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Wednesday, 15 Jul 2026

यूपी: ग्राम प्रधानों पर संशय, जिला पंचायत अध्यक्ष बने प्रशासक, नहीं ले पाएंगे अहम फैसले

यूपी सरकार ने सभी 75 जिलों के निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त किया है, जो अधिकतम छह महीने तक सामान्य प्रशासनिक कार्य संभालेंगे. ग्राम प्रधानों की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी

 

उत्तर प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रशासक नियुक्त किए जाने का बड़ा फैसला राज्य सरकार ने लिया है. 11 जुलाई 2026 को जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले सरकार ने प्रदेश के सभी 75 जिलों के निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नामित करने का निर्णय किया है, जो नए चुनाव तक जिला पंचायतों के सामान्य प्रशासनिक कार्यों का संचालन करेंगे.

राज्य सरकार ने अधिनियम की धारा-20(3-क) के तहत 12 जुलाई 2026 से नई जिला पंचायतों के गठन तक, या अधिकतम छह महीने तक, निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त करने का फैसला लिया है. इसके लिए जिलाधिकारियों को अधिकृत किया गया है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब इलाहाबाद हाईकोर्ट में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के खिलाफ याचिका दाखिल है.

12 जुलाई 2026 से नई जिला पंचायतों के गठन तक या अधिकतम छह महीने तक, निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त करने के लिए जिलाधिकारियों को अधिकृत किया गया है.

क्यों जिला पंचायत अध्यक्ष बने प्रशासक, जानें पूरा प्रावधान

ज्ञापन में अधिनियम की धारा-20(3-क) का हवाला देते हुए बताया गया है कि यदि अपरिहार्य परिस्थितियों या लोकहित में कार्यकाल समाप्त होने से पहले नई जिला पंचायत का चुनाव कराना संभव न हो, तो राज्य सरकार प्रशासनिक समिति या प्रशासक नियुक्त कर सकती है. इसी प्रावधान के आधार पर सरकार ने सभी 75 जिलों में निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासक बनाने का रास्ता चुना है.

यह व्यवस्था अधिकतम छह महीने तक या नई जिला पंचायत के गठन तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगी. इससे प्रदेश में जिला पंचायत के कामकाज में किसी तरह की रुकावट नहीं आएगी और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक प्रशासनिक कामकाज सुचारु रूप से चलता रहेगा.

जिलाधिकारियों को मिला प्रशासक नामित करने का अधिकार

राज्य सरकार ने इस संबंध में जिलाधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट को अधिकृत किया है कि वे संबंधित निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक के रूप में नामित करें. यानी हर जिले में डीएम ही यह तय करेंगे कि निवर्तमान अध्यक्ष को प्रशासक पद की जिम्मेदारी सौंपी जाए.

हालांकि शासन ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासक के रूप में नियुक्त पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष केवल सामान्य और नियमित प्रशासनिक कार्यों का ही निर्वहन करेंगे. उन्हें किसी भी तरह के नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार नहीं होगा. अगर कोई अत्यावश्यक या विशेष परिस्थिति उत्पन्न होती है, तो उससे जुड़े नीति संबंधी प्रस्ताव जिलाधिकारी के माध्यम से शासन के पास अनुमोदन के लिए भेजे जाएंगे.

इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका, ग्राम प्रधानों को लेकर बना है विवाद

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब इलाहाबाद हाईकोर्ट में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के खिलाफ याचिका दाखिल की गई है. हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार से जवाब मांगा है, जिससे जिला पंचायत अध्यक्ष प्रशासक की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कानूनी पेच बना हुआ है. चूंकि मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए हाईकोर्ट का अंतिम रुख आने तक इस पर स्पष्ट स्थिति नहीं कही जा सकती.

कुल मिलाकर, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रशासक बनाए जाने के इस फैसले से जहां प्रशासनिक निरंतरता बनी रहेगी, वहीं ग्राम प्रधानों की दावेदारी और हाईकोर्ट में लंबित याचिका का नतीजा आने वाले दिनों में इस पूरी व्यवस्था की दिशा तय करेगा.

लेखक परिचय

लेखक: वरिष्ठ राजनीतिक संवाददाता

विशेषज्ञता: राजनीति, जनसरोकार, करंट अफेयर्स

संपादकीय नोट: यह लेख उपलब्ध स्रोतों, सार्वजनिक जानकारी और आधिकारिक बयानों के आधार पर तैयार किया गया है।