दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता के 'रावण को राम' वाले बयान पर मचा घमासान, AAP और कांग्रेस ने बोला तीखा हमला
संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 | 10:32 AM
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता रावण को राम वाले अपने एक हालिया बयान के कारण गंभीर राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गई हैं। आजादपुर में आयोजित एक रामलीला कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके इस भाषण का वीडियो सामने आने के बाद राजधानी का सियासी पारा चढ़ गया है। विपक्षी दलों ने इसे सनातन धर्म और भगवान का अपमान करार देते हुए मुख्यमंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग की है। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब धार्मिक आयोजनों और भाषणों को लेकर जनता के बीच संवेदनशीलता काफी अधिक रहती है।
विवादित बयान और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आजादपुर के केवल पार्क में आयोजित रामलीला में शिरकत की थी। इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने कथित तौर पर कहा कि समाज को साफ-सुथरा बनाने के लिए 'हर एक राम को मारना होगा।' उनके इस भाषण का वीडियो आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो सामने आने के बाद से ही राजनीतिक हलकों में भूचाल आ गया है। इस संदर्भ में दिल्ली: 'इन्हें किसी की परवाह नहीं, पूरे सिस्टम को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं', विपक्ष पर भड़कीं सीएम रेखा के तहत मुख्यमंत्री के अन्य बयानों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की भी चर्चा तेज हो गई है।
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का तीखा हमला
आम आदमी पार्टी ने इस बयान को बेहद आपत्तिजनक और शर्मनाक बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि आज हर सनातनी और राम भक्त इस तरह के बयानों से आहत महसूस कर रहा है। वहीं, कांग्रेस पार्टी ने भी इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लिया। कांग्रेस नेु तंज कसते हुए कहा कि जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामराज्य को नुकसान पहुंचाया है, वहीं अब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सीधे तौर पर बयानों के जरिए मर्यादाओं को लांघ रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब दिल्ली: सीएम रेखा गुप्ता की बढ़ीं मुश्किलें, हनुमान जी पर टिप्पणी मामले में कोर्ट ने मांगी पुलिस रिपोर्ट जैसी अन्य कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियां भी उनके सामने पहले से मौजूद हैं।
मुख्यमंत्री के बयानों से जुड़े पूर्व विवाद
यह पहला मौका नहीं है जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के किसी भाषण या संबोधन को लेकर विवाद की स्थिति बनी हो। इससे पहले भी विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर उनके द्वारा दिए गए कुछ बयानों पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए थे। विधानसभा सत्र के दौरान भगत सिंह से जुड़े एक प्रसंग में ब्रिटिश सरकार की जगह कांग्रेस सरकार शब्द का उच्चारण करने पर भी काफी हंगामा हुआ था। इसके अलावा वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI को ‘AIQ’ बोल देने और नेताजी सुभाष चंद्र यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के संदर्भ में नाम लेने में हुई चूक को लेकर भी सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना हुई थी। हालांकि, ऐसे मामलों में बाद में स्पष्टीकरण भी सामने आते रहे हैं, लेकिन विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका मिल जाता है।
निष्कर्ष एवं आगामी राजनीतिक परिदृश्य
फिलहाल इस पूरे प्रकरण पर भारतीय जनता पार्टी या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विपक्षी दलों के तेवर को देखकर यह साफ है कि यह मामला इतनी आसानी से शांत होने वाला नहीं है। आगामी चुनावों और राजनीतिक बैठकों में विपक्षी दल इस बयान को एक बड़ा हथियार बनाकर पेश कर सकते हैं। जनता और धार्मिक संगठनों की निगाहें भी इस बात पर टिकी हैं कि इस विवाद के अंत में शासन और प्रशासन की तरफ से क्या आधिकारिक रुख अपनाया जाता है।
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