स्वरा भास्कर पद्मावत जौहर विवाद: ट्रोल होने के बाद अभिनेत्री ने दी सफाई, कहा- 'मैंने महिलाओं को कभी कायर नहीं कहा'
संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • गुरुवार, 3 सितंबर 2026 | 05:13 PM
बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर स्वरा भास्कर पद्मावत जौहर विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है, जिसके बाद अभिनेत्री को नेटिजन्स के तीखे गुस्से का सामना करना पड़ा। 'वुमन, लाइफ, फ्रीडम' कार्यक्रम में संजय लीला भंसाली की साल 2018 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'पद्मावत' के जौहर दृश्य पर की गई टिप्पणी के बाद मचे बवाल पर अब स्वरा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने एक विस्तृत स्पष्टीकरण वीडियो जारी कर आलोचकों को करारा जवाब दिया है।
स्वरा भास्कर की सफाई: 'मैंने महिलाओं को कभी कायर नहीं कहा'
स्वरा भास्कर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर वीडियो साझा करते हुए स्पष्ट किया कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। उन्होंने कहा, \"मेरी बात का गलत अनुवाद और गलत अर्थ निकालकर यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि मैंने रानी पद्मावती और जौहर करने वाली ऐतिहासिक महिलाओं को 'कायर' कहा था। मैंने ऐसा बिल्कुल नहीं कहा था।\" स्वरा के अनुसार, वह फिल्म के क्लाइमैक्स को एक अलग और समकालीन संदर्भ में देख रही थीं।
सिनेमा और समाज का रिश्ता हमेशा से गहरा रहा है। जैसे अतीत में श्रीदेवी ने ठुकरा दी थी 9 हजार करोड़ कमाने वाली हॉलीवुड फिल्म और अपने मजबूत फैसलों से इतिहास रचा, वैसे ही आज के दौर की अभिनेत्रियां भी फिल्मों के संदेशों और उनके सामाजिक प्रभावों पर खुलकर अपनी राय रखती हैं। स्वरा का कहना है कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी ऐतिहासिक पात्र या जौहर करने वाली महिलाओं का अपमान करना या उन्हें कमजोर दिखाना नहीं था।
विवाद की जड़: 'पद्मावत' के जौहर दृश्य पर सवाल
क्या पवित्रता जीवन से अधिक महत्वपूर्ण है?
स्वरा भास्कर ने अपने वीडियो में समाज की मानसिकता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि क्या किसी महिला की 'पवित्रता' को उसकी जिंदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए? अभिनेत्री का तर्क था कि यदि कोई महिला किसी बर्बर हमले या बलात्कार की शिकार होती है, तो क्या उसके लिए जीवित बचना शर्म की बात होनी चाहिए? उन्होंने कहा कि समाज में बलात्कार एक गंभीर और व्यापक समस्या बन चुका है और ऐसे माहौल में फिल्मों के संदेशों पर सवाल उठाना बेहद जरूरी है।
देश में चल रही अन्य बड़ी चर्चाओं, जैसे कि आम जनता के बजट को प्रभावित करने वाले पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों के बीच, यह वैचारिक बहस भी तेजी से वायरल हो रही है। स्वरा ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध उस सोच से है जो महिला के अस्तित्व को केवल उसकी शारीरिक पवित्रता से जोड़कर देखती है और उसे जीने के अधिकार से वंचित करने की वकालत करती है।
निर्भया के साहस को किया याद
अपने विचारों को मजबूती देने के लिए स्वरा भास्कर ने देश को झकझोर देने वाले निर्भया कांड का भी जिक्र किया। उन्होंने निर्भया के साहस और जीने की इच्छा को याद करते हुए कहा कि महिलाओं के संघर्ष और जीने की अदम्य इच्छाशक्ति को किसी भी सूरत में कमतर नहीं आंका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक समाज में हमें महिलाओं को जीने और संघर्ष करने के लिए प्रेरित करना चाहिए, न कि उन्हें किसी भी परिस्थिति में आत्मसमर्पण करने या जीवन समाप्त करने की रूढ़िवादी सोच का समर्थन करना चाहिए।
यह बहस ऐसे समय में सामने आई है जब देश में कई महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं। उदाहरण के लिए, बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बुल्डोजर चलने और नवीनीकरण की तैयारी की जा रही है, जो देश के बदलते स्वरूप को दर्शाता है। इसी तरह, स्वरा का मानना है कि सामाजिक और सांस्कृतिक सोच में भी बदलाव की सख्त जरूरत है।