भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन इस साल 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा, और मिठाई-नमकीन के जाने-माने ब्रांड बीकानेरवाला ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। कंपनी ने इस मौके पर पारंपरिक घेवर, प्रीमियम काजू कतली और खास गिफ्ट हैम्पर्स की एक पूरी रेंज बाजार में उतारी है।
इस बार की खासियत सिर्फ मिठाइयों तक सीमित नहीं है। बीकानेरवाला की जड़ें राजस्थान के बीकानेर से जुड़ी हैं, और संघर्ष से सफलता तक के इस सफर की झलक अब इसके त्योहारी उत्पादों की लोकप्रियता में भी नजर आती है।
जिस ब्रांड की शुरुआत पुरानी दिल्ली की गलियों में बाल्टी में भुजिया और रसगुल्ला बेचने से हुई थी, वह आज दुनिया के 40 से अधिक देशों में अपने आउटलेट्स और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के साथ मौजूद है।
रक्षाबंधन के लिए क्या है खास मेन्यू
इस साल त्योहारी सीजन के मुख्य आकर्षण के तौर पर शुद्ध देसी घी से बना केसर मलाई घेवर सामने आया है। इसके साथ प्रीमियम काजू कतली, स्पंज रसगुल्ला और गुलाब जामुन जैसी पारंपरिक मिठाइयां भी विशेष उत्सव पैकेजिंग में उपलब्ध होंगी।
गिफ्टिंग के लिहाज से कंपनी ने ‘सिब्लिंग सरप्राइज’ और ‘उत्सव टोकड़ी’ नाम से नए हैम्पर्स लॉन्च किए हैं, जिनमें मिठाइयों के साथ प्रीमियम नमकीन और ड्राई फ्रूट्स का मिश्रण शामिल है। ग्राहक इन्हें नजदीकी आउटलेट के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी होम डिलीवरी पर मंगवा सकते हैं।
बीकानेर की एक छोटी दुकान से शुरू हुआ सफर
बीकानेरवाला की कहानी सन् 1905 में राजस्थान के बीकानेर स्थित कोट गेट इलाके से शुरू होती है, जहां श्री लाल चंद अग्रवाल ने ‘बीकानेर नमकीन भंडार’ नाम से एक छोटी सी दुकान खोली थी। वहां की बीकानेरी भुजिया और रसगुल्ले स्थानीय लोगों के बीच काफी मशहूर हो गए थे।
असली मोड़ करीब 1950 के दशक में आया, जब संस्थापक लाला केदारनाथ अग्रवाल और उनके भाई सत्यनारायण अग्रवाल अपने पैतृक व्यवसाय को बढ़ाने के लिए दिल्ली आ गए। शुरुआती दिनों में हालात आसान नहीं थे — दोनों भाई पुरानी दिल्ली यानी चांदनी चौक की तंग गलियों में बाल्टी उठाए घूम-घूम कर भुजिया और रसगुल्ला बेचा करते थे। न कोई दुकान थी, न कोई पहचान, सिर्फ मेहनत और स्वाद की शुद्धता पर भरोसा था।
दिल्लीवालों को उनका अनोखा स्वाद और शुद्धता इतनी पसंद आई कि उन्होंने प्यार से इन भाइयों को ‘बीकानेरवाला’ कहना शुरू कर दिया। यही उपनाम आगे चलकर इस परिवार का आधिकारिक ब्रांड नाम बन गया, और मेहनत के बल पर बाल्टी में बिकने वाला रसगुल्ला एक दिन देश-विदेश तक पहुंचने वाला ब्रांड बन गया।
पैकेज्ड फूड से लेकर 40 देशों तक का विस्तार
1988 के आसपास कंपनी ने ‘बीकानो’ (Bikano) ब्रांड के तहत पैकेज्ड स्नैक्स और मिठाइयों की शुरुआत की, जिसने आगे चलकर इस कारोबार को एक बड़े स्तर पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यह कदम बीकानेरवाला के स्थानीय दुकान से राष्ट्रीय और फिर वैश्विक ब्रांड बनने की यात्रा का एक बड़ा मोड़ माना जाता है।
आज बीकानेरवाला तीन पीढ़ियों की मेहनत से खड़ा हुआ एक बड़ा पारिवारिक कारोबार है। वर्तमान में श्याम सुंदर अग्रवाल बीकानेरवाला फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर कंपनी की कमान संभाल रहे हैं, जबकि तीसरी पीढ़ी के उद्यमी मनीष अग्रवाल निदेशक के रूप में ‘बीकानो’ और वैश्विक निर्यात कारोबार को नई दिशा दे रहे हैं। कंपनी के रोजमर्रा के संचालन और रणनीतिक विस्तार की जिम्मेदारी सीईओ सुरेश गोयल के पास है।
कंपनी के अनुसार, आज बीकानेरवाला भारत के अलावा अमेरिका, यूके, यूएई, कतर, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और नेपाल सहित दुनिया के 40 से अधिक देशों में मौजूद है। एक ऐसा ब्रांड जिसकी शुरुआत बाल्टी में सामान बेचने से हुई थी, वह आज ग्लोबल फूड इंडस्ट्री के बड़े नामों में शुमार हो चुका है।
त्योहार से पहले ग्राहकों के लिए क्या है सुझाव
त्योहारी सीजन में भीड़भाड़ से बचने के लिए कंपनी ने ऑनलाइन ऑर्डर और होम डिलीवरी की सुविधा को प्राथमिकता दी है, ताकि ग्राहक बिना किसी झंझट के अपने पसंदीदा उत्पाद घर बैठे मंगवा सकें। जो लोग परंपरागत स्वाद के साथ रक्षाबंधन मनाना चाहते हैं, उनके लिए घेवर और अन्य मिठाइयों की यह रेंज एक विकल्प बनकर सामने आई है।
त्योहार नजदीक आते ही ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते अपने ऑर्डर बुक कर लें, ताकि रक्षाबंधन के व्यस्त दिनों में डिलीवरी में देरी की स्थिति से बचा जा सके।
लेखक परिचय
लेखक: वरिष्ठ राजनीतिक संवाददाता
विशेषज्ञता: राजनीति, जनसरोकार, करंट अफेयर्स
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