राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा कि वे पार्टी से कभी खुद के लिए कोई पद नहीं मांगेंगे, चाहे हाईकमान जो भी फैसला करे, उन्हें मंजूर होगा. इस Ashok Gehlot Statement को राजस्थान कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, और इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं.
संक्षेप में: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि वे पार्टी से कोई पद नहीं मांगेंगे और हाईकमान का हर फैसला उन्हें मंजूर है. उन्होंने खुद को देश का सबसे संतुष्ट राजनीतिज्ञ बताया. यह Ashok Gehlot Statement राजस्थान कांग्रेस में मौजूदा सियासी हलचल के बीच आया है.
क्या है Ashok Gehlot Statement, जिसके निकाले जा रहे अलग-अलग मायने
अशोक गहलोत ने कहा कि अब उनका यह फर्ज बनता है कि वे अपने लिए किसी पद की मांग न करें. पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगी — चाहे वह जोधपुर की हो, जालौर की हो, पूरे राजस्थान की हो, या दिल्ली में संगठन के किसी पद की — वे उसे सहर्ष स्वीकार करेंगे.
“पार्टी मुझे जो भी जिम्मेदारी देगी, चाहे वह जोधपुर की हो, जालौर की हो, पूरे राजस्थान की हो, या दिल्ली में संगठन के किसी पद की हो, मैं उसे सहर्ष स्वीकार करूंगा, लेकिन पार्टी से कभी खुद से कोई पद नहीं मांगूंगा. हाईकमान जो भी फैसला करेगा, मुझे मंजूर है. मैं देश का सबसे संतुष्ट राजनीतिज्ञ हूं.”
उन्होंने आगे यह भी कहा कि जब उन्हें पार्टी से बिना मांगे सब कुछ मिला है और वे इंदिरा गांधी के समय ही केंद्रीय मंत्री बन गए थे, तो अब उन्हें किसी पद की लालसा रखने की जरूरत नहीं है. राजस्थान की सियासत में अशोक गहलोत को अक्सर “जादूगर” कहा जाता है, और उनके हर बयान के राजनीतिक हलकों में अलग मायने निकाले जाते रहे हैं. इस बयान को भी भविष्य की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि इसका सटीक अर्थ क्या है, यह आने वाला वक्त ही बताएगा.
‘मैं थांसू दूर नहीं’ – गहलोत का राजस्थान की जनता से जुड़ाव वाला बयान
अशोक गहलोत ने अपने बयान में राजस्थान की जनता से अपने भावनात्मक जुड़ाव का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी यह कहा है और आज फिर दोहराते हैं कि ‘मैं थांसू दूर नहीं’ यानी वे जनता से कभी दूर नहीं हैं.
“अब मैं चाहे लंदन जाऊं, दिल्ली जाऊं, जयपुर रहूं, जोधपुर जाऊं या जालौर जाऊं, मैं राजस्थान की जनता से कभी दूर नहीं हो सकता. मैं कहीं भी रहूं, राजस्थान वासियों की सेवा करना ही मेरा परम कर्तव्य और धर्म है.”
गहलोत ने यह भी याद दिलाया कि राजस्थान की जनता ने उन्हें पांच बार सांसद, छह बार विधायक और तीन-तीन बार मुख्यमंत्री बनाया, साथ ही केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी भी दी. उनके अनुसार तीन बार मुख्यमंत्री बनना कोई छोटी बात नहीं होती, और इसी संदर्भ में उन्होंने राजस्थान की जनता के प्रति अपना आभार और लगाव व्यक्त किया.
सोनिया गांधी और राहुल गांधी की तारीफ, Ashok Gehlot Statement में क्या बोले पूर्व सीएम
अपने बयान में अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी की भी प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने उन पर भरोसा जताकर न सिर्फ उन्हें तीन बार मुख्यमंत्री बनाया, बल्कि हर बार पूरे पांच-पांच साल काम करने का मौका दिया.
“सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने मुझ पर भरोसा जताकर न सिर्फ मुझे तीन बार मुख्यमंत्री बनाया, बल्कि हर बार पूरे पांच-पांच साल तक काम करने का अवसर दिया. पूरे हिंदुस्तान के राजनीतिक इतिहास में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है, जहां अक्सर मुख्यमंत्री बदलते रहते हैं. मुझे इस पार्टी और जनता से सब कुछ मिला है.”
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| मुख्यमंत्री कार्यकाल | तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री |
| सांसद के रूप में | पांच बार सांसद |
| विधायक के रूप में | छह बार विधायक |
| केंद्रीय मंत्री | इंदिरा गांधी सरकार के समय से जिम्मेदारी |
राजनीतिक गलियारों में इस बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है. कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आलाकमान के प्रति वफादारी जताने की कोशिश है, जबकि कुछ इसे आने वाले संगठनात्मक बदलावों के संकेत के तौर पर भी देख रहे हैं. इस पर समाजवादी पार्टी या किसी अन्य दल की औपचारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, क्योंकि यह बयान सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी राजनीति से जुड़ा है.
राजस्थान कांग्रेस में पिछले कुछ समय से अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खींचतान की खबरें सामने आती रही हैं. इसी पृष्ठभूमि में आया यह नया Ashok Gehlot Statement पार्टी के भीतर सत्ता संतुलन को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है. आगे की राजनीतिक तस्वीर क्या रूप लेगी, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा.
लेखक परिचय
लेखक: वरिष्ठ राजनीतिक संवाददाता
विशेषज्ञता: राजनीति, जनसरोकार, करंट अफेयर्स
संपादकीय नोट: यह लेख उपलब्ध स्रोतों, सार्वजनिक जानकारी और आधिकारिक बयानों के आधार पर तैयार किया गया है।
