नोएडा एयरपोर्ट का पहला व्यावसायिक उड़ान, किसानों ने लखनऊ में CM योगी से मुलाकात की
15 जून 2026 को नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (जेवर एयरपोर्ट) ने अपनी व्यावसायिक उड़ानों की शुरुआत की । यह दिन सिर्फ एक नए हवाई अड्डे के संचालन की शुरुआत नहीं थी, बल्कि उन किसानों के लिए ऐतिहासिक क्षण था, जिन्होंने इस परियोजना के लिए अपनी पैतृक जमीन दी थी । इन्हीं किसानों को पहली उड़ान में लखनऊ ले जाया गया, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत और सम्मान किया ।
यह कदम उत्तर प्रदेश सरकार की उन किसानों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान को दर्शाता है, जिन्होंने राज्य के विकास में अपनी भागीदारी निभाई। यह आयोजन ‘अन्नदाताओं का सम्मान, समृद्ध भारत को नमन’ की भावना से प्रेरित था ।
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मुख्य घटनाक्रम
पहली उड़ान और यात्री
नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से पहली व्यावसायिक उड़ान इंडिगो (IndiGo) द्वारा संचालित की गई। फ्लाइट 6E-2278 सुबह लखनऊ से जेवर पहुंची और फिर बेंगलुरु के लिए रवाना हुई । पहली उड़ान में जेवर क्षेत्र के लगभग 170 किसानों का एक विशेष दल शामिल था । इस दल का नेतृत्व जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह ने किया ।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| शुभारंभ तिथि | 15 जून 2026 |
| पहली एयरलाइन | IndiGo |
| पहली उड़ान का मार्ग | लखनऊ से जेवर, फिर बेंगलुरु |
| विशेष यात्री | लगभग 170 किसान (जिनमें 20 महिलाएं शामिल) |
किसानों का लखनऊ प्रवास और CM योगी से मुलाकात
जेवर से लखनऊ पहुंचने पर किसानों के दल की मुलाकात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई । मुख्यमंत्री ने किसानों का स्वागत किया और उन्हें सम्मानित किया । सीएम योगी ने किसानों को राष्ट्रीय समृद्धि की ‘नींव’ बताते हुए उनकी भूमिका की सराहना की । उन्होंने कहा कि किसानों के सहयोग और विश्वास के कारण ही यह परियोजना संभव हो सकी ।
किसानों ने मुख्यमंत्री से बातचीत में अपनी भावनाओं को व्यक्त किया और बताया कि सरकार ने अपने हर वादे को पूरा किया है । जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह ने इस यात्रा को किसानों की गरिमा की ‘मान्यता की उड़ान’ बताया ।
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कार्गो सेवाओं की शुरुआत
व्यावसायिक उड़ानों के दो दिन बाद, 17 जून 2026 को नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कार्गो सेवाओं का भी शुभारंभ हो गया । पहली कार्गो उड़ान चेन्नई से आई, जिसमें करीब 20 टन मिश्रित माल (मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स) था ।
परियोजना का पैमाना और लागत
नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत की दूसरी सबसे महंगी परियोजनाओं में से एक है । इसका पहला चरण लगभग ₹11,282 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ है, जबकि पूरी परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹29,560 करोड़ है ।
परियोजना लागत का विवरण
| लागत घटक | राशि (करोड़ ₹ में) |
|---|---|
| चरण 1 (निर्माण लागत) | 11,282 |
| कुल परियोजना लागत | 29,560 |
| रियायतकर्ता निवेश (चरण 1) | 6,876 |
| भूमि अधिग्रहण (राज्य) | 4,406 |
यह हवाई अड्डा 1,334 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है और इसे चार चरणों में विकसित किया जाना है ।
क्यों है यह एयरपोर्ट ‘गेम चेंजर’?
नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लिए एक गेम चेंजर माना जा रहा है । इसके कई कारण हैं:
1. दिल्ली एयरपोर्ट पर दबाव कम होगा
यह एयरपोर्ट दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर बढ़ते यातायात के दबाव को कम करेगा ।
2. यात्रा का समय बचेगा
नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए हवाई यात्रा करना अब आसान और समय-बचत वाला हो जाएगा ।
3. कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब
यह एयरपोर्ट एक बड़े कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित होगा । ‘मल्टी-मॉडल कार्गो हब’ होने के कारण यह सड़क, रेल और हवाई नेटवर्क से जुड़ा होगा । अकेले फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा ।
4. आर्थिक विकास
इस परियोजना से रोजगार के अवसर पैदा होंगे और उत्तर प्रदेश के ‘एक ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी ।
आगे की योजना
यात्री क्षमता
- प्रारंभिक क्षमता: 1.2 करोड़ यात्री प्रति वर्ष
- अंतिम क्षमता: चौथे चरण तक 7 करोड़ यात्री प्रति वर्ष
- लंबी अवधि में: 5 रनवे के साथ 22.5 करोड़ यात्री प्रति वर्ष की क्षमता
अन्य सुविधाएं
- MRO सुविधा: विमान रखरखाव के लिए 40 एकड़ में सुविधा
- इलेक्ट्रॉनिक सिटी, MSME पार्क, हैंडीक्राफ्ट पार्क: एयरपोर्ट के आसपास 10 मिनट की दूरी पर विकसित किए जा रहे हैं
निष्कर्ष
नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का शुभारंभ न सिर्फ उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह किसानों और विकास के बीच एक मजबूत रिश्ते का प्रतीक भी है। जिन किसानों की जमीन पर यह एयरपोर्ट बना, वे इसकी पहली उड़ान में यात्री बने । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उन्हें सम्मानित करना यह दर्शाता है कि सरकार विकास की प्रक्रिया में भूमि देने वालों की भागीदारी को महत्व देती है ।
आने वाले वर्षों में यह एयरपोर्ट, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के लिए एक प्रमुख विमानन केंद्र के रूप में उभरेगा, जो यात्रियों, कार्गो और अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का काम करेगा ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (जेवर एयरपोर्ट) पर पहली उड़ान कब हुई?
A1: 15 जून 2026 को यहां से पहली व्यावसायिक उड़ान शुरू हुई ।
Q2: नोएडा हवाई अड्डे की पहली उड़ान में किन लोगों ने यात्रा की?
A2: पहली उड़ान में जेवर के लगभग 170 किसान शामिल थे, जिन्होंने एयरपोर्ट के लिए अपनी जमीन दी थी ।
Q3: नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की कुल लागत कितनी है?
A3: पहले चरण की लागत ₹11,282 करोड़ है, जबकि पूरी परियोजना की अनुमानित लागत ₹29,560 करोड़ है ।
Q4: नोएडा एयरपोर्ट का पहला कार्गो फ्लाइट कब आया?
A4: पहली कार्गो उड़ान 17 जून 2026 को चेन्नई से 20 टन माल लेकर आई ।
Q5: नोएडा हवाई अड्डे पर कितनी उड़ानें शुरू हुईं?
A5: पहले दिन इंडिगो ने लखनऊ-जेवर-बेंगलुरु मार्ग पर उड़ान भरी । आने वाले दिनों में अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस भी उड़ानें शुरू करेंगी ।
छवि का वैकल्पिक पाठ (Image Alt Text)
मुख्य छवि:
“नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर IndiGo का पहला विमान उतरते हुए, जिस पर किसान यात्री सवार थे, और पृष्ठभूमि में नए टर्मिनल का आधुनिक दृश्य।”
द्वितीयक छवि:
“मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ में जेवर के किसानों का स्वागत करते हुए और उन्हें सम्मानित करते हुए।”
सोशल मीडिया कैप्शन
✈️ नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा हुआ शुरू! किसान बने पहली उड़ान के मेहमान 🌾
- जिन किसानों की जमीन पर जेवर एयरपोर्ट बना, वही पहली उड़ान में यात्री बने ।
- 170 किसानों ने लखनऊ में CM योगी से मुलाकात की ।
- पहले चरण की लागत ₹11,282 करोड़, कुल परियोजना ₹29,560 करोड़ की ।
- यह एयरपोर्ट NCR के लिए होगा गेम-चेंजर ।
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अस्वीकरण: यह लेख 16 जून 2026 तक उपलब्ध जानकारी और समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। कुछ जानकारियां, विशेषकर भविष्य की योजनाएं, परियोजना की प्रगति के साथ बदल सकती हैं। देशी की पत्रिका (DeshKiPatrika) सटीक और अद्यतन जानकारी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
