दिल्ली: 'हर हर रेखा या घर घर ठेका ' वाले एआई पोस्ट पर हाईकोर्ट सख्त, आप के छह वीडियो-पोस्ट हटाने का निर्देश
संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • शनिवार, 7 नवंबर 2026 | 11:29 AM
मुख्यमंत्री के खिलाफ एआई वीडियो और पोस्ट पर बड़ी कार्रवाई
राजधानी में राजनीतिक पारा इन दिनों सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को लेकर काफी गर्माया हुआ है। ताजा मामला जुड़ा है दिल्ली: 'हर हर रेखा या घर हर ठेका ' वाले एआई पोस्ट पर हाईकोर्ट सख्त, आप के छह वीडियो मामले से, जिस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के खिलाफ बनाए गए विवादित एआई वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट को तुरंत हटाने का बड़ा आदेश दिया है। अदालत का मानना है कि इस तरह के डिजिटल कंटेंट ने राजनीतिक व्यंग्य की सारी सीमाओं को पार कर दिया है।
शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की याचिका पर सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए आम आदमी पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर किए गए छह वीडियो और पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री की तरफ से यह शिकायत की गई थी कि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए आधुनिक तकनीक का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
याचिका में बताया गया कि आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे वीडियो और तस्वीरें शेयर की गईं जिनमें उन्हें कथित तौर पर शराब बेचते और लोगों को शराब परोसते हुए दिखाया गया। कुछ खास पोस्ट में उनके नाम और चेहरे को एक खास कैंपेन से जोड़कर पेश किया गया था। इस प्रकार की सामग्री के जरिए जनता के बीच गलत संदेश फैलाने की कोशिश की गई, जिसके खिलाफ कानूनी कदम उठाया गया है।
राजनीतिक व्यंग्य की सीमाएं और अदालत की कड़ी टिप्पणी
अदालत ने सुनवाई के दौरान साफ शब्दों में कहा कि इस तरह के मामलों में एआई तकनीक के जरिए बनाए गए वीडियो और पोस्ट राजनीतिक व्यंग्य की मर्यादा को लांघ चुके हैं। अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित प्रतिवादियों को औपचारिक नोटिस भी जारी किया है और उनसे इस पर जवाब मांगा है। अदालत के इस रुख से साफ है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विरोध जताने की आड़ में किसी की छवि खराब करने की छूट नहीं दी जा सकती।
दिल्ली: 'हर हर रेखा या घर हर ठेका ' वाले एआई पोस्ट पर हाईकोर्ट सख्त, आप के छह वीडियो मामले में अब अगली सुनवाई चार दिसंबर को तय की गई है। इस दिन अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी और आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला होगा। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक दलों द्वारा सोशल मीडिया और एआई के इस्तेमाल पर एक नई बहस छेड़ दी है, जहां डिजिटल नैतिकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच की रेखा पर सवाल उठ रहे हैं।
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