पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 :
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बंगाल का अंतिम चरण का चुनाव 29 अप्रैल को है l बंगाल चुनाव 2026 का परिणाम आने में ज़्यादा दिन नही बचा हैं, चुनावी नतीज़ा 4 तारीख को आ जायेगा l तैयारियां भी बहुत जोरो सोरों से शुरु हो चुकी हैं। और हो भी क्यों न – – बंगाल हमेशा से भारतीय राजनीति का सबस हॉट’ battlefield रहा है।
ममता का गढ़, या बदल रही हैं हवाएं?
तृणमूल कांग्रेस (TMC) पिछले दो elections से बंगाल में एकछत्र राज कर रही है। 2021 में तो ममता बनर्जी ने BJP के तूफान को न सिर्फ रोका, बल्कि 213 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया था। लेकिन इस बार माहौल थोड़ा अलग है।
संदेशखाली विवाद से लेकर स्कूल jobs scam तक — TMC सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों की एक लंबी फेहरिस्त है। कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कई मामले चल रहे हैं। पार्टी के कई नेता CBI और ED की जद में हैं। फिर भी ममता दीदी अपनी पकड़ ढीली होने नहीं दे रहीं।
हाल ही में उन्होंने जिलों का दौरा शुरू किया है — सीधे जनता से मिलना, शिकायतें सुनना। यह उनकी वही पुरानी ‘ground connect’ strategy है जो हर बार काम आती है।
BJP कितनी तैयार है?
BJP के लिए बंगाल एक अधूरा सपना है। 2021 में 77 सीटें जीतीं — यह record था — लेकिन सरकार नहीं बना पाई। तब से पार्टी के कई नेता TMC में वापस चले गए। कुछ ‘घर वापसी’ हुई, कुछ निलंबित हुए।
अब BJP ने फिर से organization को दुरुस्त करने की कोशिश शुरू की है। केंद्रीय नेताओं के दौरे बढ़े हैं। “हम 2026 में बंगाल जीतेंगे” — यह दावा पार्टी के हर बड़े नेता की जुबान पर है। लेकिन जमीनी हकीकत इतनी आसान नहीं।
एक वरिष्ठ BJP नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया — “बंगाल में हमें नेता चाहिए, दिल्ली से आने वाले चेहरे नहीं। जब तक local face strong नहीं होगा, मुश्किल है।”
कांग्रेस और Left — अभी भी किनारे पर
यह देखना दिलचस्प है कि जिस Left Front ने दशकों तक बंगाल पर शासन किया, वो आज हाशिए पर है। 2021 में शून्य सीट — यह झटका अभी तक पचा नहीं। कांग्रेस का भी यही हाल है।
I.N.D.I.A. alliance की बात जरूर होती है, लेकिन बंगाल में TMC और Congress के रिश्ते कभी सहज नहीं रहे। ममता अकेले लड़ना पसंद करती हैं — यह उनका style है।
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RG Kar का साया अभी भी मंडरा रहा है
अगस्त 2024 में RG Kar Medical College की घटना ने पूरे बंगाल को हिला दिया था। एक trainee doctor के साथ हुई बर्बरता पर लाखों लोग सड़कों पर उतरे थे। वह गुस्सा अभी भी पूरी तरह ठंडा नहीं हुआ।
विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बनाने में जुटा है। महिला सुरक्षा, law and order — ये issues बंगाल की राजनीति में पहले कम उठते थे, लेकिन अब यह एक बड़ा factor बन सकते हैं।
“बंगाल की बेटियां डरी हुई हैं” — यह नारा अब रैलियों में सुनाई देता है।
चुनावी समीकरण — जातीय और धार्मिक गणित
बंगाल में matua community, Rajbongshi votes, और minority votes — ये तीनों निर्णायक हैं। TMC का minority support base अभी भी मजबूत माना जाता है। लेकिन matua समुदाय, जिसे BJP ने CAA के जरिए साधने की कोशिश की, अभी भी दोनों पार्टियों के बीच झूल रहा है।
CAA लागू तो हो गया, लेकिन जमीन पर अमल कितना हुआ — यह सवाल matua वोटर्स के मन में अभी भी है।
अगले कुछ महीने कैसे रहेंगे?
चुनाव आयोग ने अभी schedule नहीं दिया है — लेकिन दोनों तरफ से counter-campaigns, पदयात्राएं और booth-level meetings तेज हो रही हैं। TMC का ‘दिदि सुरक्षा कवच’ program और BJP की ‘विजय संकल्प यात्रा’ — दोनों parties full gear में हैं।
बंगाल की जनता एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी है जहां हर वोट एक बड़ा फैसला होगा। और बाकी देश? वो देखेगा — क्योंकि बंगाल का नतीजा हमेशा से राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करता आया है।
