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डिजिटल पुस्तकालय योजना पर उत्तर प्रदेश में खींचतान, मंत्री राजभर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कार्यदायी संस्था बदलने की सिफारिश की

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संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • सोमवार, 7 सितंबर 2026 | 04:52 AM

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डिजिटल पुस्तकालय योजना पर उत्तर प्रदेश में खींचतान, मंत्री राजभर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कार्यदायी संस्था बदलने की सिफारिश की
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उत्तर प्रदेश की महत्वकांक्षी डिजिटल पुस्तकालय योजना को लेकर राज्य सरकार और विभागीय अधिकारियों के बीच खींचतान चरम पर पहुंच गई है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने योजना के कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए दूसरे चरण का काम किसी सक्षम और दक्ष कार्यदायी संस्था को सौंपने की सिफारिश की है। इस संबंध में मंत्री ने विभाग से योजना से जुड़ी फाइल वापस मंगाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत पत्र भेजा है। इस घटनाक्रम से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और अब दूसरे चरण के भविष्य का फैसला मुख्यमंत्री के अंतिम निर्णय पर ही निर्भर करेगा।

राज्य में सुशासन और ग्रामीण विकास की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के बीच प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करना एक प्रमुख चुनौती बना हुआ है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुशासन पहल के तहत राज्य में विभिन्न विकास परियोजनाओं की समीक्षा की गई थी। इसके बावजूद, ग्रामीण क्षेत्रों में क्रियान्वित हो रही योजनाओं में पारदर्शिता को लेकर उठते सवाल सरकार की चिंता बढ़ा रहे हैं।

दूसरे चरण के 454 करोड़ के बजट पर सियासी और प्रशासनिक घमासान

उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण युवाओं और छात्रों को आधुनिक पठन-पाठन की सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डिजिटल पुस्तकालय योजना की शुरुआत की थी। योजना के दूसरे चरण के तहत प्रदेश की 11,350 ग्राम पंचायतों में 454 करोड़ रुपये की लागत से डिजिटल पुस्तकालय स्थापित किए जाने हैं। पूर्व में विभागीय अधिकारियों ने मंत्री की राय के विपरीत जाकर पहले चरण की तर्ज पर ही दूसरे चरण की फाइल तैयार कर अनुमोदन के लिए आगे बढ़ा दी थी, जिसे मुख्यमंत्री स्तर से स्वीकृति भी मिल चुकी थी।

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा फर्नीचर और पुस्तकों की खरीद की जानी थी, जबकि कंप्यूटर, प्रिंटर और टेलीविजन सेट की खरीद उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम्स कारपोरेशन (यूपीडेस्को) के माध्यम से की जानी तय हुई थी। हालांकि, पहले चरण में सामने आई कमियों और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद मंत्री राजभर ने इस प्रक्रिया पर कड़ा एतराज जताया। विभागीय खींचतान और राजनीतिक बहस के नए घटनाक्रमों के बीच मंत्री ने आगामी विधानसभा चुनावों से पूर्व काम को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराने का हवाला देते हुए फाइल को रोक दिया और पुनर्विचार के लिए मुख्यमंत्री के पास भेज दिया।

प्रथम चरण की प्रगति और यूपीडेस्को की भूमिका

गौरतलब है कि डिजिटल पुस्तकालय योजना के पहले चरण में भी 454 करोड़ रुपये की लागत से 11,350 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय स्थापित करने का कार्य जारी है। विभागीय अधिकारी पहले चरण के लक्ष्य को 30 सितंबर तक पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर कार्यरत हैं। अधिकारियों के दावे के अनुसार, प्रथम चरण की अधिकांश पंचायतों में पुस्तकों और फर्नीचर की आपूर्ति का कार्य लगभग अंतिम चरण में है।

उपकरणों की आपूर्ति और गुणवत्ता पर नजर

यूपीडेस्को द्वारा चयनित पंचायतों में कंप्यूटर प्रणाली, टेलीविजन और इंटरनेट उपकरणों की आपूर्ति शुरू कर दी गई है। हालांकि, जमीनी स्तर पर गुणवत्ता को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों ने मंत्री और शासन के उच्च अधिकारियों को सचेत कर दिया है। सरकार की मंशा है कि जनहित से जुड़ी किसी भी योजना में धन का दुरुपयोग न हो, जैसा कि अक्सर प्रशासनिक जवाबदेही और नीतिगत निर्णयों के दौरान देखने को मिलता है।

बारात घर योजना में गड़बड़ी की शिकायत और जांच की मांग

डिजिटल पुस्तकालय के अलावा पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 14वें वित्त आयोग के परफार्मेंस ग्रांट से स्वीकृत बारात घर निर्माण योजना पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वीकृत 32 बारात घरों के निर्माण में विभागीय अधिकारियों द्वारा बरती गई घोर लापरवाही की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

मंत्री के अनुसार, योजना को स्वीकृति मिले दो वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आज तक एक भी बारात घर का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। प्रत्येक बारात घर के निर्माण का बजट लगभग 3.30 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। दूसरी ओर, विभागीय अधिकारियों का पक्ष है कि उपयुक्त भूमि न मिल पाने के कारण काम में विलंब हुआ है। वर्तमान में केवल 25 बारात घरों के लिए जमीन चिह्नित हो सकी है, जिनमें से 23 पर निर्माण कार्य चल रहा है तथा 2 प्रस्ताव स्वीकृति की प्रक्रिया में हैं।

भविष्य की दिशा और प्रशासनिक पारदर्शिता का सवाल

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए डिजिटल पुस्तकालय योजना को एक गेम-चेंजर के रूप में देखा जा रहा है। जिस प्रकार से जन कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पात्र लाभार्थियों तक पहुँचाने के लिए पारदर्शी नीतियां अपनाई जा रही हैं, उसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश सरकार भी इस योजना में पारदर्शी व्यवस्था लागू करना चाहती है।

अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्णय पर टिकी हैं। यदि मुख्यमंत्री कार्यदायी संस्था बदलने की सिफारिश को स्वीकार करते हैं, तो दूसरे चरण की निविदा प्रक्रिया नए सिरे से शुरू होगी, जिससे परियोजनाओं में पारदर्शिता आने की उम्मीद है। हालांकि, इससे 11,350 ग्राम पंचायतों में पुस्तकालयों की स्थापना में कुछ समय का विलंब संभव है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टिकोण से यह कदम योजना की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को मजबूत करेगा।

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देश की पत्रिका डिजिटल संपादकीय टीम। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता।