मोंगला पोर्ट पर चीन-बांग्लादेश समझौता: भारत के लिए क्यों है यह चिंता का विषय?
मोंगला पोर्ट की वह ज़मीन जो पहले भारत के लिए आरक्षित थी, अब चीन को मिल गई है। तीस्ता नदी परियोजना में भी चीन की एंट्री ने भारत की रणनीतिक चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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मोंगला पोर्ट की वह ज़मीन जो पहले भारत के लिए आरक्षित थी, अब चीन को मिल गई है। तीस्ता नदी परियोजना में भी चीन की एंट्री ने भारत की रणनीतिक चिंताएं बढ़ा दी हैं।
भारत ने 10 जून को ओमान तट पर भारतीय कमर्शियल जहाज पर हुए हमले के विरोध में अमेरिकी राजनयिक को डिमार्शे जारी किया। जानें इस राजनयिक कदम के मायने और आगे क्या हो सकता है।
मिडिल ईस्ट के अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट में भारत के गुजरात स्थित कांडला बंदरगाह की ओर जा रहे एक कार्गो शिप पर अनजान प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। रॉयल थाई नेवी और UKMTO ने हमले की पुष्टि की, जबकि किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली। ओमानी नेवी ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। भारत के विदेश मंत्रालय ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना बंद होना चाहिए। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया की 20 फीसदी तेल आपूर्ति होती है, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए भी अहम है। इन बढ़ते हमलों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो रहा है।
ईरान ने भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। ANI के सूत्रों के मुताबिक, तेहरान ने यह भरोसा दिलाया है कि भारतीय पोत बिना रुकावट इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से निकल सकते हैं। यह खबर ऐसे समय आई है जब ईरान-इजरायल तनाव चरम पर है और दुनिया के 20 फीसदी तेल की आपूर्ति इसी गलियारे से होती है। इसी बीच थाईलैंड के जहाज 'मयूरी नारी' पर हमले में 20 नाविक बचाए गए, तीन अभी भी लापता हैं। जहाज UAE से भारत के कंडला बंदरगाह की ओर जा रहा था।