केरल में मानसून के साथ ही लेप्टोस्पायरोसिस यानी ‘रैट फीवर’ का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है। डायरेक्टरेट ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DHS) के आंकड़ों के अनुसार, 29 जुलाई 2026 तक राज्य में 1,352 कन्फर्म मामले और 58 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं।
यह बीमारी खेत, बगीचे या घर के बाहर रोजमर्रा का काम करने वालों के लिए खासतौर पर खतरनाक साबित हो रही है। सरकारी डेथ ऑडिट के मुताबिक यह राज्य में संक्रमण से होने वाली मौतों की एक बड़ी वजह बनकर उभरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लेप्टोस्पायरोसिस से होने वाली वास्तविक मौतों की संख्या सरकारी आंकड़ों से अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मामलों में बीमारी की सही पहचान समय पर नहीं हो पाती।
2025 के डेथ ऑडिट में क्या सामने आया

अस्पतालों के रिकॉर्ड पर आधारित डेथ ऑडिट के मुताबिक, 2025 में लेप्टोस्पायरोसिस से हुई 390 मौतों में सबसे बड़ी संख्या शारीरिक मेहनत करने वाले मजदूरों की थी। इस वर्ग की 37 फीसदी यानी 47 मौतें हुईं।
इसके अलावा कृषि मजदूरों की करीब 11 फीसदी (14 मौतें) और घरेलू काम करने वाली महिलाओं की करीब 10 फीसदी (13 मौतें) हिस्सेदारी रही। आंकड़ों के अनुसार 40 से 69 साल की उम्र के लोग इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।
पांच साल में मौतों का आंकड़ा चार गुना से ज्यादा बढ़ा
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2016-20 के दौरान लेप्टोस्पायरोसिस से 319 मौतें दर्ज हुई थीं। 2021-25 की अवधि में यह संख्या बढ़कर 1,455 हो गई। इसी दौरान बीमारी की मृत्यु दर भी करीब 4.2 फीसदी से बढ़कर 6 फीसदी तक पहुंच गई।
केरल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (K-CDC) के निदेशक और तिरुवनंतपुरम गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रोफेसर डॉ. अल्थाफ ए के अनुसार, राज्य में संक्रामक बीमारियों से होने वाली कुल मौतों में लेप्टोस्पायरोसिस की हिस्सेदारी 52 फीसदी तक है और इस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।
क्या है लेप्टोस्पायरोसिस और यह कैसे फैलता है
लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरियल संक्रमण है जो Leptospira नाम के बैक्टीरिया से होता है। संक्रमित चूहे और अन्य जानवर इसके महत्वपूर्ण वाहक माने जाते हैं। भारी बारिश और बाढ़ के दौरान इनका पेशाब पानी और मिट्टी को दूषित कर सकता है।
बैक्टीरिया शरीर में मुख्य रूप से कट या खुले घाव, कटी-फटी त्वचा, आंख, नाक और मुंह के रास्ते प्रवेश करता है। इसी वजह से खेतों, बगीचों, नालियों, सीवर या बाढ़ प्रभावित इलाकों में काम करने वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है।
लक्षण और बचाव के तरीके
शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिख सकते हैं — तेज बुखार, सिरदर्द, पिंडलियों में तेज दर्द, ठंड लगना, कमजोरी, मतली और आंखों का लाल होना। गंभीर मामलों में यह किडनी-लिवर को नुकसान, पीलिया और सांस लेने में परेशानी तक पैदा कर सकता है।
- बाढ़ के पानी और दूषित मिट्टी से अनावश्यक संपर्क से बचें
- पानी में उतरना जरूरी हो तो गमबूट और दस्ताने पहनें
- घाव को अच्छी तरह ढककर रखें और चूहों की मौजूदगी नियंत्रित करें
- काम के बाद शरीर को अच्छी तरह साफ करें
- बुखार के साथ दूषित पानी/मिट्टी के संपर्क का इतिहास हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें
स्वास्थ्य विभाग जोखिम वाले लोगों में डॉक्सीसाइक्लिन के इस्तेमाल पर विशेष जोर दे रहा है, लेकिन किसी भी एंटीबायोटिक का सेवन बिना स्वास्थ्यकर्मी की सलाह के नहीं किया जाना चाहिए।
