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दिल्ली: यूट्यूबर की दादागिरी से एमसीडी बेबस, रेहड़ी हटाने गए कर्मचारियों से धक्का-मुक्की — मादीपुर में पुलिस चौकी तक पहुंचा मामला

दिल्ली के राजौरी गार्डेन वेस्ट जोन में 'दिल्ली क्राइम मोर्चा' नाम से काम करने वाले सोशल मीडिया यूट्यूबर्स पर एमसीडी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने के गंभीर आरोप लगे हैं। मादीपुर लाल क्वार्टर में अवैध रेहड़ियां हटाने गई एमसीडी टीम को इन यूट्यूबर्स ने रोका, इंस्पेक्टर से धक्का-मुक्की की और वीडियो वायरल करने की धमकी दी। सूत्रों के अनुसार रेहड़ी वालों में इन्हीं यूट्यूबर्स के सगे-संबंधी हैं। एमसीडी के FHI कर्मचारियों ने मादीपुर पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई है। यह मामला सोशल मीडिया की साख और प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

देश की पत्रिका टीम
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केंद्रीय संपादकीय डेस्क • शनिवार, 21 मार्च 2026 | 01:46 PM

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दिल्ली: यूट्यूबर की दादागिरी से एमसीडी बेबस, रेहड़ी हटाने गए कर्मचारियों से धक्का-मुक्की — मादीपुर में पुलिस चौकी तक पहुंचा मामला
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कैमरा हाथ में, रिश्तेदार रेहड़ी पर — और बीच में फंसे एमसीडी कर्मचारी

नई दिल्ली। सोशल मीडिया को 'चौथे स्तंभ' की ताकत देने वाले यूट्यूबर अगर उसी ताकत का इस्तेमाल अपने परिवार को बचाने और सरकारी काम में अड़ंगा डालने के लिए करने लगें — तो यह सिर्फ एक शिकायत नहीं, पूरे सोशल मीडिया जगत के लिए शर्म की बात है। कुछ ऐसा ही हो रहा है दिल्ली के राजौरी गार्डेन वेस्ट जोन में। और इस बार मामला सिर्फ सड़क पर अवैध रेहड़ी का नहीं है — बात पहुंच गई है मादीपुर पुलिस चौकी तक।

राजौरी गार्डेन की सड़कें, जनता की परेशानी

मादीपुर लाल क्वार्टर इलाके में फुटपाथ और पटरियों पर अवैध रेहड़ियां काफी समय से जमी हुई हैं। आम लोगों को चलने तक की जगह नहीं। शिकायतें होती रहीं, नतीजा कुछ नहीं निकला। आखिरकार इलाके के लोगों ने एमसीडी में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। एमसीडी वेस्ट जोन का हेल्थ स्टाफ कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंचा। लेकिन जो हुआ, वह किसी को उम्मीद नहीं थी।

'दिल्ली क्राइम मोर्चा' के नाम पर धमकी

जैसे ही एमसीडी कर्मचारियों ने रेहड़ियां हटाने की कोशिश की, वहां अचानक 'दिल्ली क्राइम मोर्चा' नाम से काम करने वाले कुछ सोशल मीडिया यूट्यूबर पहुंच गए। हाथ में कैमरा, मुंह पर दावे — और एमसीडी अधिकारियों के सामने सीधी रुकावट। एमसीडी कर्मचारियों का कहना है — "ये लोग रेहड़ी वालों की तरफ से बोल रहे थे, हमें काम नहीं करने दे रहे थे।" सूत्रों से पता चला है कि इन रेहड़ी वालों में कुछ लोग इन्हीं यूट्यूबर्स के सगे-संबंधी हैं। यानी 'पत्रकारिता' की आड़ में दरअसल अपने घर के लोगों को बचाने की कोशिश। बात यहीं नहीं रुकी।

इंस्पेक्टर से बदतमीजी, धमकी — 'वीडियो वायरल कर देंगे'

एमसीडी के इंस्पेक्टर के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की गई। और धमकी दी गई — "सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर वायरल कर देंगे।" यह वही हथियार है जिससे आज एक तबका प्रशासन को डराने की कोशिश कर रहा है। जो 'एक्सपोज़' करने का दावा करते हैं, वही अब 'एक्सपोज़र' को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात — कर्मचारियों को यह भी कहा गया कि "मीडिया के ऑफिस में एकांत में आकर मिलो।" क्या मतलब है इस 'एकांत मुलाकात' का — यह किसी को समझाने की जरूरत नहीं।

पूरी दिल्ली में फैला है यह 'खेल'

एमसीडी के कर्मचारियों का कहना है कि यह सिर्फ राजौरी गार्डेन की बात नहीं है। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में ये लोग इसी तरह काम में रुकावट डालते हैं। गलत तरीके से बनाए गए वीडियो, एकतरफा narrative — और उसके पीछे निजी स्वार्थ। एक FHI (Food Hygiene Inspector) कर्मचारी ने बताया — "हम ड्यूटी करने जाते हैं, लेकिन इन लोगों के डर से कई बार काम अधूरा छोड़ना पड़ता है। प्रशासन की छवि खराब हो रही है और जिम्मेदार वही लोग हैं जो खुद को 'मीडिया' कहते हैं।" आखिरकार वेस्ट जोन एमसीडी के FHI कर्मचारियों ने इस पूरे मामले की शिकायत मादीपुर पुलिस चौकी में दर्ज करा दी है।

सोशल मीडिया का भरोसा दांव पर

यूट्यूब और सोशल मीडिया ने आम आदमी को एक आवाज़ दी है — यह सच है। लेकिन जब वही आवाज़ निजी फायदे के लिए इस्तेमाल होने लगे, जब 'पत्रकार' का चोला पहनकर सरकारी कर्मचारियों को धमकाया जाए — तब सवाल उठता है कि आखिर इस पर कौन लगाम लगाएगा? जो लोग सच में जमीनी पत्रकारिता कर रहे हैं, उनकी साख इन हरकतों की वजह से हर दिन कम होती जा रही है। और जनता का भरोसा — जो इस पूरे ecosystem की नींव है — वह धीरे-धीरे दरकने लगा है। पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज हो गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है।
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देश की पत्रिका की आधिकारिक संपादकीय एवं रिपोर्टिंग टीम।