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कान्हा से द्वारकाधीश तक का सफर, पूर्व IAS की किताब 'ईकोज ऑफ डिवाइनिटी' में ब्रज का समृद्ध इतिहास

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संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार • शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 | 10:48 AM

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कान्हा से द्वारकाधीश तक का सफर, पूर्व IAS की किताब 'ईकोज ऑफ डिवाइनिटी' में ब्रज का समृद्ध इतिहास
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पूर्व प्रशासनिक अधिकारी आराधना जौहरी की शोधपरक पुस्तक 'ईकोज ऑफ डिवाइनिटी' का विमोचन हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के पावन अवसर पर किया गया। यह ऐतिहासिक रचना केवल एक धार्मिक विवरण नहीं है, बल्कि यह कान्हा के बाल रूप से लेकर द्वारकाधीश बनने तक के अलौकिक व ऐतिहासिक सफर का अत्यंत सूक्ष्म एवं प्रमाणिक दस्तावेज है। ब्रजभूमि का इतिहास, इसकी समृद्ध मूर्तिकला और श्रीकृष्ण जन्मस्थान का क्रमिक घटनाक्रम इस पुस्तक की मूल आत्मा है।

मुख्य बिंदु एवं पुस्तक की पृष्ठभूमि

वर्ष 1980 बैच की वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी आराधना जौहरी ने उत्तर प्रदेश शासन और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। वर्ष 2021 में प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त होने वाली आराधना जौहरी का प्रशासनिक एवं सांस्कृतिक अनुभव अत्यंत व्यापक रहा है। वे स्वयं उत्तराखंड में जिलाधिकारी के रूप में पदस्थ रहीं, जबकि उनसे पूर्व उनके पिता आरएस जौहरी ने भी उसी जनपद में जिलाधिकारी का दायित्व निभाया था। उत्तराखंड के पौराणिक मंदिरों पर गहन शोध करने के बाद उन्होंने एक लोकप्रिय पुस्तक की रचना की थी।

वर्ष 2022 में जब आराधना जौहरी ने अपनी वह पुस्तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट की, तो मुख्यमंत्री ने उनके शोध कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इसी मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें ब्रजभूमि की अलौकिक धरोहर और इतिहास पर एक विस्तृत ग्रंथ तैयार करने का मूल्यवान सुझाव दिया। मुख्यमंत्री के इस सुझाव को स्वीकार करते हुए आराधना जौहरी ने वर्ष 2022 में ही इस विशाल शोध कार्य का शुभारंभ कर दिया, जिसके सुखद परिणाम स्वरूप 'ईकोज ऑफ डिवाइनिटी' ग्रंथ सामने आया। देश में धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक जागरण के दौर में, जैसे हाल ही में जीतेंद्र मिश्र को अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट का सीईओ नियुक्त कर अयोध्या धाम के प्रबंधन को सुदृढ़ किया गया है, वैसे ही मथुरा-ब्रज क्षेत्र के प्रामाणिक इतिहास को संजोना एक ऐतिहासिक आवश्यकता बन गया था।

पुस्तक 'ईकोज ऑफ डिवाइनिटी' के तीन मुख्य भाग

यह पुस्तक तीन सुव्यवस्थित एवं विस्तृत अध्यायों में विभाजित है, जो पाठकों को ब्रज संस्कृति के प्रत्येक आयाम से परिचित कराती है:

1. प्रथम भाग: ब्रज का समृद्ध इतिहास एवं भक्ति आंदोलन

पुस्तक के प्रथम हिस्से में ब्रज क्षेत्र का प्राचीन व मध्यकालीन इतिहास अंकित है। इसमें ब्रज में पनपे विभिन्न भक्ति संप्रदायों, वल्लभ संप्रदाय, गौड़ीय संप्रदाय, निंबार्क संप्रदाय और भक्ति आंदोलन के सामाजिक प्रभावों की विस्तृत समीक्षा की गई है। इसके साथ ही ब्रज की मूर्तिकला के विकास और श्रीकृष्ण जन्मस्थान के ऐतिहासिक महत्व को तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया गया है।

2. द्वितीय भाग: कान्हा से द्वारकाधीश तक का सफर

द्वितीय भाग भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, माखन चोरी, गोवर्धन धारण जैसी कथाओं के साथ-साथ उनके राजनीतिक एवं ऐतिहासिक जीवन चरित्र पर प्रकाश डालता है। कृष्ण केवल ग्वाल-बालों संग लीलाएं रचाने वाले माखनचोर नहीं थे, बल्कि उन्होंने जीवन में कई भीषण झंझावातों और युद्धों का सामना किया। ब्रज छोड़ने के पश्चात जब वे गुजरात में द्वारकाधीश बने, तो उनका एक सर्वथा भिन्न, कूटनीतिक और सम्राट रूप प्रकट हुआ। पुस्तक का यह खंड इस रूपांतरण का ऐतिहासिक व दार्शनिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। जिस प्रकार प्रशासनिक और सामाजिक जीवन में एक व्यक्ति कई चरणों से गुजरता है—चाहे वह राजनीतिक परिदृश्य में प्रशासन से सार्वजनिक जीवन तक का सफर हो या जनसेवा का मार्ग—श्रीकृष्ण का जीवन भी संघर्ष और धर्म स्थापना की अद्वितीय मिसाल है।

3. तृतीय भाग: ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा और तीर्थ स्थलियां

तीसरे खंड में ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग की भौगोलिक, धार्मिक और पारिस्थितिकीय जानकारी दी गई है। इसमें ब्रज के प्राचीन मंदिरों, वन-उपवनों, पौराणिक कुंड-सरोवरों और गोवर्धन पर्वत की महत्ता का सूक्ष्म विवरण शामिल है। पदयात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह भाग किसी प्रमाणिक मार्गदर्शिका से कम नहीं है।

गहन शोध और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक

लेखिका आराधना जौहरी के अनुसार, इस पुस्तक को लिखने से पूर्व उन्होंने वर्षों तक ऐतिहासिक ग्रंथों, अभिलेखों और पुरातात्विक साक्ष्यों का गहन अध्ययन किया। ब्रज केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह भारतीय चेतना का केंद्र बिंदु है। वर्तमान समय में जहां एक ओर राज्यों में विकास और सामाजिक योजनाओं को लेकर विमर्श छिड़ा हुआ है, जैसे यूपी में महिलाओं की सामाजिक भूमिका और कल्याणकारी नीतियों पर राजनीतिक चर्चाएं होती हैं, वहीं दूसरी ओर देश की आत्मा को जोड़े रखने में ऐसी सांस्कृतिक पुस्तकें मील का पत्थर साबित होती हैं।

पुस्तक में ब्रज की लुप्त होती विरासत, कुंडों के संरक्षण और गोवर्धन पर्वत के पर्यावरणीय महत्व पर भी चिंता व्यक्त की गई है। यह रचना न केवल शोधार्थियों और इतिहासकारों के लिए एक अमूल्य निधि है, बल्कि आम पाठकों को भी अपनी जड़ों और सनातन संस्कृति के गूढ़ रहस्यों से जोड़ने का कार्य करती है।

निष्कर्ष

संक्षेप में कहा जाए तो पूर्व प्रशासनिक अधिकारी आराधना जौहरी की पुस्तक 'ईकोज ऑफ डिवाइनिटी' भगवान श्रीकृष्ण के जीवनदर्शन और ब्रजभूमि के गरिमामय इतिहास का एक अनुपम दस्तावेज है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इसका विमोचन किया जाना इसके प्रामाणिक और राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करता है। यह पुस्तक पाठकों को कान्हा की मधुर बाल लीलाओं से लेकर द्वारकाधीश की गंभीर राजनीति तक के अद्भुत सफर की ज्ञानवर्धक यात्रा कराती है।

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