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Thursday, 06 Aug 2026

यूपी में मदरसा कामिल फाजिल डिग्री पर लगी रोक, योगी कैबिनेट ने संशोधन को दी मंजूरी

बस्ती सदर विधानसभा सीट पर आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। भाजपा महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष डॉ. रोली सिंह की संभावित दावेदारी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

मदरसा कामिल फाजिल डिग्री पर योगी कैबिनेट का फैसला

 

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मदरसों से मिलने वाली उच्च शिक्षा की डिग्रियों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक में मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम 2004 में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के बाद अब प्रदेश के मदरसों से कामिल और फाजिल डिग्री जारी नहीं की जा सकेंगी।

यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए किया गया है, जिसमें कोर्ट ने इन दोनों डिग्रियों को असंवैधानिक करार दिया था। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इस संशोधन को उत्तर प्रदेश विधानसभा में पास कराया जाएगा, जिसके बाद यह कानूनी रूप से प्रभावी हो जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर योगी सरकार ने मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम 2004 में संशोधन को मंजूरी दी, जिसके बाद कामिल और फाजिल डिग्रियों पर रोक लगा दी गई है।

क्यों लिया गया मदरसा कामिल फाजिल डिग्री बंद करने का फैसला

दरअसल साल 2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसा बोर्ड को संवैधानिक करार दिया था, जिसके बाद इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने मदरसा बोर्ड की संवैधानिकता को तो बरकरार रखा, लेकिन साफ निर्देश दिए कि मदरसों से उच्च शिक्षा की डिग्री नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कामिल और फाजिल डिग्री को यूजीसी से मान्यता प्राप्त नहीं है, इसलिए इन्हें असंवैधानिक करार दिया गया। इसी आदेश के अनुपालन में योगी सरकार ने अब मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम में संशोधन का रास्ता चुना है।

अब मदरसों में सिर्फ आलिम स्तर तक ही मिलेगी शिक्षा

संशोधन लागू होने के बाद अब उत्तर प्रदेश के मदरसे सिर्फ 12वीं यानी आलिम स्तर तक की शिक्षा दे सकेंगे। इससे पहले मदरसों में प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की डिग्रियां दी जाती थीं, जिनमें कामिल डिग्री स्नातक और फाजिल डिग्री परास्नातक के समकक्ष मानी जाती थी।

अब इन डिग्रियों के बंद होने के बाद मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए यूजीसी से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या कॉलेज में दाखिला लेना अनिवार्य होगा। इससे छात्रों की डिग्री देशभर में मान्य होगी और उन्हें नौकरी या आगे की पढ़ाई में दिक्कत नहीं आएगी।

अब आगे क्या, विधानसभा से पास होने के बाद क्या बदलेगा

कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह संशोधन अब उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश किया जाएगा। वहां से पास होने के बाद मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम 2004 में यह बदलाव कानूनी रूप से लागू हो जाएगा और कामिल-फाजिल डिग्रियां पूरी तरह से बंद मानी जाएंगी।

विधानसभा से पास होने के बाद इन डिग्रियों के आधार पर मिलने वाली मान्यता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। यानी इन डिग्रियों के जरिए न तो छात्र आगे की पढ़ाई कर सकेंगे और न ही किसी सरकारी या निजी नौकरी के लिए आवेदन कर पाएंगे, जिससे उन्हें वैकल्पिक शैक्षणिक संस्थानों का रुख करना होगा।

लेखक परिचय

लेखक: राजेश शर्मा, वरिष्ठ राजनीतिक संवाददाता

विशेषज्ञता: उत्तर प्रदेश राजनीति एवं शिक्षा नीति विश्लेषण

संपादकीय नोट: यह लेख उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों और सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।