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Friday, 14 Aug 2026

पश्चिमी यूपी में हाई कोर्ट बेंच की मांग तेज, 22 जिलों में हड़ताल

मेरठ, 5 अगस्त 2025: महाराष्ट्र के कोल्हापुर में बॉम्बे हाई कोर्ट की पांचवीं बेंच की घोषणा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आग लगा दी है। 22 जिलों के वकीलों ने इस अन्याय के खिलाफ हड़ताल और प्रदर्शन किए, मांग की कि पश्चिमी यूपी में भी हाई कोर्ट बेंच बने। मेरठ में सड़कें जाम हुईं, कोर्ट का काम ठप रहा, और वकील सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की कोशिश में हैं।

महाराष्ट्र को 5, यूपी को 1 बेंच क्यों?

मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने सवाल उठाया, “12 करोड़ की आबादी वाले महाराष्ट्र के पास अब 5 हाई कोर्ट बेंच हैं, जबकि 22 करोड़ की आबादी वाला यूपी सिर्फ एक बेंच पर अटका है।” पश्चिमी यूपी से इलाहाबाद हाई कोर्ट के 54% केस आते हैं, फिर भी यहां बेंच नहीं। वकील राजेंद्र राणा ने कहा, “कोल्हापुर की बेंच सिर्फ 6 जिलों के लिए है, जबकि यूपी का केस लोड कहीं ज्यादा है।”

लंबी यात्रा, समय और पैसे की बर्बादी

पश्चिमी यूपी के लोग इलाहाबाद हाई कोर्ट तक 700 किमी की यात्रा करने को मजबूर हैं। दिल्ली, शिमला, चंडीगढ़, नैनीताल और जयपुर के हाई कोर्ट इससे कहीं नजदीक हैं। मेरठ के अमित पाठक ने बताया, “मेरे परिवार को 50 साल से केस के लिए इलाहाबाद जाना पड़ता है। एक सुनवाई के लिए 3 दिन और 11-12 घंटे सड़क पर लगते हैं।” यह दूरी छोटे मामलों में भी भारी पड़ती है।

1955 से चली आ रही मांग

पश्चिमी यूपी में हाई कोर्ट बेंच की मांग 1955 से शुरू हुई। 1985 में जसवंत सिंह आयोग ने भी मेरठ में बेंच की सिफारिश की थी, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में यह अधूरी रही। वरिष्ठ वकील केके पाहवा ने कहा, “हम दशकों से लड़ रहे हैं। केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार है, फिर देरी क्यों?” वकीलों ने मेरठ में कमीश्नरी क्रॉसिंग जाम कर कोर्ट बंद करवाया।

सीएम से मुलाकात की कोशिश

सहारनपुर और मेरठ के वकीलों ने सीएम योगी से मिलने का समय मांगा है। हापुड़, बागपत, रामपुर जैसे जिलों में भी प्रदर्शन हुए। वकीलों का कहना है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट पर बोझ कम करने के लिए पश्चिमी यूपी में बेंच जरूरी है। यह मांग अब जन आंदोलन बनती जा रही है, और लोग सरकार से जल्द फैसले की उम्मीद कर रहे हैं।

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