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Friday, 14 Aug 2026

पीएम मोदी ने दिल्ली में भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, 127 वर्ष बाद स्वदेश लौटी विरासत

नई दिल्ली, 3 जनवरी 2026 | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली के राय पिथौरा कल्चरल कॉम्प्लेक्स में ‘द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन’ नामक भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध से जुड़े दुर्लभ पिपरहवा अवशेषों को केंद्र में रखकर आयोजित की गई है, जो 1898 में उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में खुदाई के दौरान मिले थे। इनमें से कुछ अवशेष 127 वर्षों बाद जुलाई 2025 में स्वदेश repatriated हुए हैं, और पहली बार राष्ट्रीय संग्रहालय (नई दिल्ली) तथा भारतीय संग्रहालय (कोलकाता) के संरक्षित अवशेषों के साथ एकत्रित कर प्रदर्शित किए गए हैं।

प्रदर्शनी में भगवान बुद्ध की अस्थियों से जुड़े रत्न, reliquaries, सोने के आभूषण, रत्नों वाली सामग्री और पुरातात्विक वस्तुएं शामिल हैं। ये अवशेष प्राचीन कपिलवस्तु से जुड़े माने जाते हैं, जहां भगवान बुद्ध ने अपना प्रारंभिक जीवन व्यतीत किया था। उद्घाटन के दौरान पीएम मोदी ने इसे 2026 का अपना पहला सार्वजनिक कार्यक्रम बताया और कहा कि भगवान बुद्ध के चरणों से वर्ष की शुरुआत होना सौभाग्य की बात है।

127 वर्षों के इंतजार के बाद भारत लौटी धरोहर
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “सवा सौ साल के लंबे इंतजार के बाद भारत की विरासत लौट आई है। आज से भारतीय जनमानस भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर सकेगा और आशीर्वाद ले सकेगा।” उन्होंने गुलामी के दौर को याद करते हुए बताया कि औपनिवेशिक काल में इन अवशेषों को भारत से बाहर ले जाया गया और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नीलाम करने की कोशिश की गई। गोदरेज ग्रुप की मदद से इनकी वापसी संभव हुई।

प्रदर्शनी स्थल किला राय पिथौरा अपने आप में ऐतिहासिक है, जो भारत की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। पीएम ने कहा कि गुलामी न केवल राजनीतिक-अर्थिक होती है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर को भी दबा देती है। इन अवशेषों का बाहर जाना और वापस आना इसी का सबक है।

भगवान बुद्ध का जीवन पर गहरा प्रभाव: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से भगवान बुद्ध के प्रभाव को साझा किया। उन्होंने कहा, “भगवान बुद्ध का मेरे जीवन पर गहरा असर पड़ा है। वे सबके हैं और सबको जोड़ते हैं। मेरा जन्म वडनगर में हुआ, जो बौद्ध शिक्षा का बड़ा केंद्र था। सारनाथ, जहां बुद्ध ने पहला उपदेश दिया, आज मेरी कर्मभूमि है।” सरकार बौद्ध सर्किट विकसित कर रही है ताकि विश्व भर के तीर्थयात्री बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ उठा सकें।

पीएम ने भारत को बौद्ध परंपरा का जीवंत वाहक बताया। पिपरहवा के अलावा वैशाली, देवनी मोरी और नागार्जुनकोंडा जैसे स्थलों से मिले अवशेष बुद्ध के संदेश की जीवित उपस्थिति हैं। हाल के महीनों में थाईलैंड, वियतनाम आदि देशों में इन अवशेषों की प्रदर्शनी पर श्रद्धा का ज्वार उमड़ा।

भारत की निरंतर कोशिशें और वैश्विक योगदान
सरकार का प्रयास है कि बौद्ध विरासत को प्राकृतिक रूप से संरक्षित किया जाए और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाए। भारत दुनिया भर के बौद्ध स्थलों के विकास में योगदान दे रहा है। प्रदर्शनी में इमर्सिव ऑडियो-विजुअल प्रेजेंटेशन, डिजिटल रीकंस्ट्रक्शन और थीमेटिक सेक्शन शामिल हैं, जो बुद्ध के जीवन, शिक्षाओं और अवशेषों की खोज को जीवंत बनाते हैं।

पीएम मोदी ने कामना की कि भगवान बुद्ध के आशीर्वाद से 2026 विश्व के लिए शांति, समृद्धि और सद्भाव का वर्ष बने। प्रदर्शनी कुछ महीनों तक खुलेगी और जनता 4 जनवरी से इसे देख सकेगी। यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और बौद्ध दर्शन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।