दिल्ली के पुलिस थानों में तैनात महिला पुलिसकर्मियों को मासिक धर्म के दौरान जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि राजधानी के अधिकांश थानों में न सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन है, न इस्तेमाल पैड नष्ट करने के लिए इंसिनरेटर और न ही महिलाओं के लिए पर्याप्त साफ शौचालय की व्यवस्था।
यह याचिका जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन की महिला प्रकोष्ठ प्रतिनिधि मुस्कान सिंह बांकुरा की ओर से एडवोकेट सत्याम सिंह राजपूत ने दायर की है। इसमें जुलाई-अगस्त 2025 के दौरान आरटीआई के जरिए दिल्ली पुलिस के सभी 18 जिलों और यूनिटों से जुटाई गई जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं के लिए अलग बजट तक तय नहीं है।
याचिका में यह मांग संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों के आधार पर उठाई गई है।
गरिमा, स्वास्थ्य और निजता के अधिकार का सवाल
याचिका में कहा गया है कि महिला पुलिसकर्मियों से कठिन हालात में लगातार ड्यूटी कराई जाती है, लेकिन उन्हें पीरियड्स के दौरान बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार यह स्थिति महिलाकर्मियों के स्वास्थ्य, सम्मान और सुरक्षित कार्यस्थल के अधिकार से जुड़ा मसला है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि साफ शौचालय और पैड डिस्पोज़ल की सुविधा न होने से ड्यूटी के दौरान महिला पुलिसकर्मियों को व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने में परेशानी होती है। इसे निजता के अधिकार के उल्लंघन के रूप में पेश किया गया है।
दूसरे राज्यों की पुलिस के मॉडल का हवाला
याचिका में मुंबई पुलिस के स्मार्ट मैत्रीण प्रोजेक्ट, सीआरपीएफ और लद्दाख पुलिस में उपलब्ध सुविधाओं का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि दिल्ली पुलिस में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। इसके साथ ही गृह मंत्रालय की एक एडवाइजरी का भी जिक्र किया गया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि जब अन्य राज्यों और केंद्रीय बलों में ऐसी सुविधाएं संभव हैं, तो राजधानी दिल्ली के पुलिस थानों में इनकी कमी होना चिंताजनक है। इस संबंध में दिल्ली पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी उपलब्ध नहीं हो सकी है।
हाईकोर्ट से क्या मांग की गई
याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट से मांग की गई है कि शहर के सभी पुलिस थानों और इकाइयों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन और पैड नष्ट करने के लिए इंसिनरेटर लगाए जाएं। साथ ही इनके रखरखाव के लिए अलग बजट तय करने का भी अनुरोध किया गया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि महिलाओं के लिए साफ और अलग शौचालय उपलब्ध कराए जाएं तथा पूरे दिल्ली पुलिस तंत्र में इस संबंध में एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने के निर्देश दिए जाएं।
मामले की मौजूदा स्थिति
याचिका फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट में विचाराधीन है और इस पर अंतिम फैसला आना बाकी है। अदालत की ओर से इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि यदि हाईकोर्ट निर्देश जारी करता है, तो इससे दिल्ली पुलिस में तैनात हजारों महिला कर्मियों को सीधा लाभ मिल सकता है। दिल्ली पुलिस या गृह मंत्रालय की ओर से इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है।
लेखक परिचय
लेखक: रजनीश शर्मा, वरिष्ठ राजनीतिक संवाददाता
विशेषज्ञता: राष्ट्रीय राजनीति, नीति और सरकारी मामलों की रिपोर्टिंग में एक दशक से अधिक का अनुभव
संपादकीय नोट: यह लेख उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों और सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।
