उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की भर्ती प्रक्रिया में वेटिंग लिस्ट लागू करने और अभ्यर्थन वापसी की व्यवस्था शुरू करने की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्र लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि आयोग की विभिन्न भर्तियों में लाखों अभ्यर्थी शामिल होते हैं, लेकिन चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कई पद खाली रह जाते हैं।
छात्रों के मुताबिक, कई अभ्यर्थियों का चयन एक साथ अलग-अलग सरकारी भर्तियों में हो जाता है, जिसके चलते वे बेहतर पद या सेवा मिलने पर UPSSSC से मिले पद पर ज्वाइन नहीं करते। इसके अलावा व्यक्तिगत कारणों, दूर-दराज के जिलों में पोस्टिंग और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में अनुपस्थित रहने की वजह से भी कई सीटें खाली रह जाती हैं।
छात्रों की मांग है कि मुख्य चयन सूची के साथ ही करीब 10 से 20 फीसदी पदों तक की वेटिंग लिस्ट तैयार की जाए और इसे कम-से-कम एक साल तक वैध रखा जाए।
तीन गुना अभ्यर्थियों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, फिर वेटिंग लिस्ट क्यों नहीं?
छात्रों का तर्क है कि जब कई भर्तियों में रिक्त पदों के मुकाबले लगभग तीन गुना अभ्यर्थियों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाता है, तो इसी आधार पर नीचे के क्रम में वेटिंग लिस्ट तैयार की जा सकती है। इससे चयनित अभ्यर्थी के ज्वाइन न करने पर अगली मेरिट वाले अभ्यर्थी को मौका मिल सकेगा।
छात्रों ने मांग की है कि मुख्य चयन सूची के साथ ही करीब 10 से 20 फीसदी पदों तक की वेटिंग लिस्ट तैयार की जाए। उनका कहना है कि यह सूची एक निश्चित अवधि, जैसे एक साल तक वैध रखी जाए, ताकि इसी भर्ती के दौरान खाली होने वाले पदों को योग्य अभ्यर्थियों से भरा जा सके।
नई भर्ती में जाया होता है समय और सरकारी संसाधन
प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में चयन के बाद पद खाली रह जाने पर उन्हें उसी भर्ती से नहीं भरा जाता। बाद में उन पदों के लिए अलग से नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती है, जिसमें परीक्षा कराने, मूल्यांकन और चयन की पूरी प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ती है।
छात्रों का दावा है कि इससे एक तरफ सरकारी विभागों में कर्मचारियों की कमी बनी रहती है, वहीं दूसरी तरफ युवाओं का समय और सरकारी संसाधन दोनों खर्च होते हैं।
अभ्यर्थन वापसी की भी उठी मांग, अधिकारियों से मिल चुके छात्र
छात्रों ने वेटिंग लिस्ट के साथ-साथ अभ्यर्थन वापसी की प्रक्रिया लागू करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि जो अभ्यर्थी किसी भर्ती में आगे चयनित हो जाते हैं या किसी कारण से संबंधित पद पर नहीं जाना चाहते, उनके लिए अभ्यर्थन वापस लेने की स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए। इससे खाली होने वाले पदों की जानकारी समय पर मिल सकेगी और वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थियों को मौका दिया जा सकेगा।
छात्रों का दावा है कि वे इस मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, विभागीय सचिव और अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर ज्ञापन भी सौंप चुके हैं। छात्रों का मानना है कि वेटिंग लिस्ट लागू होने से उन अभ्यर्थियों को भी अवसर मिलेगा, जो मुख्य चयन सूची से कुछ अंकों या दशमलव के अंतर से बाहर रह जाते हैं, और इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।

