उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले की हर्रैया विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव से पहले ही सियासी माहौल गरमाने लगा है। भाजपा विधायक अजय सिंह और हाल ही में भाजपा में शामिल हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री राजकिशोर सिंह के बीच टिकट को लेकर खींचतान लगातार तेज होती जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाल के हर्रैया दौरे ने इस टकराव को और हवा दे दी है। सीएम ने मंच से ₹504 करोड़ की विकास परियोजनाओं का जिक्र करते हुए विधायक अजय सिंह की तारीफ की, जबकि राजकिशोर सिंह इस कार्यक्रम से नदारद रहे।
सीएम योगी के दौरे के बाद पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि विधायक अजय सिंह ने हर्रैया को बदनाम किया है।
सीएम के दौरे ने कैसे बढ़ाई टकराव की आंच
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हर्रैया दौरे के दौरान विधायक अजय सिंह की सार्वजनिक सराहना को स्थानीय राजनीतिक हलकों में टिकट रेस में उनकी मजबूत स्थिति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इसी बीच पूर्व मंत्री राजकिशोर सिंह का इस कार्यक्रम से दूर रहना भी चर्चा का विषय बन गया।
राजकिशोर सिंह के करीबी सूत्रों के अनुसार, वे इस दौरे के बाद और आक्रामक रुख अपना सकते हैं। हालांकि इस पर राजकिशोर सिंह की तरफ से कोई औपचारिक बयान अभी उपलब्ध नहीं है।
दोनों नेताओं का अलग-अलग राजनीतिक सफर
राजकिशोर सिंह हर्रैया सीट से करीब 15 साल तक विधायक और मंत्री रह चुके हैं। वे पहले समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी से जुड़े रहे, और 2024 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। पार्टी में उनके प्रवेश में सांसद हरीश द्विवेदी की अहम भूमिका मानी जाती है, और अब वे उसी संपर्क के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश में हैं।
दूसरी ओर अजय सिंह लगातार दो चुनावों, 2017 और 2022 में हर्रैया से भाजपा विधायक चुने गए हैं। राजकिशोर सिंह के पार्टी में आने के बावजूद हर्रैया के सियासी समीकरण अब तक शांत नहीं हुए हैं, और दोनों नेताओं के समर्थक 2027 के लिए अपने-अपने दावे मजबूत करने में जुटे हैं।
2022 चुनाव की कड़वाहट अब भी बरकरार
2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान राजकिशोर सिंह और अजय सिंह के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प की खबरें सामने आई थीं, जिसमें दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच लाठी-डंडे चलने की बात भी सामने आई। उस दौर की व्यक्तिगत और जमीनी कड़वाहट आज भी दोनों नेताओं के बयानों में झलकती है।
राजकिशोर सिंह के हालिया तीखे बयान से यह भी संकेत मिलता है कि वे 2027 के चुनाव में हर्रैया सीट को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं, बल्कि सीधे मुकाबले के लिए तैयार दिख रहे हैं।
आगे क्या होगा हर्रैया की सियासत का रुख
भाजपा के भीतर दो कद्दावर नेताओं के बीच बने इस टकराव को पार्टी आलाकमान के लिए एक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। टिकट की अंतिम घोषणा के समय यह अंतर्विरोध और तीखा रूप ले सकता है, जिससे संगठन के भीतर सामंजस्य बिठाना आसान नहीं होगा।
फिलहाल दोनों खेमे अपनी-अपनी दावेदारी को मजबूत करने में जुटे हैं, और यह देखना बाकी है कि 2027 के करीब आते-आते हर्रैया की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
लेखक परिचय
लेखक: वरिष्ठ राजनीतिक संवाददाता
विशेषज्ञता: राजनीति, जनसरोकार, करंट अफेयर्स
संपादकीय नोट: यह लेख उपलब्ध स्रोतों, सार्वजनिक जानकारी और आधिकारिक बयानों के आधार पर तैयार किया गया है।
