🔥 ट्रेंडिंग न्यूज़:
राघव चड्ढा ने थामा BJP का दामन — AAP छोड़ने के बाद बड़ा सियासी U-Turnयोगी सरकार का बड़ा तोहफा: नोएडा में न्यूनतम मजदूरी 21% बढ़ी, लाखों मजदूरों को सीधा फायदायोगी आदित्यनाथ का बड़ा ऐलान: यूपी में अब हर गरीब को मिलेगा पक्का मकान, 25 लाख घरों का टारगेटबंगाल में योगी का दांव: क्या BJP की ‘हिंदुत्व लहर’ ममता के गढ़ को तोड़ पाएगी?महिला आरक्षण बिल लोकसभा में गिरा — मोदी सरकार की 12 साल में पहली बड़ी संवैधानिक हारसफाई कर्मचारियों को ‘स्वच्छता प्रहरी’ का दर्जा — मानव अधिकार आयोग ने किया सम्मानितयोगी आदित्यनाथ: UP में बुलडोज़र से बजट तक — एक मुख्यमंत्री जो हमेशा सुर्खियों में रहता हैजौनपुर के गांव की बेटी ने CBSE 10वीं में मारी बाज़ी, BDR Public School के बच्चों ने रचा इतिहास
Sunday, 26 Apr 2026

पंकज सिंह बोले — मोदी का नेतृत्व नए भारत की नींव, 8,930 दिनों की जनसेवा का रिकॉर्ड

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और विधायक पंकज सिंह ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनका दूरदर्शी नेतृत्व ‘नए भारत’ के निर्माण का मजबूत आधार बन रहा है। उन्होंने बताया कि PM मोदी ने 8,930 दिनों की जनसेवा का रिकॉर्ड बनाया है। वंदे भारत ट्रेन, भारतमाला परियोजना, स्टार्टअप इकोसिस्टम और $728.49 अरब के विदेशी मुद्रा भंडार जैसी उपलब्धियों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विकसित राष्ट्र की दिशा में बढ़ रहा है।

8,930 दिन। यह कोई छोटी संख्या नहीं है।

जब भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और विधायक पंकज सिंह ने यह आंकड़ा सामने रखा, तो बात सिर्फ एक नेता की सेवा के दिनों की नहीं थी — बात थी उस सफर की, जिसमें एक देश ने खुद को बदलते हुए देखा है।

नई दिल्ली में दिए अपने बयान में पंकज सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी का दूरदर्शी नेतृत्व ‘नए भारत’ के निर्माण का मजबूत आधार बन रहा है — जो वैश्विक मंच पर देश को एक नई पहचान दे रहा है।”

रिकॉर्ड तोड़ जनसेवा — लेकिन असली सवाल यह है

पंकज सिंह के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने 8,930 दिनों का रिकॉर्ड पार करते हुए सबसे लंबे समय तक जनसेवा करने का इतिहास रचा है। यह आंकड़ा गुजरात के मुख्यमंत्री पद से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक की पूरी यात्रा को समेटता है।

विधायक का कहना है कि यह नेतृत्व तीन चीजों पर टिका है — निर्णायकता, पारदर्शिता और जन-केंद्रित सोच। “देश पूरे विश्वास के साथ एक आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है,” उन्होंने जोर देकर कहा।

जमीन पर बदलाव — वंदे भारत से लेकर स्टार्टअप तक

बातें सिर्फ भाषणों तक नहीं रहीं। पंकज सिंह ने कुछ ठोस उदाहरण भी गिनाए।

वंदे भारत ट्रेन, अटल टनल और भारतमाला परियोजना — इन तीनों ने मिलकर देश के infrastructure की तस्वीर बदली है। दूर-दराज के इलाके अब connectivity के मामले में पिछड़े नहीं रहे। बाराबंकी से बहराइच तक का 4-लेन राजमार्ग इसी सोच का हिस्सा है — क्षेत्रीय विकास को national agenda पर लाना।

Digital India की बात करें तो भारत अब AI यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। Global Bioeconomy में भी देश ने एक powerhouse के रूप में अपनी जगह बनाई है — यह कुछ साल पहले तक कल्पना से परे लगता था।

स्टार्टअप ecosystem की बात करें तो भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप hub बन चुका है। और विदेशी मुद्रा भंडार? वह $728.49 अरब के स्तर को छू चुका है।

‘विकसित भारत’ — सिर्फ नारा या हकीकत?

यह सवाल स्वाभाविक है।

जब कोई नेता किसी दूसरे नेता की इतनी तारीफ करे, तो राजनीतिक रंग दिखना लाजिमी है। पंकज सिंह भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं — यह context जरूरी है।

लेकिन जो आंकड़े सामने आए हैं, वे पूरी तरह नकारे नहीं जा सकते। Infrastructure spending में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है। जनकल्याणकारी योजनाओं — चाहे उज्ज्वला हो, जनधन हो या आयुष्मान भारत — ने करोड़ों लोगों की जिंदगी को directly छुआ है।

पंकज सिंह ने कहा कि “सुशासन, पारदर्शिता और निर्णायक नीति-निर्माण के जरिए भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बनाई है।” यह दावा बड़ा है — और इसकी कसौटी वक्त के साथ और स्पष्ट होती जाएगी।

उत्तर प्रदेश का कनेक्शन

खास बात यह है कि पंकज सिंह सिर्फ राष्ट्रीय तस्वीर नहीं खींच रहे थे। उन्होंने specifically बाराबंकी-बहराइच राजमार्ग का जिक्र किया — यानी UP के लिए केंद्र की योजनाओं को भी इस बयान में जगह दी गई।

यह संकेत है कि भाजपा अपनी जमीनी उपलब्धियों को अब स्थानीय स्तर पर connect करने की कोशिश कर रही है। सिर्फ दिल्ली की बात नहीं — गांव, कस्बे और जिले तक पहुंचने वाली बात।

देश के कोने-कोने में विकास, विश्वास और जनभागीदारी की जो नई ऊर्जा दिखने की बात पंकज सिंह करते हैं — उसकी सच्चाई तो वहां के लोग ही बेहतर जानते हैं। लेकिन इतना तय है कि ‘नया भारत’ बनाने की इस कहानी में अभी कई अध्याय और लिखे जाने बाकी हैं।