बीमार प्रधानाचार्य अस्पताल के बिस्तर से शुभकामनाएं दे रहे थे — और स्कूल के आंगन में उनके छात्र माला पहन रहे थे। यही तस्वीर बयां करती है उस जज्बे को, जो जौनपुर के चंदवक क्षेत्र के बजरंगनगर (विशुनपुर) स्थित भारतीय इंटरमीडिएट कॉलेज में हर साल देखने को मिलती है।
हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे आते ही इस बार भी विद्यालय परिसर में खुशी की लहर दौड़ गई। और इस बार खास बात यह रही कि दोनों वर्गों में बेटियों ने झंडा गाड़ दिया।
बेटियों ने किया कमाल
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इंटरमीडिएट में शाहीना बानो ने 83.8% अंक हासिल कर पूरे विद्यालय में पहला स्थान पाया। दूसरे नंबर पर रहे फरहान, जिन्होंने 82% अंक प्राप्त किए। तीसरा स्थान पायल यादव ने 80.4% के साथ अपने नाम किया।
हाईस्कूल में तो बेटियों ने और भी शानदार प्रदर्शन किया। अंशिका ने 89.16% अंकों के साथ टॉप किया — यह स्कोर देखकर शिक्षक भी दंग रह गए। अंकिता 85% के साथ दूसरे और आकांक्षा यादव 84.5% के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
तीन में से तीन — हाईस्कूल की टॉप-3 लिस्ट पूरी तरह बेटियों के नाम रही।
सम्मान का वो पल
नतीजों के बाद विद्यालय परिवार ने सभी मेधावी छात्र-छात्राओं को आमंत्रित किया। माला पहनाकर उनका सम्मान किया गया, उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। अभिभावक भी इस मौके पर मौजूद थे। जिन घरों में बच्चों की पढ़ाई के लिए न जाने कितने समझौते किए गए होंगे — उन चेहरों पर उस दिन सिर्फ मुस्कान थी।
विद्यालय के प्रबंधक अरविंद कुमार रघुवंशी ने कहा, “मेहनत और लगन से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। इस वर्ष का परिणाम एक बार फिर यह साबित करता है।” उन्होंने यह भी बताया कि इस साल विद्यालय का परिणाम शत-प्रतिशत रहा है और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं।
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अस्पताल से आई शुभकामनाएं
एक बात जो इस पूरे समारोह को और भावुक बना गई — वो थी प्रधानाचार्य हरिश्चंद्र यादव की गैरहाजिरी। वे अस्वस्थ हैं और इस वक्त अस्पताल में हैं। लेकिन अपने छात्रों की सफलता की खबर सुनकर उन्होंने वहीं से शुभकामनाएं भेजीं। विद्यालय के बाकी शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों की उपलब्धि पर खुशी जाहिर की।
एक बीमार शिक्षक का अपने स्कूल से यह जुड़ाव — शायद यही असली तालीम है।
हर साल की एक परंपरा
भारतीय इंटरमीडिएट कॉलेज, बजरंगनगर के लिए यह कोई नई बात नहीं। हर साल बोर्ड परिणाम आने के बाद मेधावियों को सम्मानित करने की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। और हर साल यह आयोजन इलाके के अन्य बच्चों के लिए एक प्रेरणा बन जाता है — कि पढ़ाई का फल मिलता है, और यहां उसे पहचाना भी जाता है।
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इस मौके पर सतीश तिवारी, रियाजउद्दीन शेख, राकेश यादव, किशोर कुमार, संजय यादव और धनेश यादव समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
चंदवक जैसे छोटे कस्बे से निकली ये सफलताएं छोटी नहीं हैं। यहां हर परसेंट के पीछे जलती रात की रोशनी है, माँ की दुआ है, और एक सपना है — जो इस बार पूरा हुआ।
