1 नवंबर से दिल्ली में क्या नया नियम लागू होगा? गाड़ी वालों के लिए जानना जरूरी
संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 | 04:35 PM
दिल्ली में सर्दियां शुरू होते ही प्रदूषण की चिंता बढ़ जाती है। इस बार सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। 1 नवंबर 2026 से दिल्ली में कुछ ऐसे नियम लागू होने जा रहे हैं जिनका सीधा असर दिल्ली आने जाने वाले लोगों, टैक्सी चालकों, ट्रांसपोर्टरों और दूसरे वाहन मालिकों पर पड़ सकता है।
सबसे बड़ा बदलाव पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को लेकर है।
सरकार का मकसद साफ है। सर्दियों में जब हवा की गति कम होती है और प्रदूषण वातावरण में जमा होने लगता है तब वाहनों से निकलने वाले धुएं को कम किया जाए। लेकिन आम लोगों के लिए सवाल है कि इन नियमों से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी कितनी बदलेगी।
1 नवंबर से पुराने commercial vehicles पर बड़ी सख्ती
1 नवंबर 2026 से दिल्ली में बाहर से आने वाले ऐसे commercial goods vehicles की entry पर रोक होगी जो BS6 emission standard को पूरा नहीं करते।
इसमें Light Goods Vehicles यानी LGV, Medium Goods Vehicles यानी MGV और Heavy Goods Vehicles यानी HGV शामिल हैं। इसके अलावा पुराने trucks पर भी इसका असर पड़ेगा।
BS4 और उससे नीचे के commercial vehicles को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
हालांकि CNG, LNG और electric vehicles को इस प्रतिबंध से राहत दी गई है। BS6 standard वाले diesel vehicles भी दिल्ली में प्रवेश कर सकेंगे। दिल्ली में registered buses के लिए भी अलग व्यवस्था है।
यानी अगर कोई पुराना commercial vehicle नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम या किसी दूसरे NCR इलाके से दिल्ली सामान लेकर आता है तो वाहन मालिक को अपने vehicle का emission standard पहले से check करना होगा।
नोएडा और गाजियाबाद वालों पर ज्यादा असर
इस नियम का असर सिर्फ दिल्ली के लोगों तक सीमित नहीं रहेगा।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे NCR शहरों से रोजाना बड़ी संख्या में लोग दिल्ली आते जाते हैं।
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 1 नवंबर से BS6 से नीचे के वाहनों पर लगने वाली पाबंदी से NCR में registered 10 लाख से ज्यादा vehicles प्रभावित हो सकते हैं।
इसका असर खासकर उन लोगों पर पड़ सकता है जो अपने पुराने commercial vehicles से दिल्ली में सामान पहुंचाते हैं।
अगर पुराना truck या goods vehicle दिल्ली में नहीं जा पाएगा तो transporter को दूसरा वाहन लगाना पड़ेगा। इससे माल पहुंचाने की लागत बढ़ सकती है।
आखिर में इसका असर सामान की कीमत पर भी देखने को मिल सकता है।
आम car owner को क्या करना होगा?
यहां एक बात समझना जरूरी है।
1 नवंबर से लागू होने वाली हर पाबंदी का मतलब यह नहीं है कि दिल्ली में हर पुरानी private car पर उसी दिन पूरी तरह रोक लग जाएगी।
वाहनों पर restrictions pollution level और GRAP stage के हिसाब से भी लागू होती हैं। Revised GRAP में BS3 petrol और BS4 diesel vehicles पर pollution बढ़ने के साथ ज्यादा सख्त restrictions का प्रावधान है।
इसलिए अगर आपके पास पुरानी petrol या diesel car है तो सिर्फ तारीख देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। आपको दिल्ली सरकार और CAQM की उस समय की GRAP स्थिति और अपने vehicle की category को जरूर check करना चाहिए।
PUC नहीं है तो पेट्रोल डीजल भी नहीं मिलेगा
1 नवंबर से लागू होने वाले winter action plan की सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है No PUC No Fuel।
इसका मतलब है कि अगर आपके वाहन के पास valid Pollution Under Control Certificate नहीं है तो fuel लेने में परेशानी हो सकती है।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़कों पर चलने वाले वाहनों के पास प्रदूषण जांच का valid certificate हो।
इसलिए अगर आपके वाहन का PUC खत्म होने वाला है तो उसे समय रहते renew करा लेना बेहतर रहेगा।
सिर्फ गाड़ियों पर ही नहीं होगी सख्ती
दिल्ली का winter pollution plan सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं है।
सरकार construction और demolition activities से निकलने वाली धूल को कम करने के लिए भी कदम उठाएगी। 1 नवंबर से dust generating construction activities पर restrictions शुरू होंगी और आगे pollution की स्थिति के हिसाब से और सख्ती की जा सकती है।
इसके अलावा traffic और commuting कम करने के लिए offices में work from home और staggered timings जैसे कदम भी plan का हिस्सा हैं।
सरकार का तर्क क्या है?
दिल्ली में हर साल अक्टूबर से फरवरी के बीच pollution बड़ी समस्या बन जाता है।
इस दौरान वाहनों के अलावा construction dust, पराली और मौसम से जुड़े कारण भी प्रदूषण को बढ़ाते हैं।
सरकार का मानना है कि अगर transport और construction जैसे sources पर पहले से नियंत्रण किया जाए तो सर्दियों में pollution को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
लेकिन सवाल यह है कि इसका बोझ आखिर किस पर पड़ेगा।
अगर transporter को पुराना truck दिल्ली में ले जाने की अनुमति नहीं मिलेगी तो उसे नया vehicle या दूसरा transport option इस्तेमाल करना पड़ेगा।
अगर transport cost बढ़ती है तो इसका असर धीरे धीरे सामान की कीमतों पर भी आ सकता है।
यानी प्रदूषण कम करने की कोशिश का असर आम आदमी की जेब तक पहुंच सकता है।
अब आम वाहन मालिक को क्या करना चाहिए?
अगर आप दिल्ली या NCR में वाहन चलाते हैं तो सबसे पहले अपने वाहन का emission standard check करें।
अगर आप commercial vehicle चलाते हैं तो खास तौर पर यह देखना जरूरी है कि आपका vehicle BS6 है या नहीं।
इसके साथ अपने वाहन का PUC certificate भी check करें।
अगर आप नोएडा या गाजियाबाद से दिल्ली रोजाना आते जाते हैं तो 1 नवंबर के बाद यात्रा से पहले उस दिन लागू vehicle restrictions और GRAP status की जानकारी जरूर देख लें।
क्योंकि pollution बढ़ने के साथ नियम और सख्त हो सकते हैं।
आखिर में सबसे बड़ा सवाल
सरकार के सामने चुनौती सिर्फ दिल्ली की हवा साफ करने की नहीं है।
उसे प्रदूषण कम करने के साथ यह भी देखना होगा कि दिल्ली NCR में रहने वाले लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और कारोबार पर इसका कितना असर पड़ता है।
पुराने वाहनों पर रोक लगाने से हवा साफ होती है तो यह अच्छी बात है।
लेकिन सवाल यह भी है कि छोटे transporter और पुराने vehicle मालिकों के लिए सरकार क्या विकल्प देगी।
क्योंकि एक तरफ साफ हवा जरूरी है और दूसरी तरफ लाखों लोगों की रोजी रोटी भी।
अब देखना यह होगा कि 1 नवंबर के बाद दिल्ली की हवा में कितना बदलाव आता है और इन सख्त नियमों का असर आम आदमी की जेब पर कितना पड़ता है।
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