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यूपी विधानसभा चुनाव 2027: सभी पार्टियां ठोंक रही ताल, दिग्गजों के बीच जुबानी जंग तेज

राम भुवन सिंह
राम भुवन सिंह

संपादकीय लेखक (Editorial Writer) • मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 | 08:13 PM

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यूपी विधानसभा चुनाव 2027: सभी पार्टियां ठोंक रही ताल, दिग्गजों के बीच जुबानी जंग तेज
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सपा-कांग्रेस गठबंधन में रस्साकशी और 'पीडीए' का फॉर्मूला

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव प्रदेश के विभिन्न जिलों का तूफानी दौरा कर रहे हैं। सपा का मुख्य ध्यान अपने पारंपरिक वोट बैंक को सहेजने के साथ-साथ 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग को एकजुट करने पर टिका है। अखिलेश यादव किसानों, बेरोजगार युवाओं और महंगाई के मुद्दों पर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

हालांकि, विपक्षी खेमे में सब कुछ सहज नहीं दिख रहा है। इंडिया गठबंधन के तहत सपा और कांग्रेस के बीच भावी सीट बंटवारे को लेकर खींचतान के संकेत मिलने लगे हैं। कांग्रेस जहां राज्य में अपनी खोई जमीन तलाशने के लिए अधिक सीटों की दावेदारी ठोंक रही है, वहीं सपा बड़े भाई की भूमिका में रहकर अपनी शर्तों पर चुनाव लड़ने की पक्षधर है। इसी बीच क्षेत्रीय स्तर पर भी राजनीतिक समीकरण बदलने लगे हैं, जैसा कि हाल के दिनों में प्रतापगढ़ की सियासत में हलचल और स्थानीय दिग्गजों के पाला बदलने की चर्चाओं से साफ दिखाई दे रहा है।

बसपा की हुंकार और ओवैसी की चुनौती से बिगड़ेगा समीकरण?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और सपा गठबंधन के बीच सीमित रहेगा, लेकिन बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने इस धारणा को खारिज कर दिया है। लखनऊ में आयोजित हालिया महारैली और नीले झंडों के विशाल जमावड़े के जरिए बसपा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उसे रेस से बाहर मानना विरोधियों की सबसे बड़ी भूल होगी। मायावती अपने कैडर वोट बैंक को नए सिरे से लामबंद करने में जुटी हैं।

मुस्लिम बहुल सीटों पर ओवैसी का सीधा मुकाबला

इस बहुकोणीय मुकाबले को और दिलचस्प बना रहे हैं असदुद्दीन ओवैसी। एआईएमआईएम ने राज्य के मुस्लिम बहुल इलाकों, विशेषकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल में आक्रामक रैलियां शुरू कर दी हैं। ओवैसी का सीधा निशाना सपा और कांग्रेस के वोट बैंक पर है। मुस्लिम मतदाताओं के बीच ओवैसी की सीधी सेंधमारी से विपक्षी गठबंधन के अंकगणित के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तीखा हो गया है।

भावी सियासी दिशा और धरातल की चुनौतियां

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राम भुवन सिंह के अनुसार, "उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा से बेहद संवेदनशील और परतदार रही है। 2027 का चुनाव केवल बयानों और वादों पर नहीं, बल्कि धरातल पर मजबूत प्रबंधन और सोशल इंजीनियरिंग के सटीक संतुलन से जीता जाएगा। एमएलसी चुनाव और स्थानीय निकाय उपचुनाव के नतीजे यह तय करेंगे कि जनता का झुकाव किस तरफ है।"

फिलहाल सभी राजनीतिक दलों ने चुनावी मोड में आकर अपनी बिसात बिछा दी है। आने वाले महीनों में नए गठबंधनों, सांगठनिक फेरबदल और आक्रामक प्रचार अभियानों के जरिए उत्तर प्रदेश का सियासी पारा और चढ़ना तय माना जा रहा है।

राम भुवन सिंह

देश की पत्रिका डिजिटल संपादकीय डेस्क। निष्पक्ष, सटीक और जनसरोकार की पत्रकारिता।