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मोंथा चक्रवात: पूर्वांचल के किसानों पर प्रकृति का प्रहार, जौनपुर समेत कई जिलों में फसलें बर्बाद

आपके द्वारा साझा की गई खबर जौनपुर जिले के हिसामपुर, डोभी और केराकत क्षेत्रों में मोंथा चक्रवात के असर को बखूबी बयां करती है। यह वाकई दिल दहला देने वाली स्थिति है, जहां किसानों की साल भर की मेहनत एक र...

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केंद्रीय संपादकीय डेस्क • शनिवार, 1 नवंबर 2025 | 05:52 AM

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मोंथा चक्रवात: पूर्वांचल के किसानों पर प्रकृति का प्रहार, जौनपुर समेत कई जिलों में फसलें बर्बाद
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आपके द्वारा साझा की गई खबर जौनपुर जिले के हिसामपुर, डोभी और केराकत क्षेत्रों में मोंथा चक्रवात के असर को बखूबी बयां करती है। यह वाकई दिल दहला देने वाली स्थिति है, जहां किसानों की साल भर की मेहनत एक रात में धुल गई। 31 अक्टूबर 2025 को हुई 4 एमएम की बेमौसम वर्षा और 20-30 किमी/घंटा की तेज हवाओं ने धान-गन्ने की खड़ी फसलें गिरा दीं, कटी फसलें सड़ा दीं। जौनपुर जैसे धान उत्पादक क्षेत्र में 30-40% नुकसान का अनुमान है, जो किसानों को कर्ज के जाल में और गहरा धकेल रहा है। आइए, इस घटना के व्यापक प्रभाव, सरकारी राहत और भविष्य की सलाह पर थोड़ा विस्तार से चर्चा करें।

चक्रवात मोंथा का सफर और उत्तर प्रदेश पर असर

मोंथा चक्रवात बंगाल की खाड़ी से 28-29 अक्टूबर 2025 को आंध्र प्रदेश के नरसापुर तट पर लैंडफॉल कर चुका था। शुरुआत में गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में यह 90-110 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाओं के साथ आया, जिसने आंध्र प्रदेश में 87,000 हेक्टेयर से अधिक फसलों को तबाह कर दिया। 6 लेकिन कमजोर होते हुए भी इसका अवशेष उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश तक पहुंचा, जहां 30-31 अक्टूबर को हल्की लेकिन लगातार वर्षा (2-5 एमएम) हुई। जौनपुर में ठीक 4 एमएम दर्ज हुई, जो पकी हुई धान की बालियों के लिए घातक साबित हुई। 14

उत्तर प्रदेश में प्रभावित जिलों की सूची लंबी है: जौनपुर के अलावा बस्ती, मिर्जापुर, सोनभद्र, चित्रकूट, महराजगंज, वाराणसी, आजमगढ़, गोरखपुर और भदोही। 14 बस्ती में धान-गन्ना पूरी तरह बर्बाद हो गईं, जबकि मिर्जापुर में 13% फसल नुकसान का आकलन है। 8 0 सोनभद्र के चतरा ब्लॉक में खेत जलमग्न हो गए, और महराजगंज में खड़ी फसलें जड़ से उखड़ गईं। 16 18 विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसी बेमौसम वर्षा से 20-50% तक उपज में कमी आ सकती है, जो किसानों की आय को 30-40% तक प्रभावित करेगी।

X (पूर्व ट्विटर) पर भी किसानों की चिंता साफ झलक रही है। मिर्जापुर से एक वीडियो में दिखाया गया कि कैसे धान की फसलें मिट्टी में लिपट गईं, और किसान मुआवजे की गुहार लगा रहे हैं। 4 बिहार के मुंगेर और झारखंड के देवघर-दुमका में भी समान कहानियां हैं, जहां किसान संगठन सीएम से तत्काल सर्वे की मांग कर रहे हैं। 17 3

आर्थिक संकट: छोटे किसान सबसे ज्यादा प्रभावित

जैसा कि खबर में उल्लेख है, जौनपुर के किसान जैसे हर्षवर्धन सिंह (9 एकड़ धान प्रभावित) या सुनील सिंह समेत कई परिवारों की कमाई धुल गई। प्रति एकड़ 50-60 हजार रुपये का खर्च (बीज, खाद, मजदूरी) डूब गया, और बाजार मूल्य भी घटेगा। महिलाएं व छोटे जोत वाले किसान सबसे ज्यादा चपते में हैं, क्योंकि उनके पास वैकल्पिक आय नहीं। ऊपर से जलभराव से मच्छर-बीमारियां बढ़ रही हैं। झांसी में तो किसानों ने तहसील पर धरना दे दिया, मुआवजे के लिए ज्ञापन सौंपा। 22

यह केवल जौनपुर तक सीमित नहीं—पूरे पूर्वांचल में मानसून की अनियमितता (जून-जुलाई में कम बारिश) के बाद यह कटाई का झटका है। जलवायु परिवर्तन की यह चेतावनी साफ है: बेमौसम घटनाएं बढ़ रही हैं।

सरकारी राहत: बीमा और हेल्पलाइन का सहारा

अच्छी बात यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने फसल बीमा योजना को मजबूत किया है। यदि बीमा लिया है, तो धान के लिए प्रति हेक्टेयर 91,300 रुपये तक मुआवजा मिल सकता है (प्रीमियम सिर्फ 1,826 रुपये)। 33% से अधिक नुकसान पर सहायता सुनिश्चित है। मिर्जापुर-महराजगंज में पहले ही हजारों किसानों को भुगतान हो चुका। 14

मदद कैसे लें?

  • हेल्पलाइन: 1077 पर कॉल करें या ई-कृषि पोर्टल (krishi.up.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें।
  • सर्वे: जिला कृषि विभाग सक्रिय है; फोटो/वीडियो के साथ आवेदन करें।
  • अन्य: पीएम फसल बीमा योजना के तहत PMFBY ऐप डाउनलोड करें।

यदि जागरूकता की कमी है, तो स्थानीय पंचायत या कृषि केंद्र से संपर्क करें। X पर कई पोस्ट में किसान इसी मदद की अपील कर रहे हैं। 2

भविष्य के लिए सलाह: हिम्मत न हारें, सतर्क रहें

किसान भाइयों, जैसा कि खबर में कहा गया—फसल गई, हिम्मत नहीं। विशेषज्ञ सुझाव:

  • जलरोधक किस्में: धान की हाइब्रिड वैरायटी (जैसे पूसा-44) बोएं, जो बाढ़ सहन कर लें।
  • विविधीकरण: सब्जी, दलहन के साथ मिश्रित खेती अपनाएं।
  • तकनीक: ड्रोन से नुकसान आकलन कराएं; मौसम ऐप (IMD Meghdoot) फॉलो करें।
  • सरकारी योजनाएं: बीमा अनिवार्य करें; जौनपुर जैसे क्षेत्रों में बीमा कैंप की मांग करें।

सरकार और किसानों को मिलकर काम करना होगा, वरना पूर्वांचल का 'अन्न भंडार' खतरे में पड़ जाएगा। यदि आपके पास कोई व्यक्तिगत अनुभव या अतिरिक्त जानकारी है, तो साझा करें—मैं और विस्तार से मदद कर सकता हूं। हार न मानें, अगली फसल मजबूत आएगी!

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देश की पत्रिका की आधिकारिक संपादकीय एवं रिपोर्टिंग टीम।