'मगरमच्छ कहे मैंने शिकार बंद कर दिया': योगी आदित्यनाथ का समाजवादी पार्टी पर तीखा प्रहार
संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 | 03:36 PM
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी पारा तेजी से चढ़ने लगा है। राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल के बीच जुबानी जंग बेहद तीखी हो गई है। हाल ही में आया योगी आदित्यनाथ समाजवादी पार्टी मगरमच्छ बयान उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में एक नया बवंडर पैदा कर चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दावों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि सपा द्वारा प्रदेश में अमन-चैन और सुरक्षा का वादा करना वैसा ही है जैसे कोई मगरमच्छ नदी के तट पर आकर यह दावा करे कि उसने शिकार करना छोड़ दिया है।
'मगरमच्छ के उपदेश' जैसा है सपा का सुरक्षा का वादा: सीएम योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने एक जनसंबोधन के दौरान समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला बोलते हुए उनकी कानून-व्यवस्था की नीति को कटघरे में खड़ा किया। सीएम योगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "समाजवादी पार्टी अगर आज यह उपदेश देती है कि उसकी सरकार आने पर प्रदेश में शांति मिलेगी, अमन-चैन होगा और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, तो यह पूरी तरह से हास्यास्पद और भ्रामक है।" उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह स्थिति ठीक वैसी ही है जैसे कोई मगरमच्छ नदी के तट पर बैठकर निर्दोष जीवों को उपदेश दे कि अब उसने शिकार करना बंद कर दिया है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के चुनावों को लेकर जिस प्रकार का माहौल बन रहा है, उसमें वेस्ट उत्तर प्रदेश में भाजपा के सामने 4 बड़ी चुनौतियाँ सामने आ रही हैं, वहीं मुख्यमंत्री अपने आक्रामक बयानों से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने में जुटे हैं। पिछले दिनों लखनऊ में चारपाई पर बैठकर मलिहाबादी आम का लुत्फ उठाते सीएम योगी और वरिष्ठ नेताओं का अंदाज सोशल मीडिया पर खूब चर्चित रहा था, जिसने विपक्षी खेमे में काफी बेचैनी बढ़ा दी थी।
"ये नौका पार कराने वाले नहीं, डुबाने वाले हैं": शिक्षा क्षेत्र पर प्रहार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के पुराने कार्यकाल का जिक्र करते हुए शिक्षा और युवाओं के भविष्य को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा की पूर्ववर्ती सरकारों में शिक्षा जगत को पूरी तरह से कलंकित किया गया था। सीएम योगी के अनुसार, "ये लोग समाज की नौका पार कराने वाले नहीं बल्कि उसे डुबाने वाले लोग हैं। इन्होंने प्रदेश की शिक्षा की नौका को डुबाने का काम किया है, शिक्षकों का निरंतर अपमान किया है और शिक्षा व्यवस्था की साख को बट्टा लगाया है। इन लोगों पर कतई विश्वास नहीं करना चाहिए।"
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण और समृद्धि का मूल आधार बताते हुए वादा किया कि वर्तमान सरकार शिक्षा के स्तर को ऊँचाइयों पर ले जाने तथा शिक्षकों के सम्मान की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस बीच, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा शीर्ष नेतृत्व द्वारा सांगठनिक मजबूती पर दिया जा रहा बल राज्य सरकार के हौसले को और अधिक बुलंद कर रहा है।
कांग्रेस पर भी बोला हमला: 'राजीव गांधी के समय 100 में से 15 रुपये पहुँचते थे'
समाजवादी पार्टी के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पार्टी को भी अपने निशाने पर लिया। किसानों और जनकल्याणकारी योजनाओं में होने वाले ऐतिहासिक भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए सीएम योगी ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी के पुराने बयान को याद दिलाया। सीएम योगी ने कहा, "याद करिये कि देश में बदलाव कैसे आया है। एक समय था जब कांग्रेस के शासनकाल में केंद्र से 100 रुपये भेजे जाते थे, तो जमीन पर पहुँचते-पूँछते घिसते-घिसते मात्र 15 रुपये रह जाते थे। स्वयं राजीव गांधी ने इस सच्चाई को स्वीकारा था।"
सीएम योगी ने आगे कहा कि "आखिर वह 85 रुपये कहाँ जाते थे? ये सभी कांग्रेसी और समाजवादी मिलकर रास्ते में ही जनता के पैसों को खा जाते थे, बीच में ही डकार जाते थे।" कांग्रेस के आंतरिक असंतोष और देश भर में उसकी स्थिति पर बात करते हुए विश्लेषक अक्सर कहते हैं कि राजस्थान कांग्रेस में अशोक गहलोत का बयान जैसी घटनाएँ दर्शाती हैं कि पुरानी पार्टी किस प्रकार आंतरिक संघर्षों और अतीत के भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रही है।
बिचौलिया प्रथा खत्म: अब सीधे किसानों के खाते में जाता है शत-प्रतिशत पैसा
अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए प्रशासनिक सुधारों और पारदर्शी व्यवस्था की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि आज भाजपा की डबल इंजन सरकार में कोई भी बिचौलिया या दलाल जनता के हक पर सेंधमारी नहीं कर सकता। सीएम योगी ने कहा, "आज जब प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री किसानों और गरीबों के लिए पैसा भेजते हैं, तो वह पूरा का पूरा पैसा सीधे अन्नदाता किसान के बैंक खाते में जमा होता है।"
उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सरकार की ओर से 25 हजार रुपये की सहायता दी जाती है, तो पूरे के पूरे 25 हजार रुपये बिना किसी कटौती के किसान के खाते में पहुँचते हैं। किसी भी बिचौलिए में अब इतनी हिम्मत नहीं है कि वह गरीब या किसान के हक में सेंध लगा सके। जहाँ एक तरफ सरकार अपनी पारदर्शी नीतियों का बखान कर रही है, वहीं दिल्ली में जंतर-मंतर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के विरोध प्रदर्शन भी जारी हैं। हालाँकि, सत्तारूढ़ दल इन विरोधों को खारिज करते हुए इन्हें विरोधी दलों के प्रायोजित एजेंडे का हिस्सा बताता है।
निष्कर्ष एवं राजनीतिक विश्लेषण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस हालिया आक्रामक रुख से स्पष्ट है कि सत्तारूढ़ भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अभी से पूरी तरह मुस्तैद हो चुकी है। समाजवादी पार्टी पर 'मगरमच्छ' वाले तंज से लेकर कांग्रेस के पुराने भ्रष्टाचार के इतिहास को कुरेदने तक, भाजपा उत्तर प्रदेश की जनता के सामने विपक्ष के पिछले रिकॉर्ड को प्रमुखता से रख रही है। पारदर्शी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT), कड़े कानून-व्यवस्था के दावों और विकास कार्यों के बल पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में भाजपा के जनाधार को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दे रहे हैं।
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