उत्तराखंड में गुटखा और पान मसाला पर एक साल का पूर्ण प्रतिबंध, सख्त आदेश जारी
संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 | 04:41 PM
उत्तराखंड में गुटखा प्रतिबंध के तहत राज्य सरकार ने जनस्वास्थ्य (पब्लिक हेल्थ) के हित में एक ऐतिहासिक और सख्त कदम उठाया है। पूरे प्रदेश में तंबाकू और निकोटिन युक्त गुटखा, पान मसाला और अन्य समान खाद्य उत्पादों पर एक साल के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। देश के विभिन्न राज्यों में चल रहे स्वास्थ्य सुधार अभियानों की तर्ज पर, जैसा कि उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक सख्ती देखी जा रही है, उसी प्रकार उत्तराखंड प्रशासन भी अब जनहित के मुद्दों पर पूरी तरह से जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है। यह आदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तराखंड के आयुक्त विनय शंकर पांडेय द्वारा जारी किया गया है, जो अगले एक साल तक पूरे प्रदेश में पूरी सख्ती के साथ प्रभावी रहेगा।
क्या-क्या रहेगा प्रतिबंधित और क्या हैं नए नियम?
राज्य में किसी भी ब्रांड या नाम से बिकने वाले ऐसे सभी गुटखा, पान मसाला या खाद्य पदार्थ पूरी तरह प्रतिबंधित होंगे जिनमें तंबाकू या निकोटिन मिला हुआ हो। इसके अलावा, आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह बैन सिर्फ पहले से तैयार पैकेटों पर ही लागू नहीं होगा, बल्कि उन उत्पादों पर भी लागू होगा जहां पान मसाला और तंबाकू बाजार में अलग-अलग पाउच में बेचे जाते हैं ताकि उपभोक्ता उन्हें एक साथ मिलाकर सेवन कर सकें। जिस प्रकार देश के अन्य हिस्सों में शासन स्तर पर बड़े बदलाव हो रहे हैं, जैसे शिक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक सुधार किए जा रहे हैं, उसी प्रकार स्वास्थ्य क्षेत्र में भी यह कड़ा कदम उठाया गया है।
इन गतिविधियों पर रहेगी सख्त रोक और होगी कानूनी कार्रवाई
प्रतिबंध की अवधि के दौरान इन हानिकारक पदार्थों के निर्माण (उत्पादन), भंडारण (स्टॉक करना), परिवहन, वितरण और खरीद-बिक्री को पूरी तरह से अवैध घोषित कर दिया गया है। सरकार ने यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (Food Safety and Standards Act) की धारा 30(2) के तहत की है। नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों, सप्लायर्स और मैन्युफैक्चरर्स के खिलाफ भारी जुर्माने और कानूनी केस दर्ज करने के निर्देश सभी जिलाधिकारियों (DMs) और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को दे दिए गए हैं। प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद है ताकि आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
बैन लगाने का मुख्य कारण और जनस्वास्थ्य पर प्रभाव
खाद्य सुरक्षा आयुक्त के आदेश के मुताबिक, कानूनन किसी भी खाद्य उत्पाद में तंबाकू और निकोटिन का इस्तेमाल करना पूरी तरह वर्जित है। इसके बावजूद बाजार में धड़ल्ले से इनका उपयोग किया जा रहा था, जिससे ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा था। इसी जनस्वास्थ्य के गंभीर खतरे को देखते हुए धामी सरकार ने तत्काल प्रभाव से यह राज्यव्यापी प्रतिबंध लागू किया है। सरकार का यह कदम राज्य के युवाओं और आम नागरिकों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
निष्कर्ष
उत्तराखंड सरकार का यह फैसला न केवल तंबाकू सेवन पर लगाम कसेगा, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी पैदा करेगा। प्रशासन की इस सख्ती से अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है और आने वाले दिनों में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
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