संसद के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन बुधवार को भी सदन की कार्यवाही में बाधा बनी रही। विपक्षी सांसदों ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर हंगामा जारी रखा, जिससे सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बरकरार रहा।
इसी बीच महिला सदस्य के खिलाफ असंसदीय भाषा के इस्तेमाल को लेकर तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी को शेष मॉनसून सत्र के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव लोकसभा में पास हुआ। मंगलवार को नेता विपक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने के बाद यह मुद्दा और गरमा गया था।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में कहा कि उनकी मांग बिल्कुल साफ है और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा दे देना चाहिए।
कैसे हुआ कल्याण बनर्जी का निलंबन
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को लोकसभा चैंबर में तृणमूल कांग्रेस नेता कल्याण बनर्जी की अपनी पार्टी के कुछ पुराने साथियों और नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के सांसदों के साथ तीखी बहस हुई। इस बहस में एनसीपीआई की मिताली बाग, शताब्दी रॉय और काकोली घोष दस्तीदार शामिल थीं।
हालांकि यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह बहस किस वजह से हुई। विपक्षी सांसदों के कुछ सदस्यों ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को शांत करने की कोशिश की, जिसके बाद कल्याण बनर्जी सदन से चले गए। बाद में बाग, दस्तीदार और NCPI के कुछ अन्य सदस्य इस मुद्दे को उठाने के लिए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से उनके चैंबर में मिलने पहुंचे।
नीट पेपर लीक पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने
लोकसभा में कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने साफ किया कि विपक्ष की मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक सीमित है। इसके जवाब में संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार पिछले तीन दिनों से नीट पेपर लीक मामले पर चर्चा के लिए तैयार होने की पेशकश कर रही है, लेकिन यह चर्चा तय नियमों के तहत ही हो सकती है।
वेणुगोपाल ने आगे कहा कि विपक्ष तीन मांगों—नीट पेपर लीक पर चर्चा, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने—को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशीलता नहीं दिखा रही, हालांकि सरकार की ओर से इसका खंडन करते हुए चर्चा की तैयारी जताई गई है।
विपक्षी नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने पीएम आवास के बाहर हुए प्रदर्शन पर कहा कि छात्रों के विरोध का राजनीतिकरण करने से उनके खिलाफ हुई गलत कार्रवाई पर पर्दा पड़ जाएगा, और लाठीचार्ज से छात्र चुप नहीं होंगे। वहीं समाजवादी पार्टी सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि यह मुद्दा किसी एक पार्टी का नहीं बल्कि छात्रों और युवाओं का है।
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने भी छात्रों पर हुई कार्रवाई और पुलिस के रवैये को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि इसी वजह से सांसद काले कपड़े पहनकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं। अखिलेश यादव ने यह भी सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री बाहर बयान दे सकते हैं, तो सदन के भीतर बयान क्यों नहीं दे सकते।
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव का सरकार पर तीखा हमला
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि नीट के बाद मुंबई, राजस्थान और पंजाब में भी प्रश्नपत्र लीक होते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता को बोलने से रोका जा रहा है और विधायकों-सांसदों को खरीदने की कोशिश की जा रही है, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
पप्पू यादव ने यह भी कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी के साथ समझौता करने के बजाय अपने रुख पर अडिग रहना पसंद करेंगे। इस बयान पर सरकार या भाजपा की ओर से संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया अभी उपलब्ध नहीं हो सकी है।
लेखक परिचय
लेखक: वरिष्ठ राजनीतिक संवाददाता
विशेषज्ञता: राजनीति, जनसरोकार, करंट अफेयर्स
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