आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को ई-20 फ्यूल नीति के विरोध में प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करने का प्रयास किया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने फिरोजशाह रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद केजरीवाल ने मौके पर मौजूद मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार पर तीखे आरोप लगाए।
केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार इथेनॉल मिश्रित ईंधन (E-20) को बढ़ावा देने का फैसला स्वतंत्र रूप से नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में ले रही है। उन्होंने दावा किया कि इस नीति से भारतीय किसानों के बजाय अमेरिका को अधिक लाभ होगा और बड़ी संख्या में लोग इसका विरोध कर रहे हैं।
“सरकार को किसी भी बाहरी दबाव में नहीं आना चाहिए। लोगों को शुद्ध पेट्रोल उपलब्ध कराना उसकी जिम्मेदारी है। यह फैसला ट्रंप के दबाव में नहीं होना चाहिए।” – अरविंद केजरीवाल
नीति का फैसला शीर्ष स्तर पर लिया गया है : केजरीवाल
मीडिया से बातचीत में केजरीवाल ने कहा कि ई-20 फ्यूल नीति जैसा फैसला किसी एक केंद्रीय मंत्री के स्तर पर नहीं लिया जा सकता। उनके मुताबिक यह प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिमंडल का निर्णय है, इसलिए इसकी पूरी जिम्मेदारी भी शीर्ष नेतृत्व की है।
उन्होंने दोहराया कि सरकार को ऐसी किसी भी नीति को लागू करने से पहले देशहित को प्राथमिकता देनी चाहिए और यदि लोगों के बीच इस फैसले को लेकर चिंता है तो उस पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
अनुराग ढांडा ने भी सरकार पर साधा निशाना
मार्च के दौरान आम आदमी पार्टी के नेता अनुराग ढांडा ने भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ई-20 नीति को लेकर देशभर में लोगों के बीच असंतोष है। उनका दावा है कि यदि इस नीति को इसी तरह लागू किया गया तो करोड़ों वाहन प्रभावित हो सकते हैं।
ढांडा ने आरोप लगाया कि अमेरिका में बचा हुआ इथेनॉल भारत में खपाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज करने के बजाय उनसे संवाद करना चाहिए।
पुलिस ने रोका मार्च, आगे की रणनीति पर नजर
दिल्ली पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण अरविंद केजरीवाल और उनके समर्थक प्रधानमंत्री आवास तक नहीं पहुंच सके। इसके बाद प्रदर्शन वहीं समाप्त हो गया। पार्टी की ओर से फिलहाल अगले चरण के आंदोलन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन नेताओं के बयान यह संकेत देते हैं कि इस मुद्दे को आगे भी उठाया जाएगा।
वहीं, इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में ई-20 फ्यूल नीति को लेकर जारी राजनीतिक विवाद आने वाले दिनों में किस दिशा में बढ़ता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
लेखक परिचय
लेखक: राजनीतिक संवाददाता, देश की पत्रिका
विशेषज्ञता: राष्ट्रीय राजनीति, सार्वजनिक नीति और संसद से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग।
संपादकीय नोट: यह रिपोर्ट सार्वजनिक बयानों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। जहां नेताओं के आरोप शामिल हैं, उन्हें उनके दावों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
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