अपोलो हॉस्पिटल सरिता विहार के खिलाफ मरीज से जबरन वसूली का गंभीर मामला: साकेत कोर्ट के एपीपी ने दर्ज कराई शिकायत
नई दिल्ली, 04 फरवरी 2026 — दिल्ली में प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी और मरीजों से जबरन वसूली की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। अब इस लिस्ट में नाम जुड़ गया है अपोलो हॉस्पिटल सरिता विहार का। साकेत जिला न्...
केंद्रीय संपादकीय डेस्क • बुधवार, 1 अप्रैल 2026 | 02:33 PM
नई दिल्ली, 04 फरवरी 2026 — दिल्ली में प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी और मरीजों से जबरन वसूली की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। अब इस लिस्ट में नाम जुड़ गया है अपोलो हॉस्पिटल सरिता विहार का। साकेत जिला न्यायालय, नई दिल्ली में कार्यरत एडिशनल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर श्री अरुण कुमार सिंह ने अपोलो हॉस्पिटल सरिता विहार के खिलाफ गंभीर आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में अस्पताल के डॉक्टरों और प्रशासन पर संगठित रूप से अवैध वसूली, धोखाधड़ी और जानबूझकर मरीज को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता अरुण कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने मरीज सुबेदार सिंह को 7 मार्च 2026 को DGEHS योजना के अंतर्गत इमरजेंसी में अपोलो हॉस्पिटल सरिता विहार में भर्ती कराया था। भर्ती के तुरंत बाद मरीज को ICU में शिफ्ट कर दिया गया।
मुख्य आरोप क्या हैं?
अरुण कुमार सिंह की शिकायत के अनुसार:
- भर्ती के तुरंत बाद अस्पताल ने पैनल के अंतर्गत इलाज करने से इनकार कर दिया, ताकि अधिक बिल बनाकर पैसे वसूले जा सकें।
- जब परिजनों ने मरीज को डिस्चार्ज कर दूसरे पैनल अस्पताल में ले जाने की बात कही, तो डॉक्टरों और प्रशासन ने डर का माहौल बनाते हुए कहा कि मरीज डिस्चार्ज की स्थिति में नहीं है।
- बाद में अस्पताल ने फिर से पैनल पर इलाज का आश्वासन देकर मरीज को वहीं रोके रखा।
- 16 मार्च 2026 तक लगातार भ्रम की स्थिति बनाए रखी गई, जिसके बाद ही पैनल पर इलाज की सहमति दी गई।
ICU में अनावश्यक ठहराव का आरोप
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप यह है कि भर्ती के 2-3 दिनों के भीतर ही मरीज की स्थिति में सुधार हो गया था और डॉक्टरों ने ICU से प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट करने की सलाह दी थी। इसके बावजूद अस्पताल ने जानबूझकर मरीज को ICU में ही रोके रखा, ताकि अधिक बिल बनाया जा सके।
अनावश्यक रूप से ICU में लंबे समय तक रखने के कारण मरीज को गंभीर संक्रमण और ICU साइकोसिस हो गया, जिससे उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई। अब अस्पताल के डॉक्टर स्वयं कह रहे हैं कि उन्हें जानकारी नहीं है कि मरीज को ICU से क्यों नहीं शिफ्ट किया गया।
शिकायतकर्ता की मांग
अरुण कुमार सिंह ने इन कृत्यों को जानबूझकर किया गया आपराधिक कृत्य बताते हुए इसे हत्या के प्रयास, जबरन वसूली, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की श्रेणी में रखा है। उन्होंने थाना सरिता विहार, नई दिल्ली में FIR दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में अस्पताल के निदेशकों, डॉक्टरों, मेडिकल टीम और प्रशासनिक कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत के समर्थन में कॉल रिकॉर्डिंग, मेडिकल दस्तावेज और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई है। साथ ही मेडिकल रिकॉर्ड जब्त करने, स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित करने और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण?
यह मामला केवल एक अस्पताल के खिलाफ शिकायत नहीं है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा, चिकित्सा नैतिकता और निजी स्वास्थ्य संस्थानों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। दिल्ली में कई प्राइवेट अस्पतालों पर इसी तरह की शिकायतें पहले भी आ चुकी हैं।
शिकायतकर्ता अरुण कुमार सिंह ने कहा है कि वह इस मामले में सभी उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाएंगे, ताकि अस्पतालों की मनमानी पर लगाम लगाई जा सके और मरीजों को न्याय मिल सके।
मुख्य आरोपों की तालिका
| क्रमांक | आरोप | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | पैनल इलाज से इनकार | अधिक बिल बनाने के लिए |
| 2 | अनावश्यक ICU में ठहराव | बिल बढ़ाने के उद्देश्य से |
| 3 | जानबूझकर मेडिकल नुकसान | संक्रमण और ICU साइकोसिस |
| 4 | जबरन वसूली और धोखाधड़ी | आर्थिक लाभ के लिए |
| 5 | आपराधिक साजिश | मरीज के जीवन के साथ खिलवाड़ |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: शिकायत किसने दर्ज कराई है?
उत्तर: साकेत जिला न्यायालय में कार्यरत एडिशनल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर अरुण कुमार सिंह ने।
प्रश्न: मरीज को कब भर्ती किया गया था?
उत्तर: 7 मार्च 2026 को DGEHS योजना के तहत।
प्रश्न: अस्पताल पर क्या मुख्य आरोप हैं?
उत्तर: जबरन वसूली, अनावश्यक ICU में रखना, धोखाधड़ी और मरीज को जानबूझकर नुकसान पहुंचाना।
प्रश्न: शिकायत कहां दर्ज की गई है?
उत्तर: थाना सरिता विहार, नई दिल्ली में FIR दर्ज करने की मांग की गई है।
प्रश्न: आगे क्या होगा?
उत्तर: पुलिस जांच के बाद FIR दर्ज होने की संभावना है। स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित करने की भी मांग की गई है।
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