वो हमेशा होता नहीं। पार्टी के अंदर एंटी-इन्कम्बेंसी का डर हर बार मौजूदा विधायक को थोड़ा कमजोर करता है। यही उनकी सबसे बड़ी चुनौती है।
हरिद्वार मिश्रा — तीसरा नाम, लेकिन नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
तीसरे दावेदार हरिद्वार मिश्रा का नाम भले ही कम चर्चा में हो, लेकिन वो भी इस रेस में पूरी गंभीरता से हैं। जनसंपर्क, सामाजिक कार्यों में सक्रियता और संगठन में उनकी उपस्थिति लगातार बढ़ रही है।
कहते हैं राजनीति में अंडरडॉग को कभी ignore नहीं करना चाहिए।
नया चेहरा भी हो सकता है तुरुप का इक्का
इन तीनों नामों के बीच एक और संभावना भाजपा के भीतर खुलकर चर्चा में है — नया चेहरा।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगर जीत का गणित इन तीनों के पक्ष में नहीं बैठा, तो भाजपा किसी ऐसे चेहरे को सामने ला सकती है जो ताज़ा हो, विवादों से मुक्त हो, और जातीय समीकरणों में फिट बैठे। यूपी में भाजपा का यह प्रयोग पहले भी सफल रहा है।
हरैया की सीट — इतनी अहम क्यों है?
हरैया विधानसभा सीट बस्ती जिले की उन सीटों में से है जहाँ जातीय समीकरण, क्षेत्रीय विकास और स्थानीय नेतृत्व — तीनों मिलकर परिणाम तय करते हैं। यहाँ की राजनीति दिल्ली या लखनऊ से नहीं, बल्कि गाँव की चौपाल से चलती है।
सपा भी इस सीट पर नजर रखे हुए है। और यह भी जानती है कि अगर भाजपा में बिखराव हुआ, तो मौका मिल सकता है।
2027 अभी दूर है। लेकिन हरैया में जो दौड़ शुरू हो चुकी है — वो रुकने वाली नहीं।
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