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दिल्ली में लागू हुआ विंटर एक्शन प्लान: 1 नवंबर से गैर-BS6 गाड़ियों पर लगा बैन, जानिए नए कड़े नियम

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संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 | 12:26 PM

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लाइव कवरेज दिल्ली में लागू हुआ विंटर एक्शन प्लान: 1 नवंबर से गैर-BS6 गाड़ियों पर लगा बैन, जानिए नए कड़े नियम
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही जहरीली हवा और धुंध की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने व्यापक नीति तैयार की है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि वायु गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से राजधानी में दिल्ली विंटर एक्शन प्लान को पूर्ण रूप से लागू किया जा रहा है। इस योजना के तहत 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत उन सभी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी जो BS-VI (BS-6) एमिशन मानक से नीचे के हैं। प्रशासनिक स्तर पर यह फैसला राजधानी की आबो-हवा को खतरनाक स्तर तक गिरने से रोकने के लिए लिया गया है। राजनीतिक गलियारों में जारी गहमा-गहमी के बीच, जहां हाल ही में विपक्ष पर भड़कीं सीएम रेखा ने नीतिगत फैसलों में पारदर्शिता का दावा किया था, वहीं इस फैसले को दिल्ली वासियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

वाहन प्रदूषण पर शिकंजा: गैर-BS6 गाड़ियों की एंट्री बैन और 'नो PUCC, नो फ्यूल'

राजधानी में वाहन जनित उत्सर्जन को नियंत्रित करना इस बार के विंटर एक्शन प्लान का मुख्य आधार है। मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि बाहरी राज्यों से आने वाले पुराने डीजल व पेट्रोल वाहनों की सख्त जांच होगी। 1 नवंबर से 31 जनवरी के बीच केवल वही वाहन दिल्ली की सीमा में प्रवेश कर पाएंगे जो BS-VI मानकों के अनुरूप हैं। इसके अलावा, दिल्ली सरकार ने पेट्रोल पंपों के लिए 'वैलिड PUCC नहीं तो fuel नहीं' का कठोर नियम लागू करने की घोषणा की है।

इसका तात्पर्य यह है कि यदि आपके वाहन का प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUCC) समयसीमा पार कर चुका है या अमान्य है, तो दिल्ली के किसी भी पेट्रोल पंप पर आपको पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा। इसके लिए सभी पेट्रोल पंप संचालकों को डिजिटल जांच उपकरण प्रणाली से लैस किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस सख्ती से वाहन चालक समय पर अपने वाहनों की ट्यूनिंग और जांच कराने के लिए बाध्य होंगे।

कंस्ट्रक्शन और धूल प्रदूषण पर AI कैमरों की पैनी नजर

सर्दियों के दौरान हवा में तैरते धूल के कण (PM 10 और PM 2.5) प्रदूषण के स्तर को और गंभीर बना देते हैं। इस समस्या के निदान हेतु पूरे विंटर एक्शन प्लान के दौरान, यानी 1 नवंबर से 28 फरवरी तक, निर्माण और तोड़फोड़ (Construction & Demolition) गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध प्रभावी रहेंगे। धूल उत्सर्जन को रोकने के लिए निर्माण सामग्री के परिवहन और रख-रखाव पर कड़े नियम तय किए गए हैं।

धूल नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन रोकने के लिए इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली जा रही है। राजधानी के प्रमुख निर्माण स्थलों पर उच्च तकनीक वाले AI कैमरे लगाए जाएंगे, जो सीधे दिल्ली सरकार के केंद्रीय कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से जुड़े होंगे। यदि किसी निर्माण स्थल पर एंटी-स्मॉग गन नहीं चलाई जाती है या सामग्री को खुला छोड़ा जाता है, तो AI सिस्टम स्वतः ही चेतावनी जारी कर देगा और संबंधित एजेंसी पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। आर्थिक गतिविधियों को बाधित किए बिना नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रयासरत है, ठीक उसी तरह जैसे व्यवसायियों की सहूलियत के लिए उद्योग मित्र पोर्टल की शुरुआत की गई थी।

वर्क फ्रॉम होम और ऑफिस टाइमिंग्स में बदलाव

सड़क पर गाड़ियों का दबाव कम करने और ट्रैफिक जाम के कारण होने वाले धुएं को नियंत्रित करने के लिए सरकारी व निजी दफ्तरों के लिए विशेष गाइडलाइंस जारी की जा रही हैं। सरकार ने घोषणा की है कि प्रदूषण के चरम दौर में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके साथ ही, विभिन्न सरकारी विभागों और निजी संस्थानों के ऑफिस समय में अंतर (Staggered Office Timings) रखा जाएगा ताकि सुबह और शाम के समय एक साथ सड़कों पर ट्रैफिक का जमावड़ा न हो।

सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार इलेक्ट्रिक बसों के फेरों में बढ़ोतरी करेगी और दिल्ली मेट्रो के दैनिक ट्रिप्स की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही लास्ट-मील कनेक्टिविटी में सुधार और कारपूलिंग को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि लोग निजी वाहनों का कम से कम इस्तेमाल करें।

कैसे बनवाएं अपनी गाड़ी का PUCC प्रमाणपत्र? जानिए चरणबद्ध प्रक्रिया

यदि आप दिल्ली में बिना किसी बाधा के वाहन चलाना चाहते हैं, तो समय पर PUCC बनवा लेना अनिवार्य है। इसके लिए आपको निम्नलिखित आसान प्रक्रिया अपनानी होगी:

1. नजदीकी जांच केंद्र का चयन करें

अपनी गाड़ी लेकर नजदीकी ऑथराइज्ड पॉल्यूशन चेकिंग सेंटर पर जाएं। यह केंद्र आमतौर पर सभी प्रमुख पेट्रोल पंपों और अधिकृत ऑटोमोबाइल वर्कशॉप्स पर उपलब्ध होते हैं।

2. साइलेंसर द्वारा धुएं की जांच

जांच ऑपरेटर गाड़ी के साइलेंसर में एक सेंसर पाइप लगाएगा। इसके बाद वाहन के इंजन को चालू करके और एक्सीलेटर देकर उत्सर्जित धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड व अन्य गैसों का स्तर मापा जाएगा।

3. शुल्क भुगतान और डिजिटल रसीद

जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्धारित शुल्क का भुगतान करें। दोपहिया वाहनों के लिए यह शुल्क लगभग 60 रुपये है, जबकि पेट्रोल/डीजल कारों और भारी वाहनों के लिए यह 100 रुपये से 300 रुपये तक होता है।

4. प्रमाण पत्र प्राप्त करना

जांच सफल होने पर आपको एक क्यूआर कोड (QR Code) युक्त प्रिंटेड PUCC सर्टिफिकेट दे दिया जाएगा। इस सर्टिफिकेट की डिजिटल प्रति को आप परिवहन मंत्रालय की वेबसाइट या एम-परिवहन ऐप से भी सीधे डाउनलोड कर सकते हैं।

नागरिक जिम्मेदारी और प्रशासनिक रोडमैप

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्लीवासियों से अपील की है कि प्रदूषण के विरुद्ध इस लड़ाई में सरकार का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों के अनुभवों के आधार पर इस बार रणनीतियों को अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाया गया है। पूर्व में धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों, जैसे कि विजयादशमी के अवसर पर दिए भाषण में भी मुख्यमंत्री ने सामूहिक भागीदारी और नागरिक कर्तव्यों पर बल दिया था।

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