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Sunday, 26 Apr 2026

राघव चड्ढा की Z+ सुरक्षा छिनी — AAP से निकाले जाने के बाद पंजाब सरकार का बड़ा फैसला

आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में Deputy Leader के पद से हटाए जाने के कुछ ही दिनों बाद, पंजाब सरकार ने उनकी Z+ श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली है। NDTV के सूत्रों के अनुसार पंजाब पुलिस के वो अधिकारी और जवान जो 37 वर्षीय सांसद की सुरक्षा में तैनात थे, उन्हें हटा लिया गया है। इस फैसले की timing को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक इसे महज administrative कदम मानने से इनकार कर रहे हैं। चड्ढा की तरफ से इस मामले पर अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पहले पद गया, अब सुरक्षा भी

कुछ हफ्ते पहले तक राघव चड्ढा AAP के उभरते हुए चेहरे थे। राज्यसभा में पार्टी के Deputy Leader। 37 साल की उम्र में वो मुकाम जो कई नेताओं को दशकों में नहीं मिलता। लेकिन राजनीति में पतन उतनी ही तेज़ी से होता है जितनी तेज़ी से उभार।

AAP ने जब राघव चड्ढा को राज्यसभा में Deputy Leader के पद से हटाया, तब बहुतों ने सोचा शायद यह एक internal reshuffle है। पर बुधवार को जो खबर आई, उसने साफ कर दिया — मामला सिर्फ पद बदलने का नहीं था।

पंजाब सरकार ने चड्ढा की Z+ श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली। पंजाब पुलिस के वो अफसर और जवान जो उनकी सुरक्षा में तैनात थे, उन्हें हटा लिया गया। NDTV के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है।

Z+ सुरक्षा — यह होती क्या है?

Z+ category की security कोई साधारण protection नहीं होती। यह देश की सबसे ऊंची security cover में से एक है। इसमें armed commandos, advance security teams और round-the-clock surveillance शामिल होती है। अमूमन यह उन्हीं लोगों को मिलती है जिनके लिए सरकारी intelligence agencies गंभीर खतरा मानती हों।

यानी यह सुरक्षा privilege भी थी और एक तरह का status symbol भी।

अब वो दोनों चले गए।

AAP और राघव चड्ढा — दरार कब से?

राघव चड्ढा और AAP के बीच रिश्ते पिछले कुछ महीनों से सहज नहीं रहे। चड्ढा राज्यसभा से suspend हुए थे, बाद में वापस आए। उनकी शादी Parineeti Chopra से हुई — जो खुद एक बड़ी खबर बनी। लेकिन political front पर ग्राफ गिरता रहा।

पार्टी ने Deputy Leader का पद छीनते वक्त कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। न कोई press conference, न कोई explanation। बस एक internal reshuffle की तरह announce हुआ। राजनीति में खामोशी भी एक संदेश होती है।

एक वरिष्ठ पत्रकार ने नाम न लेने की शर्त पर कहा — “जब पार्टी बोलती नहीं और सरकार security हटाती है, तो समझ लीजिए संदेश साफ है।”

पंजाब सरकार का यह फैसला — political या administrative?

यही सवाल सबसे अहम है। पंजाब में AAP की सरकार है। मुख्यमंत्री भगवंत मान हैं। अब जब पार्टी और राघव चड्ढा के बीच दूरियां बढ़ी हैं, तो सरकार का यह कदम — क्या महज routine review था?

शायद नहीं।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक security cover की periodic review होती रहती है और threat perception के आधार पर इसे घटाया-बढ़ाया जाता है। लेकिन timing — AAP के internal action के ठीक बाद — इसे सिर्फ administrative फैसला मानना मुश्किल है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह एक साफ संकेत है कि चड्ढा अब पार्टी के inner circle में नहीं हैं।

चड्ढा की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं

इस पूरे घटनाक्रम पर राघव चड्ढा की तरफ से अब तक कोई public statement नहीं आया है। न social media पर, न किसी मीडिया को बयान। यह खामोशी खुद में बहुत कुछ कह रही है।

जो नेता कभी हर मुद्दे पर press briefing करते थे, आज सबसे बड़े मुद्दे — अपनी ही security छिनने — पर चुप हैं।

AAP में यह पहला ऐसा मामला नहीं

AAP की history में यह पहली बार नहीं है जब किसी करीबी नेता के साथ ऐसा हुआ हो। Kumar Vishwas से लेकर Yogendra Yadav तक — पार्टी ने जब किसी से नाता तोड़ा, तो पूरी तरह तोड़ा। एक झटके में। बिना ज्यादा explanation के।

राघव चड्ढा का मामला उस pattern से अलग नहीं दिखता।

हालांकि अभी तक formally उन्हें पार्टी से निकाला नहीं गया है। लेकिन Deputy Leadership जाना, Z+ security जाना — यह संकेत किसी और दिशा में नहीं जाते।

दिल्ली की राजनीति में कहते हैं — जब तक official announcement आती है, unofficial message बहुत पहले पहुंच चुका होता है।