उत्तर प्रदेश के लाखों कामगारों के लिए मंगलवार का दिन एक बड़ी खुशखबरी लेकर आया। लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में हुई कैबिनेट बैठक में यूपी मजदूरी संहिता 2026 (UP Wage Code 2026) पर मुहर लगा दी गई है। इस फैसले के बाद प्रदेश में काम करने वाले हर छोटे-बड़े कर्मचारी के वेतन और अधिकारों से जुड़े नियम पूरी तरह से बदल जाएंगे, जिससे सीधे तौर पर उन्हें फायदा होगा।
सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि नई संहिता लागू होने के बाद कोई भी कंपनी या ठेकेदार अपने कर्मचारियों को तय ‘न्यूनतम मजदूरी’ से कम पैसा नहीं दे सकेगा। आप चाहे किसी भी सेक्टर, फैक्ट्री या ऑफिस में काम करते हों, यह नियम सब पर लागू होगा। यही नहीं, अगर आपसे आपकी शिफ्ट के बाद ज्यादा देर तक काम (ओवरटाइम) लिया जाता है, तो इसके लिए कंपनियों को दोगुनी दर से भुगतान करना ही होगा।
अक्सर देखा जाता है कि नौकरी छोड़ने या निकाले जाने पर कर्मचारियों को अपने ही पैसों (Full and Final Settlement) के लिए महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं। लेकिन नए नियमों ने इस परेशानी को खत्म कर दिया है। अब नौकरी छोड़ने के महज दो दिन के अंदर कंपनी को कर्मचारी का पूरा हिसाब करना होगा।
बड़ी राहत: अब नौकरी छोड़ने या निकाले जाने पर कर्मचारियों को अपने पैसों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। कंपनियों को 48 घंटे (दो दिन) के भीतर पूरा बकाया चुकाना अनिवार्य कर दिया गया है।
कर्मचारियों की जिंदगी में क्या-क्या बदलेगा?
इस नए कानून का सबसे ज्यादा असर कार्यस्थल पर होने वाले भेदभाव और मनमानी को रोकने पर पड़ेगा। अब महिला और पुरुष कर्मचारियों को एक ही काम के लिए अलग-अलग सैलरी नहीं दी जा सकती; दोनों को बराबर वेतन मिलेगा।
इसके अलावा, एक और अहम नियम यह जोड़ा गया है कि हर कर्मचारी को वेतन देने से पहले ‘सैलरी स्लिप’ (वेतन पर्ची) देना अनिवार्य होगा। इससे पैसे के लेन-देन में पूरी पारदर्शिता रहेगी और कोई भी कंपनी कर्मचारियों को गुमराह नहीं कर सकेगी।
संविदा कर्मियों की बल्ले-बल्ले, दुखद घटनाओं पर भी स्पष्ट नियम
अक्सर ठेके (Contract) पर काम करने वाले कर्मचारियों को उनके हक का पैसा नहीं मिल पाता। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। संविदा कर्मियों की मजदूरी, ओवरटाइम और बोनस का पैसा सही समय पर मिले, इसकी सीधी जिम्मेदारी अब मुख्य कंपनी (Principal Employer) की होगी।
वहीं, अगर दुर्भाग्यवश ड्यूटी के दौरान या नौकरी में रहते हुए किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके बकाया पैसे तुरंत उसके नॉमिनी (नामित व्यक्ति) को दे दिए जाएंगे। अगर नॉमिनी नहीं है, तो कानूनी वारिस को यह पैसा मिलेगा, ताकि परिवार को दर-दर न भटकना पड़े।
मनमानी वेतन कटौती पर रोक और कानूनों का सरलीकरण
कंपनियां अब कर्मचारियों की सैलरी से मनमाने तरीके से पैसे नहीं काट सकेंगी। नए नियमों के मुताबिक, किसी भी हाल में वेतन से होने वाली वैधानिक कटौती 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकती। साथ ही, यह भी पक्का किया गया है कि कर्मचारी की कुल सैलरी (Gross Salary) का कम से कम 50 फीसदी हिस्सा उसकी ‘बेसिक सैलरी’ (मूल वेतन) के रूप में ही हो।
दरअसल, सरकार ने पुराने कई उलझे हुए श्रम कानूनों—जैसे न्यूनतम वेतन, बोनस और वेतन भुगतान से जुड़े नियमों—को मिलाकर एक आसान और स्पष्ट संहिता बना दी है। इससे न सिर्फ कंपनियों को नियम मानने में आसानी होगी, बल्कि एक आम कर्मचारी भी अपने अधिकारों को बेहतर ढंग से समझ सकेगा।
लेखक परिचय
लेखक: राजनीतिक संवाददाता, देश की पत्रिका
विशेषज्ञता: उत्तर प्रदेश सरकार एवं नीति-निर्माण कवरेज
संपादकीय नोट: यह लेख उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों और सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।
