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दिल्ली बिजली बिल राहत: सीएम रेखा गुप्ता का बड़ा ऐलान, अब सोलर पैनल से बिजली बिल होगा जीरो

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संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • बुधवार, 2 सितंबर 2026 | 02:12 PM

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दिल्ली बिजली बिल राहत: सीएम रेखा गुप्ता का बड़ा ऐलान, अब सोलर पैनल से बिजली बिल होगा जीरो
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दिल्ली के नागरिकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आ रही है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कैबिनेट बैठक के बाद दिल्ली बिजली बिल राहत को लेकर एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी घोषणा की है। सरकार ने दिल्ली सोलर एनर्जी पॉलिसी का नया और उन्नत संस्करण लॉन्च किया है, जिसके तहत राजधानी के लाखों परिवारों को अब बिजली के भारी-भरकम बिलों से हमेशा के लिए मुक्ति मिलने वाली है। इस योजना के माध्यम से दिल्ली सरकार का लक्ष्य न केवल बिजली बिलों को कम करना है, बल्कि उपभोक्ताओं को आत्मनिर्भर ऊर्जा उत्पादक बनाना भी है।

दिल्ली सोलर एनर्जी पॉलिसी का अगला चरण और लक्ष्य

कैबिनेट बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री की ‘PM सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना’ देशभर में बेहतरीन काम कर रही है, लेकिन दिल्ली में इसकी रफ्तार अपेक्षाकृत कम थी। सरकार ने इसकी चुनौतियों को गहराई से समझकर उनका स्थाई समाधान निकाला है। सरकार ने मार्च 2027 तक दिल्ली के 2.30 लाख घरों की छतों पर मुफ्त सोलर सिस्टम लगाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

इस योजना के तहत, जो परिवार प्रति माह 400 यूनिट तक बिजली का इस्तेमाल करते हैं, उनके घरों की छतों पर 3 kW (किलोवाट) का रूफटॉप सोलर सिस्टम पूरी तरह से मुफ्त लगाया जाएगा। इसके लिए उपभोक्ताओं को शुरुआती तौर पर कोई भी राशि खर्च नहीं करनी होगी। इस नई घोषणा से पहले दिल्ली सरकार ने जनहित में कई अन्य कल्याणकारी कदम भी उठाए हैं। जैसे हाल ही में महिलाओं के आर्थिक संबल के लिए दिल्ली में ₹2500 वाली योजना लागू की गई थी, जिसके बाद अब बिजली के क्षेत्र में यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।

उपभोक्ताओं की तीन बड़ी समस्याओं का हुआ समाधान

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि पहले दिल्ली में सोलर पैनल लगाने को लेकर लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं और व्यावहारिक दिक्कतें थीं। सरकार ने इस नई नीति में उन सभी तीन प्रमुख समस्याओं को पूरी तरह से दूर कर दिया है:

  • शुरुआती लागत की समस्या: पहले सोलर सिस्टम लगाने के लिए उपभोक्ताओं को एक बड़ी रकम अग्रिम (अपफ्रंट) देनी होती थी। अब सरकार ने इसे पूरी तरह से शून्य कर दिया है। 400 यूनिट तक खपत वाले घरों के लिए यह पूरी तरह से मुफ्त होगा।
  • इंसेंटिव मिलने में देरी: पहले की नीति में कुछ सरकारी प्रोत्साहन (इंसेंटिव) 5 साल की अवधि में धीरे-धीरे दिए जाते थे। नई नीति में इस पूरी प्रक्रिया को सरल बनाते हुए इसे 'अपफ्रंट सपोर्ट' यानी शुरुआत में ही शामिल कर दिया गया है।
  • रखरखाव (ऑपरेशन और मेंटेनेंस): सोलर पैनल लगाने के बाद उसके रखरखाव को लेकर लोग चिंतित रहते थे। अब सरकार द्वारा चुनी गई वेंडर कंपनियां पहले 5 साल तक सोलर सिस्टम का मुफ्त ऑपरेशन और मेंटेनेंस करेंगी।
  • दिल्ली सरकार का यह कदम शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। हालांकि, दिल्ली में अन्य बुनियादी सुविधाओं और सार्वजनिक परिवहन को लेकर भी लगातार मांगें उठती रही हैं। उदाहरण के लिए, हाल ही में यात्रियों को होने वाली असुविधाओं के संदर्भ में जहांगीरपुरी मेट्रो स्टेशन पर नहीं दिया जा रहा है दिल्ली मेट्रो स्मार्ट कार्ड जैसी खबरें भी चर्चा में रही हैं, जिन्हें सुलझाने का प्रयास प्रशासन कर रहा है।

    सब्सिडी का पूरा गणित: केंद्र और दिल्ली सरकार की बड़ी भागीदारी

    इस योजना की वित्तीय संरचना को बेहद आकर्षक बनाया गया है ताकि दिल्ली बिजली बिल राहत का सीधा लाभ बिना किसी वित्तीय बोझ के हर नागरिक तक पहुंच सके। मुख्यमंत्री के अनुसार, 3 kW के रूफटॉप सोलर सिस्टम पर केंद्र सरकार की ओर से ₹78,000 की सब्सिडी दी जाएगी। इसके साथ ही, दिल्ली सरकार भी अपनी तरफ से ₹78,000 की अतिरिक्त कैपिटल सब्सिडी प्रदान करेगी।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्र और राज्य सरकार की कुल ₹1,56,000 की सब्सिडी के बाद भी यदि सोलर प्लांट की स्थापना लागत में कोई अंतर (गैप) बचता है, तो उस अतिरिक्त खर्च का वहन भी दिल्ली सरकार स्वयं करेगी। पहले मिलने वाले तमाम वित्तीय प्रोत्साहनों को भी शुरुआती स्तर पर ही समायोजित कर दिया जाएगा, जिससे उपभोक्ता पर इंस्टॉलेशन के समय एक रुपये का भी अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।

    उपभोक्ता से उत्पादक (Prosumer) बनने का सफर

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देश की पत्रिका डिजिटल संपादकीय टीम। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता।

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