एक बेटा अपने बीमार पिता के पास रहना चाहता था। बस इतनी सी बात थी। और इसी एक फैसले ने उसकी पूरी दुनिया उजाड़ दी।
गुरुग्राम के Chartered Accountant Sanjay Gupta (नाम परिवर्तित) अपने पिता की ICU में भर्ती होने की खबर सुनकर परिवार समेत दिल्ली पहुंचे। पास रहने की ख्वाहिश में उन्होंने Paharganj इलाके के Hotel Hilton Guest House में कमरा बुक कराया — अस्पताल से चंद किलोमीटर की दूरी पर। यह होटल उनके लिए सुविधाजनक था, सस्ता था और पास था। लेकिन उन्हें क्या पता था कि यही रात उनकी आखिरी रात बन जाएगी।
जब सुबह की रोशनी धुएं में बदल गई
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27 मई 2025 की उस रात Paharganj के उस होटल में आग लगी। तेज़ी से फैलती लपटों ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। संकरी गलियां, पुरानी बिल्डिंग, emergency exit का न होना — सब कुछ मिलाकर एक बड़ी त्रासदी बन गई। अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और कई लोग घायल हैं।
गुरुग्राम से आए CA और उनका परिवार भी इसी आग की चपेट में आ गए। जो परिवार एक बीमार बुज़ुर्ग के पास होना चाहता था, वो खुद एक अस्पताल की दौड़ बन गया।
Paharganj — जहाँ हर गली में एक होटल है, लेकिन safety कहीं नहीं
Paharganj दिल्ली का वो इलाका है जहाँ budget hotels की भरमार है। देश-विदेश से आने वाले tourists यहाँ टिकते हैं क्योंकि New Delhi Railway Station बिल्कुल पास है। लेकिन इन होटलों की हकीकत क्या है?
Fire NOC नहीं, sprinkler system नहीं, fire exits बंद या नदारद — यह सब आम बात है। दिल्ली Fire Department बार-बार इन इलाकों पर कार्रवाई की बात करता है, लेकिन जब भी कोई हादसा होता है तो वही पुरानी कहानी सामने आती है।
स्थानीय एक दुकानदार ने बताया — “यहाँ के होटलों में fire safety का कोई नाम नहीं है। पुरानी लकड़ी की सीढ़ियां, बंद गलियारे… बस पैसे बचाने के चक्कर में लोग इनमें रुकते हैं।”
रात के अंधेरे में भागते लोग
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग रात को तेज़ी से फैली। लोग चीखते हुए बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। कुछ लोगों ने खिड़कियों से कूदकर जान बचाई। दमकल की गाड़ियां पहुंचीं लेकिन संकरी गलियों में उन्हें भी रास्ता बनाने में वक्त लगा।
जो बच गए वो बताते हैं कि धुआं इतना घना था कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। जो कमरे अंदर की तरफ थे, उन लोगों के लिए निकलना और भी मुश्किल था।
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8 मौतें। कई परिवार। और एक सवाल — क्या यह पहली बार हुआ है?
नहीं, यह पहली बार नहीं है
Arpit Palace Hotel fire — 2019। Karol Bagh। 17 मौतें। उसके बाद दिल्ली में बड़े-बड़े बयान आए, जांच कमेटियां बनीं, नोटिस भेजे गए। कुछ महीने बाद सब ठंडा पड़ गया।
उसके बाद भी दिल्ली-NCR में छोटे-बड़े होटल fires की खबरें आती रही हैं। हर बार एक pattern — पहले आग, फिर मौतें, फिर जांच का वादा, फिर भूल जाना।
इस बार गुरुग्राम के CA का परिवार उस system का शिकार बना जो सालों से टूटा पड़ा है।
अस्पताल में पिता, होटल में आग — एक परिवार का दर्द
जो बात इस हादसे को और दर्दनाक बनाती है वो यह है कि यह परिवार किसी घूमने-फिरने नहीं आया था। कोई vacation नहीं था। एक बेटे का दिल था जो अपने बीमार पिता के करीब रहना चाहता था।
ICU में जिंदगी और मौत से लड़ता बाप। और उसके बच्चे अब किस हाल में हैं — यह सोचकर भी रूह कांपती है।
दिल्ली पुलिस और Fire Department ने जांच शुरू कर दी है। होटल मालिक की तलाश है। एक और FIR दर्ज होगी। एक और जांच कमेटी बनेगी।
लेकिन जो गए, वो नहीं लौटेंगे। और जो बचे हैं, उनके ज़ख्म शायद कभी नहीं भरेंगे।
